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पीएम मोदी ने गुजरात दौरे की तस्वीरें की साझा, दोहराया ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प

June 07, 2026

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गुजरात दौरे की झलकियां शेयर की हैं। उन्होंने सूरत शहर की प्रशंसा की और कहा कि इस जीवंत शहर से हमने मिलकर भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का अपना संकल्प दोहराया।


पीएम मोदी ने साझा की वीडियो


प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुजरात दौरे के अगले दिन आज शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो शेयर किया। पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “कल सूरत के लोगों के बीच रहना बहुत अच्छा लगा। इस जीवंत शहर से हमने मिलकर भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का अपना संकल्प दोहराया।”वीडियो में पीएम मोदी ने कार्यक्रमों शामिल होने की तस्वीरें और अपने भाषणों के कुछ अंश शेयर किए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे कई बार लगता है कि ये सूरत शहर नहीं है, सूरत एक स्पिरिट है। हमारा संकल्प ‘विकसित गुजरात’ और ‘विकसित भारत’ इस संकल्प को सिद्ध करना व सेवा के भाव से समर्पित होकर के करना है।”



एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भरता जरूरी


उन्होंने कहा कि ये जो वैश्विक संकट चल रहा है, ये दिखाता है कि एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भरता कितनी जरूरी है। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भर भारत का क्या मतलब होता है, ये हजीरा जाने पर भी साफ दिखता है। हजीरा आज केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं है। यह एक ऐसा इकोसिस्टम बन चुका है जहां, एनर्जी है, स्टील है, डिफेंस प्रोडक्शन है, पोर्ट है, और ग्लोबल ट्रेड का इकोसिस्टम है। हजीरा, देश के एक बड़े ‘मेरीटाइम इंडस्ट्रियल हब’ के रूप में विकसित हो रहा है, आत्मनिर्भर भारत के एक बड़े सेंटर के रूप में उभर रहा है।”



पीएम मोदी ने विरोधियों पर साधा निशाना


उन्होंने विरोधियों पर भी निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, “आज देश में कुछ निराशावादी लोग हैं, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान का मज़ाक उड़ाते रहते हैं। देश के इस संकल्प को वो लगातार नीचा ही दिखाते हैं।”


भारत असीमित आशावाद वाला देश


प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “भारत, नकारात्मकता से कहीं आगे निकल चुका है। ये असीमित आशावाद वाला देश है। अद्भुत आकांक्षाओं से लैस देश है। भारत के नागरिक सपनों से भरे हुए हैं, संकल्पों से भरे हुए हैं। और संकल्प को सिद्धि में बदलने के लिए प्रतिबद्ध जनता जनार्दन है। और जब देश की जनशक्ति संकल्पित है, तो देश हर लक्ष्य पा सकता है और यही भारत की ताकत है।” (इनपुट-आईएएनएस)

पीएम मोदी ने गुजरात दौरे की तस्वीरें की साझा, दोहराया ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प पीएम मोदी ने गुजरात दौरे की तस्वीरें की साझा, दोहराया ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प Reviewed by SBR on June 07, 2026 Rating: 5

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस : सुरक्षित आहार से ही स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव

June 07, 2026

 



मानव जीवन की आधारशिला भोजन है, पर भोजन तभी जीवनदायी बनता है जब वह सुरक्षित, स्वच्छ और पोषणयुक्त हो। “अन्नं ब्रह्मेति व्यजानात्” उपनिषदों की यह दिव्य उद्घोषणा अन्न को ब्रह्म के समकक्ष प्रतिष्ठित करती है, क्योंकि समस्त जीवन की धारा उसी से प्रवाहित होती है। अन्न केवल शरीर की भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति, स्वास्थ्य और मानव अस्तित्व का मूलाधार है। यदि भोजन ही रोगों का वाहक बन जाए, तो वह अमृत के स्थान पर विष का कार्य करने लगता है। आज वैश्वीकरण, तीव्र शहरीकरण, बदलती जीवन शैली और जटिल होती खाद्य आपूर्ति प्रणालियों के युग में खाद्य सुरक्षा (Food Safety) केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। इक्कीसवीं शताब्दी में जब विश्व अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति, वैश्वीकरण और तकनीकी क्रांति के युग में प्रवेश कर चुका है, तब खाद्य सुरक्षा का प्रश्न पहले से कहीं अधिक जटिल और महत्वपूर्ण बन गया है।


इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day) मनाया जाता है। यह दिवस सुरक्षित भोजन के महत्व के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने, खाद्य जनित रोगों की रोकथाम तथा “सुरक्षित भोजन, स्वस्थ जीवन” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है। वास्तव में, सुरक्षित भोजन स्वस्थ समाज, सशक्त अर्थव्यवस्था और सतत भविष्य की अनिवार्य शर्त है।


विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस : वैश्विक जागरूकता का उदय


खाद्य जनित रोगों से उत्पन्न गंभीर वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर 2018 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। वर्ष 2019 में इसका प्रथम आयोजन हुआ और तब से यह दिवस विश्वव्यापी जन-जागरूकता अभियान का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। इस पहल के पीछे संयुक्त राष्ट्र की दो प्रमुख संस्थाओं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन संस्थाओं ने यह स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा केवल भोजन उत्पादन का प्रश्न नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक कल्याण का आधार है। आज यह दिवस सरकारों, वैज्ञानिकों, कृषकों, खाद्य उद्योगों, उपभोक्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहां सुरक्षित भोजन के माध्यम से स्वस्थ भविष्य की दिशा में वैश्विक संकल्प व्यक्त किया जाता है।


खाद्य सुरक्षा की अवधारणा : खेत से थाली तक सुरक्षा का विज्ञान


सामान्यतः लोग खाद्य उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों में मौलिक अंतर है। भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना खाद्य सुरक्षा (Food Security) का विषय है, जबकि भोजन का स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और हानि रहित होना खाद्य संरक्षा (Food Safety) का विषय है।खाद्य सुरक्षा का तात्पर्य ऐसे भोजन से है जो उपभोग के समय किसी भी प्रकार के जैविक, रासायनिक अथवा भौतिक जोखिम से मुक्त हो तथा आवश्यक पोषण प्रदान करने में सक्षम हो। यह केवल स्वाद, रंग या गुणवत्ता का प्रश्न नहीं, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा का विषय है। आधुनिक खाद्य विज्ञान में “फार्म टू फोर्क” (Farm to Fork) अथवा “खेत से थाली तक” की अवधारणा को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। इसका अर्थ है कि खेती, कटाई, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और उपभोग प्रत्येक चरण में सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए। खाद्य सुरक्षा की पूरी श्रृंखला उतनी ही मजबूत होती है जितनी उसकी सबसे कमजोर कड़ी।


वैश्विक परिदृश्य : दूषित भोजन की अदृश्य महामारी


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 60 करोड़ लोग दूषित भोजन के कारण बीमार पड़ते हैं और लगभग 4.2 लाख लोगों की मृत्यु खाद्य जनित रोगों से हो जाती है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है, जो इस संकट की गंभीरता को और अधिक स्पष्ट करती है। दूषित भोजन केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं है; यह आर्थिक विकास पर भी गहरा प्रभाव डालता है। असुरक्षित भोजन के कारण स्वास्थ्य व्यय बढ़ता है, श्रम उत्पादकता घटती है, व्यापार प्रभावित होता है और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ता है। वैश्वीकरण के वर्तमान युग में खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाएं महाद्वीपों तक फैली हुई हैं। किसी एक देश में उत्पन्न खाद्य जोखिम कुछ ही दिनों में विश्व के अनेक देशों तक पहुंच सकता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा अब राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक उत्तरदायित्व बन चुकी है।


खाद्य जनित रोग : स्वास्थ्य पर अदृश्य आक्रमण


दूषित भोजन अनेक प्रकार की बीमारियों और संक्रमणों का कारण बनता है। इनके प्रमुख स्रोत जैविक, रासायनिक तथा भौतिक प्रदूषक होते हैं। जैविक जोखिम: साल्मोनेला, ई-कोलाई, लिस्टेरिया जैसे जीवाणु; नोरोवायरस और हेपेटाइटिस-ए जैसे विषाणु; तथा विभिन्न परजीवी संक्रमण भोजन को विषाक्त बना सकते हैं। रासायनिक जोखिम: कीटनाशकों, उर्वरकों, भारी धातुओं, औद्योगिक प्रदूषकों तथा कृत्रिम रसायनों की अत्यधिक उपस्थिति मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है। भौतिक एवं मानवीय कारण: खाद्य मिलावट, दूषित जल, अस्वच्छ भंडारण, अनुचित परिवहन और प्रसंस्करण में लापरवाही खाद्य सुरक्षा को कमजोर बनाते हैं। ये सभी कारक मानव शरीर में अल्पकालिक संक्रमण से लेकर कैंसर, यकृत रोग, गुर्दा विकार और तंत्रिका तंत्र संबंधी गंभीर समस्याओं तक को जन्म दे सकते हैं।


सार्वजनिक स्वास्थ्य की आधारशिला के रूप में खाद्य सुरक्षा


खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच गहरा और अविभाज्य संबंध है। असुरक्षित भोजन कुपोषण, संक्रमण, दस्त, आंत्र रोगों तथा अनेक दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बनता है। इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव बच्चों, गर्भवती महिलाओं, वृद्धों तथा कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले व्यक्तियों पर पड़ता है। दूषित भोजन और कुपोषण एक दुष्चक्र का निर्माण करते हैं। बीमारी शरीर की पोषक तत्व ग्रहण करने की क्षमता को कम करती है, जिससे कुपोषण बढ़ता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति पुनः संक्रमण का शिकार हो जाता है। इसके विपरीत सुरक्षित एवं पोषणयुक्त भोजन स्वस्थ जीवन, बेहतर कार्यक्षमता, मानसिक विकास और उच्च जीवन गुणवत्ता का आधार बनता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा किसी भी राष्ट्र की मानव पूंजी निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।


सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में खाद्य सुरक्षा की भूमिका


खाद्य सुरक्षा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। सुरक्षित भोजन भूख और कुपोषण को समाप्त करने में सहायता करता है, स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्रोत्साहित करता है, गरीबी कम करता है, जिम्मेदार उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देता है तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। यदि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तो शून्य भूख, उत्तम स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और सतत कृषि जैसे लक्ष्य अधूरे रह जाएंगे। इस दृष्टि से खाद्य सुरक्षा सतत विकास की धुरी है, जिसके इर्द-गिर्द भविष्य की समस्त विकास नीतियां घूमती हैं।


भारत में खाद्य सुरक्षा : उपलब्धियां और चुनौतियां


भारत विश्व के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में से एक है। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और आधुनिक कृषि नीतियों के कारण देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं करोड़ों नागरिकों तक खाद्यान्न पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा के समक्ष अनेक चुनौतियां मौजूद हैं। भंडारण सुविधाओं की कमी, शीत श्रृंखला अवसंरचना का अभाव, खाद्य अपव्यय, मिलावट, स्वच्छता संबंधी समस्याएं तथा जागरूकता की कमी आज भी गंभीर चिंता का विषय हैं।


विधिक और संस्थागत ढांचा : सुरक्षित भोजन की प्रहरी व्यवस्था


भारत में खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 लागू किया गया। इसके अंतर्गत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की स्थापना की गई। एफएसएसएआई खाद्य मानकों का निर्धारण, लाइसेंसिंग, निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण, प्रयोगशाला नेटवर्क के विकास और उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन करती है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता संरक्षण कानून भी नागरिकों को सुरक्षित भोजन प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करते हैं।


खाद्य मिलावट : समाज के स्वास्थ्य पर एक करारा तमाचा


खाद्य मिलावट आधुनिक समाज के समक्ष सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। दूध में डिटर्जेंट और यूरिया, तेल में हानिकारक मिश्रण, मसालों में कृत्रिम रंग तथा मिठाइयों में रासायनिक पदार्थों की मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के विरुद्ध अपराध है। मिलावटी खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे शरीर में विष की भांति कार्य करते हैं और कैंसर, यकृत रोग, गुर्दा विकार तथा अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इस समस्या के समाधान हेतु कठोर कानूनों, नियमित निरीक्षण, त्वरित परीक्षण और जन-जागरूकता की आवश्यकता है।


विज्ञान और प्रौद्योगिकी : खाद्य सुरक्षा के आधुनिक प्रहरी


आधुनिक विज्ञान ने खाद्य सुरक्षा को नई दिशा प्रदान की है। अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं सूक्ष्म स्तर पर खाद्य पदार्थों की जांच कर रही हैं। जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ब्लॉकचेन और डिजिटल ट्रेसबिलिटी जैसी तकनीकें खाद्य सुरक्षा को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना रही हैं। आज किसी खाद्य उत्पाद की पूरी यात्रा खेत से उपभोक्ता तक का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे खाद्य जोखिमों की पहचान, निगरानी और नियंत्रण पहले की अपेक्षा कहीं अधिक आसान हो गया है।


जलवायु परिवर्तन : खाद्य सुरक्षा के समक्ष उभरता संकट


जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय में खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, तापमान वृद्धि और चरम मौसमी घटनाएं कृषि उत्पादन और खाद्य गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर रही हैं। बढ़ते तापमान के कारण रोगजनक सूक्ष्मजीवों तथा कीटों का प्रसार भी बढ़ रहा है, जिससे खाद्य जनित रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसी परिस्थितियों में जलवायु-सहिष्णु कृषि, टिकाऊ उत्पादन प्रणाली और वैज्ञानिक संरक्षण उपायों को अपनाना अनिवार्य हो गया है।


जागरूक उपभोक्ता : खाद्य सुरक्षा की सबसे सशक्त कड़ी


खाद्य सुरक्षा केवल सरकारों और उद्योगों की जिम्मेदारी नहीं है। उपभोक्ता भी इस श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। खाद्य लेबल पढ़ना, समाप्ति तिथि की जांच करना, प्रमाणित उत्पादों का चयन करना, स्वच्छता बनाए रखना और खाद्य अपशिष्ट को कम करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। जागरूक उपभोक्ता न केवल स्वयं को सुरक्षित रखता है, बल्कि पूरे खाद्य तंत्र को अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाने में योगदान देता है।


विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस की बढ़ती प्रासंगिकता


वर्तमान समय में खाद्य सुरक्षा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत, ऑनलाइन खाद्य वितरण सेवाओं का विस्तार, वैश्विक व्यापार की जटिलता और बदलती जीवन शैली नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रही हैं। आज सुरक्षित भोजन को केवल उपभोक्ता अधिकार नहीं, बल्कि मानव के मौलिक स्वास्थ्य अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा का सशक्त अभियान है।


सुरक्षित भोजन, सुरक्षित मानवता


उपरोक्त विशद विवेचन से यह स्वतः स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा केवल एक स्वास्थ्य संबंधी विमर्श या प्रयोगशालाओं की संकीर्ण परिधि में सिमटा हुआ विषय नहीं है। भोजन केवल शरीर की ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की निरंतरता का आधार है। जिस समाज की थाली सुरक्षित होगी, उसका स्वास्थ्य सुदृढ़ होगा; जिसका स्वास्थ्य सुदृढ़ होगा, उसका विकास सुनिश्चित होगा। इसलिए खाद्य सुरक्षा केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि मानव कल्याण, सामाजिक न्याय और सतत विकास का व्यापक प्रश्न है।


विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस हमें यह संदेश देता है कि सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करना सरकार, किसान, उद्योग, वैज्ञानिक और उपभोक्ता सभी की साझा जिम्मेदारी है। खेत की मिट्टी से लेकर भोजन की थाली तक यदि सुरक्षा, स्वच्छता, गुणवत्ता और उत्तरदायित्व का समन्वय स्थापित हो जाए, तो न केवल रोगों पर नियंत्रण पाया जा सकता है, बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर विश्व की आधारशिला भी रखी जा सकती है। आज आवश्यकता केवल जागरूकता की नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प की है। जब प्रत्येक नागरिक सुरक्षित भोजन को अपना अधिकार और दायित्व दोनों मानेगा, तभी स्वस्थ मानवता और सतत भविष्य का स्वप्न साकार होगा। “सुरक्षित भोजन, स्वस्थ मानवता, समृद्ध राष्ट्र , सतत भविष्य।” यही विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस का सार है और यही मानव सभ्यता की सुरक्षित, स्वस्थ एवं उज्ज्वल कल की सबसे विश्वसनीय दिशा भी।

लेखक प्रसार भारती में वरिष्‍ठ पत्रकार हैं।

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस : सुरक्षित आहार से ही स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस : सुरक्षित आहार से ही स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव Reviewed by SBR on June 07, 2026 Rating: 5

विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति संरक्षण से ही सुरक्षित होगा भविष्य

June 05, 2026

 



हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने का एक वैश्विक अभियान है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जैव विविधता के क्षरण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। विश्व पर्यावरण दिवस लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और धरती को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश देता है।


विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास


विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत वर्ष 1972 में हुई थी। उस वर्ष स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव पर्यावरण पर पहला वैश्विक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। वर्ष 1974 में पहली बार इस दिवस का आयोजन किया गया और तब से यह दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणीय जन-जागरूकता अभियानों में शामिल हो गया है। हर वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है और कोई एक देश इसकी मेजबानी करता है। इस माध्यम से विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित किया जाता है और लोगों को समाधान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।


पर्यावरण का महत्व


पर्यावरण केवल पेड़-पौधों, नदियों, पहाड़ों और जीव-जंतुओं का समूह नहीं है, बल्कि यह जीवन का आधार है। स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी, उपजाऊ भूमि और संतुलित जलवायु मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य हैं। प्रकृति हमें भोजन, पानी, औषधियां, ऊर्जा और जीवन के लिए आवश्यक अनेक संसाधन प्रदान करती है। यदि पर्यावरण संतुलित रहता है तो मानव समाज का विकास भी स्थायी रूप से संभव होता है। लेकिन जब प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जाता है, जंगलों की कटाई होती है और प्रदूषण बढ़ता है, तब पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है। इसका असर केवल प्रकृति पर ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है।


बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियां


वर्तमान समय में पर्यावरण अनेक गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इनमें सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है। औद्योगिकीकरण, जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग और वनों की कटाई के कारण वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में बाढ़, सूखा, चक्रवात, जंगलों में आग और अत्यधिक गर्मी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


प्रदूषण से बढ़ रहा स्वास्थ्य पर खतरा


वायु प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन चुका है। वाहनों, उद्योगों और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले धुएं के कारण हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रदूषित हवा हर वर्ष लाखों लोगों की असमय मृत्यु का कारण बनती है। जल प्रदूषण भी चिंता का विषय है। नदियों, झीलों और समुद्रों में औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा और रासायनिक पदार्थों के पहुंचने से जल स्रोत दूषित हो रहे हैं। इससे न केवल मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाता है।


प्लास्टिक प्रदूषण की बढ़ती समस्या


आज प्लास्टिक प्रदूषण विश्व की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है। एक बार उपयोग होने वाला प्लास्टिक पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लगते हैं, इसलिए यह भूमि, जल और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को लंबे समय तक प्रभावित करता है। हर वर्ष लाखों टन प्लास्टिक समुद्रों में पहुंचता है, जिससे समुद्री जीवों को भारी नुकसान होता है। कई बार मछलियां, कछुए और पक्षी प्लास्टिक को भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। माइक्रोप्लास्टिक अब भोजन और पेयजल तक पहुंच चुका है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाना आवश्यक है।


जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता


धरती पर मौजूद विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु, पौधे और सूक्ष्मजीव मिलकर जैव विविधता का निर्माण करते हैं। यह जैव विविधता पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन मानव गतिविधियों के कारण अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। वनों की कटाई, प्रदूषण, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। यदि जैव विविधता का संरक्षण नहीं किया गया तो खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वनों का संरक्षण, वन्यजीव अभयारण्यों का विकास और प्राकृतिक आवासों की रक्षा जैव विविधता को बचाने के लिए आवश्यक कदम हैं।


भारत और पर्यावरण संरक्षण


भारत पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। देश में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे कार्यक्रम, हरित भारत अभियान और एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध जैसे कदम भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलें स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास हैं। हालांकि सरकारों के प्रयास तभी सफल हो सकते हैं जब आम नागरिक भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं। पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।


पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की भूमिका


पर्यावरण को बचाने के लिए हर व्यक्ति छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़ा बदलाव ला सकता है। पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना, पानी की बचत करना, बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करना, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना और प्लास्टिक का कम उपयोग करना ऐसे उपाय हैं जिन्हें आसानी से अपनाया जा सकता है। कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का उपयोग करना भी महत्वपूर्ण है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को इस दिशा में प्रेरित किया जा सकता है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया भी पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।


सतत विकास की अवधारणा


आज दुनिया में सतत विकास की अवधारणा को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसका अर्थ है कि वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करे कि भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना सतत विकास का मूल उद्देश्य है। यदि विकास की परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभावों का ध्यान रखा जाए, स्वच्छ तकनीकों का उपयोग किया जाए और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग किया जाए, तो विकास और पर्यावरण दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।


सामूहिक प्रयासों से ही संभव होगा पर्यावरण संरक्षण


विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पृथ्वी केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। पर्यावरण संरक्षण कोई एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। आज जिस प्रकार जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण की चुनौतियां बढ़ रही हैं, उन्हें देखते हुए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। सरकारों, उद्योगों, वैज्ञानिकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करना होगा। यदि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलेंगे तो ही एक स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव होगा। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यही संदेश देता है कि धरती की रक्षा करना केवल विकल्प नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व के लिए अनिवार्य आवश्यकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति संरक्षण से ही सुरक्षित होगा भविष्य विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति संरक्षण से ही सुरक्षित होगा भविष्य Reviewed by SBR on June 05, 2026 Rating: 5

ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’, कहा- भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील

June 05, 2026

 



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही व्यापार समझौता हो सकता है। व्हाइट हाउस में कोयला और ऊर्जा नीति पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत की शुल्क (टैरिफ) व्यवस्था की लंबे समय से आलोचना करने के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता आगे बढ़ रही है।


वहीं सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के हालिया भारत दौरे के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के करीब पहुंचने संबंधी खबरों पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, “हां, हम यह समझौता कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हम समझौता कर लेंगे, क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं। हमारी आपस में बहुत अच्छी बनती है और हम एक समझौता करेंगे। हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं।”


इस दौरान ट्रंप ने अपनी पुरानी शिकायत भी दोहराई कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर काफी अधिक टैरिफ लगाता रहा है। उन्होंने कहा, “भारत ने कई वर्षों तक अमेरिका का फायदा उठाया। वे हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलते थे और खुद लगभग कुछ नहीं देते थे।”


ट्रंप ने उदाहरण देते हुए हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों का जिक्र किया। उनका कहना था कि पहले भारी आयात शुल्क के कारण अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में कारोबार करना मुश्किल था। उन्होंने कहा, “पहले भारत हार्ले-डेविडसन की मोटरसाइकिलों पर 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगा देता था। इसलिए कंपनी के लिए वहां कारोबार करना मुश्किल हो गया। आखिरकार हार्ले-डेविडसन को भारत में अपने ही प्लांट लगाने पड़े।”


ट्रंप ने कहा कि पहले की व्यापारिक व्यवस्थाओं और उनकी सरकार की मौजूदा नीति में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा, “वे हमारे उत्पादों पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाते थे और हम उनसे कुछ नहीं लेते थे। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है और हम भारत के साथ व्यापार से अच्छी कमाई कर रहे हैं।”


ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली में इस बात की उम्मीद बढ़ रही है कि दोनों देशों के वार्ताकार एक ऐसे व्यापार समझौते के करीब पहुंच रहे हैं, जिससे बाजार तक पहुंच आसान होगी और टैरिफ से जुड़े कई विवाद कम हो सकते हैं।


भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में व्यापार सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन चुका है। दोनों सरकारें लगातार इस बात पर जोर देती रही हैं कि रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को भी और मजबूत किया जाना चाहिए।


ट्रंप की बातों में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों की झलक भी दिखाई दी, जिसका जिक्र वह अक्सर करते रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान दोनों नेताओं ने कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जिनमें ह्यूस्टन का “हाउडी मोदी” कार्यक्रम और अहमदाबाद का “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम शामिल हैं। (इनपुट-आईएएनएस)

ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’, कहा- भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’, कहा- भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील Reviewed by SBR on June 05, 2026 Rating: 5

कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला

June 04, 2026

 



पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले।




सेंसेक्स 410 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,935.83 पर खुला, जबकि निफ्टी 100 अंकों से अधिक यानी करीब 0.5 प्रतिशत फिसल गया।


सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी रियल्टी 0.67 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.53 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। इसी तरह फार्मा और हेल्थकेयर सूचकांकों में भी 0.5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी केमिकल्स सूचकांक मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।


इस बीच, निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में ट्रेंट, आइशर मोटर्स, सिप्ला, इन्फोसिस और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे, जिनमें एक प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। पश्चिम एशिया को लेकर अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए हुए है।




कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 1.33 प्रतिशत गिरकर 96.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.31 प्रतिशत फिसलकर 94.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


एशियाई बाजारों में भी दबाव देखा गया। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट 3 प्रतिशत तक की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। उधर, अमेरिकी शेयर बाजारों में भी कमजोरी रही। एसएंडपी 500 सूचकांक 0.74 प्रतिशत और नैस्डैक 0.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।


(इनपुट-आईएएनएस)


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भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम का शानदार प्रदर्शन, सिंगापुर पर 25 गोल की जीत

June 04, 2026

 


भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम ने सिंगापुर को 25-0 से हराकर ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल किया है और एशिया कप के सेमीफाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है।


मंगलवार को हुए मुकाबले में भारतीय टीम की तरफ से 10 अलग-अलग खिलाड़ियों ने गोल किए। नौशीन नाज ने सर्वाधिक सात गोल (8′, 13′, 17′, 18′, 40′, 52′, 58′) किए। गीताश्री नम्मी, जिन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया, ने पांच गोल (13′, 28′, 47′, 48′, 60′) किए, जबकि कप्तान स्वीटी कुजूर ने चार गोल (2′, 24′, 38′, 45′) किए।


प्रियंका मिंज ने भी हैट्रिक (22′, 37′, 53′) बनाई, जबकि दीया (27′), नैन्सी सरोहा (36′), श्रुति कुमारी (40′), पुष्पा मांझी (47′), रश्मीन कौर (47′), और संदीपा कुमारी (51′) ने 1-1 गोल किए।





भारतीय टीम ने अपने आक्रामक खेल से मैच की शुरुआत में ही अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। कप्तान स्वीटी ने दूसरे मिनट में गोल किया। फिर नौशीन ने आठवें मिनट में बढ़त बढ़ाई। गीताश्री और नौशीन दोनों ने 13वें मिनट में गोल कर मैच पर भारत का दबदबा स्थापित कर दिया।


दूसरे क्वार्टर में, भारतीय टीम ने अपना दबदबा और बढ़ाया, नौशीन ने दो तेज गोल किए। इसके बाद प्रियंका और स्वीटी ने हाफटाइम से पहले भारत की बढ़त बढ़ाने में मदद की।


ब्रेक के बाद भी गोलों का सिलसिला जारी रहा। दीया और गीताश्री ने तीसरे क्वार्टर की शुरुआत में ही गोल किए, जिसमें नैन्सी, प्रियंका, स्वीटी, नौशीन और श्रुति सभी ने गोल किए, जिससे भारत ने सिंगापुर की रक्षापंक्ति को तोड़ दिया। भारत ने आखिरी क्वार्टर में दस गोल किए। अंडर-18 स्तर पर भारतीय टीम के सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से यह एक है।



भारत ने मलेशिया, कोरिया और सिंगापुर के खिलाफ जीत हासिल की, और पूल ए में बिना हारे रिकॉर्ड और 9 अंक के साथ टॉप पर रहा। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में जगह बना ली है।


(इनपुट-आईएएनएस)

भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम का शानदार प्रदर्शन, सिंगापुर पर 25 गोल की जीत भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम का शानदार प्रदर्शन, सिंगापुर पर 25 गोल की जीत Reviewed by SBR on June 04, 2026 Rating: 5

पीएम मोदी 5 जून को रहेंगे सूरत और दमन के दौरे पर, 21,700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात

June 04, 2026

 



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जून 2026 को गुजरात के सूरत और केंद्र शासित प्रदेश दमन का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सूरत और दमन में कुल ₹21,770 करोड़ से अधिक की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, राष्ट्र को समर्पण और आधारशिला रखेंगे।


कार्यक्रम का समय और विवरण:


सूरत में तय कार्यक्रम


– दोपहर करीब 2:30 बजे प्रधानमंत्री सूरत जिले के हजीरा पहुंचेंगे और वहां चल रहे औद्योगिक तथा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का जायजा लेंगे।

– शाम करीब 4:15 बजे सूरत में ₹18,800 करोड़ की लागत वाले विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

– इस मौके पर वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे।


मुख्य परियोजनाएं (सूरत):


– वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज VI और VII को राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

– NH-56 के चार लेन वाले हिस्सों की आधारशिला (आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक पहुंच बढ़ाने के लिए)

– 200 बिस्तरों वाला ESIC अस्पताल

– बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार

– दहेज पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (PCPIR), सारिगाम गुजरात औद्योगिक विकास निगम (GIDC) अपशिष्ट उपचार संयंत्र, जंबूसर बल्क ड्रग पार्क लेआउट सुविधाएं आदि शामिल हैं।


दमन में तय कार्यक्रम


– शाम करीब 6:15 बजे प्रधानमंत्री दमन पहुंचेंगे।

– NAMO हवाई अड्डे की नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन करेंगे

– NAMO अस्पताल को राष्ट्र को समर्पित करेंगे

– शाम 7:15 बजे ₹2,970 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे

– लक्षद्वीप के लिए ₹885 करोड़ की 4 महत्वपूर्ण परियोजनाओं (बंदरगाह विकास) की आधारशिला रखेंगे।


दमन की प्रमुख परियोजनाएं:


– Iconic Bridge, दमन कन्वेंशन सेंटर, NIFT परिसर

– NAMO हवाई अड्डा टर्मिनल और NAMO अस्पताल (₹1,340 करोड़)


प्रधानमंत्री की इस यात्रा को गुजरात और दादरा-नगर हवेली-दमन-दीव के समग्र विकास को नई गति देने वाली माना जा रहा है। इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन, औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। यह दौरा विकास कार्यों को तेजी देने और जनता से सीधा संवाद करने की प्रधानमंत्री की निरंतर रणनीति का हिस्सा है। 


इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए भी लगभग ₹885 करोड़ की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं में कल्पेनी द्वीप और कदमत द्वीप दोनों के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर बंदरगाह सुविधाओं का विकास शामिल है। इन बहुउद्देशीय जेटी के विकास से 300 मीटर तक की लंबाई वाले क्रूज जहाजों सहित बड़े यात्री जहाजों की साल भर गोदी (berthing) करने की सुविधा मिलेगी। 


ये परियोजनाएं यात्रियों और माल की सुरक्षित और कुशल आवाजाही को सक्षम बनाएंगी, साथ ही मछली प्रबंधन, ईंधन वितरण, बर्फ की आपूर्ति और नाव की मरम्मत के लिए एकीकृत सुविधाएं प्रदान करेंगी। ये पहलें समुद्री संपर्क को मज़बूत करेंगी, स्थानीय मछुआरों की आजीविका में सहायता करेंगी, पर्यटन को बढ़ावा देंगी और द्वीपों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देंगी। (इनपुट-पीआईबी)

पीएम मोदी 5 जून को रहेंगे सूरत और दमन के दौरे पर, 21,700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात पीएम मोदी 5 जून को रहेंगे सूरत और दमन के दौरे पर, 21,700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की देंगे सौगात Reviewed by SBR on June 04, 2026 Rating: 5

बुढ़ापा पैंशन से ‘प्राण वायु देवता पैंशन’ तक : अनोखी पहल

June 04, 2026

 



हरियाणा की पहचान केवल कृषि, खेल और सैनिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की अनेक जनहितकारी योजनाओं के कारण भी राज्य ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। जब भी वृद्धावस्था पैंशन की बात होती है तो लोगों को सबसे पहले चौधरी देवीलाल का नाम याद आता है। हरियाणा देश का पहला राज्य माना जाता है जिसने बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के लिए बुढ़ापा पैंशन जैसी योजना को लागू किया। 


यही कारण है कि आज भी करोड़ों लोग चौधरी देवीलाल को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं। समय के साथ हरियाणा की विभिन्न सरकारों ने सामाजिक सुरक्षा की इस परंपरा को आगे बढ़ाया और इसे नई सोच के साथ विस्तारित किया। इसी क्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 26 अक्तूबर 2023 को एक ऐसी अनोखी योजना शुरू की, जिसने न केवल देश बल्कि दुनिया का ध्यान भी आकर्षित किया। इस योजना का नाम है प्राण वायु देवता पैंशन योजना।


आमतौर पर पैंशन मनुष्यों को दी जाती है, लेकिन हरियाणा सरकार ने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृक्षों को भी सम्मान देने का निर्णय लिया। इस योजना के अंतर्गत ऐसे वृक्षों के संरक्षण और देखभाल के लिए उनके मालिकों को प्रतिवर्ष 2750 रुपए की पैंशन प्रदान की जाती है। योजना की बढ़ती लोकप्रियता और जनभागीदारी को देखते हुए सरकार ने अब इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिवर्ष कर दिया है। योजना शुरू होने के समय लगभग 3810 वृक्ष इसके अंतर्गत पंजीकृत थे, जिन्हें वार्षिक पैंशन का लाभ दिया जा रहा था। आज इन वृक्षों की संख्या बढ़कर लगभग 5000 तक पहुंच चुकी है। यह केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक हो रहे हैं और वृक्षों को केवल लकड़ी या भूमि उपयोग के साधन के रूप में नहीं बल्कि जीवनदाता के रूप में देखने लगे हैं।


वास्तव में वृक्ष मानव जीवन के सबसे बड़े संरक्षक हैं। वे हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वातावरण को शुद्ध बनाते हैं, भूजल संरक्षण में मदद करते हैं, तापमान को नियंत्रित करते हैं और जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं। बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण और जनसंख्या दबाव के कारण दुनिया भर में जंगलों का क्षेत्र लगातार घट रहा है। इसका सीधा प्रभाव जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, सूखा और बाढ़ जैसी समस्याओं के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे समय में यदि किसी राज्य की सरकार वृक्षों को सम्मान देने और उनके संरक्षण के लिए आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करती है तो यह निश्चित रूप से एक दूरदर्शी और अनुकरणीय पहल कही जाएगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसी सोच को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरूआत की। यह अभियान केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भावनाओं से जुड़ा एक जनआंदोलन बन गया। 


इस अभियान के अंतर्गत पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 80 करोड़ पौधे लगाने का रिकॉर्ड लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया। देश के विभिन्न राज्यों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, पंचायतों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे भी लाखों पौधे लगाए गए, जिससे हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ सड़क किनारे पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में सहायता मिली। यदि भारत के वन क्षेत्र की स्थिति पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि अभी भी हमारे सामने बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। भारत का कुल वन क्षेत्र लगभग 6.78 लाख वर्ग किलोमीटर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 20.64 प्रतिशत है। राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 33 प्रतिशत भाग वनाच्छादित होना चाहिए, अर्थात अभी भी हमें काफी दूरी तय करनी है। वन क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में सबसे अधिक जंगल मध्य प्रदेश में हैं। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र का स्थान आता है। ये राज्य क्षेत्रफल के आधार पर सबसे अधिक वन संपदा रखते हैं।


दूसरी ओर कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां वन क्षेत्र अपेक्षाकृत बहुत कम है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश इस श्रेणी में आते हैं। हरियाणा में वन क्षेत्र लगभग 3 से 4 प्रतिशत के आसपास है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। सीमित वन क्षेत्र, बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था जैसी परिस्थितियां राज्य के सामने विशेष चुनौतियां प्रस्तुत करती हैं। यही कारण है कि हरियाणा में प्राण वायु देवता पैंशन योजना जैसी अभिनव पहल की आवश्यकता महसूस की गई। यह योजना केवल पुराने वृक्षों को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि समाज में यह संदेश देने का माध्यम भी है कि वृक्ष हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।


इन सभी प्रयासों का मूल उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना, समाज को संवेदनशील बनाना और भविष्य को सुरक्षित करना है। यदि प्रत्येक नागरिक कम से कम एक पौधा लगाए, उसकी देखभाल करे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल आर्थिक महाशक्ति बनेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारतीय वायु सेना ने अत्याधुनिक रुद्र एम-II वायु-से-सतह मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया

June 03, 2026

 



रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने स्वदेशी रुद्र एम-II वायु-से-सतह मिसाइल का हवाई प्लेटफॉर्म से सफल उड़ान परीक्षण किया। अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों और महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ पर किए गए इन परीक्षणों ने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता तथा इसकी सभी प्रमुख उपप्रणालियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रमाणित किया।




प्रक्षेपित की गईं सभी मिसाइलों ने पूर्वनिर्धारित लक्ष्यों पर अत्यंत सटीकता के साथ प्रहार किया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) द्वारा तैनात उन्नत ट्रैकिंग एवं रेंज उपकरणों से प्राप्त उड़ान आंकड़ों ने पुष्टि हुई कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य सफलतापूर्वक और पूर्ण रूप से हासिल कर लिए गए।


रुद्रम-II को स्वदेशी रूप से हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित किया गया है, जो डीआरडीओ की नोडल प्रयोगशाला है। इसने रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान और आईटीआर जैसी अन्य सहयोगी प्रयोगशालाओं के सहयोग से यह कार्य किया है। विकास सह उत्पादन साझेदारों (डीसीपीपी) के साथ-साथ, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, क्षेत्रीय सैन्य विमानन योग्यता केंद्र, मिसाइल प्रणाली गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी और कई अन्य उद्योगों ने भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रुद्रम-II के सफल परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग जगत के सभी सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन परीक्षणों ने भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता, विश्वसनीयता और क्षमता को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी और हमारी रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर परीक्षण से जुड़ी सभी वैज्ञानिक, तकनीकी व परिचालन टीमों को बधाई दी।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारतीय वायु सेना ने अत्याधुनिक रुद्र एम-II वायु-से-सतह मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारतीय वायु सेना ने अत्याधुनिक रुद्र एम-II वायु-से-सतह मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया Reviewed by SBR on June 03, 2026 Rating: 5

प्रदर्शनकारी वकीलों पर FIR, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन और सडक़ जाम करने का आरोप, जांच शुरू

June 03, 2026

 


राजधानी शिमला में हाई कोर्ट के वकीलों का रोड परमिट विवाद इतना तूल पकड़ गया कि वकीलों ने राज्य सचिवालय के गेट पर पहुंच कर धरना दिया। आननफानन में मुख्य गेट को बंद करना पड़ा। करीब अढ़ाई घंटे वकीलों ने गेट के बाहर नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से वकीलों की बात हुई। हालांकि मंगलवार को हुए इस प्रदर्शन के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार कुछ लोग बिना अनुमति सचिवालय के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच गए और वहां प्रदर्शन किया। इस दौरान सडक़ पर भीड़ जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ और आम लोगों तथा वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में पुलिस थाना पूर्व (ईस्ट) शिमला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।


आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध पैदा किया, प्रशासन के वैध आदेशों का पालन नहीं किया और लोगों को असुविधा पहुंचाई। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध होने के बावजूद प्रदर्शनकारी प्रतिबंधित क्षेत्र में एकत्र हुए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच के दौरान जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार का प्रदर्शन निर्धारित नियमों और प्रशासन द्वारा तय स्थानों पर ही किया जाए, ताकि आम जनता को असुविधा न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।


इन वकीलों के खिलाफ दर्ज हुआ केस


प्रदर्शनकारियों में मुख्यत: हमिंद्र चंदेल अध्यक्ष बार एसोसिएशन, डीएस कैंथ, शीतल व्यास, बिदुषी, राजीव सरकेक, नीरज गुप्ता, राकेश मनु चौहान, एचकेएस ठाकुर की पहचान हुई है। पुलिस के अनुसार उक्त अधिवक्ताओं की अगवाई में करीब 150-160 अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना प्रदर्शन करके यातायात को अवरुद्ध करके सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की है। उपरोक्त अधिवक्ताओं द्वारा प्रशासन की अनुमति के बिना प्रतिबंधित क्षेत्र में यातायात अवरुद्ध करने का केस दर्ज किया गया।


रोड परमिट को हाई पावर्ड कमेटी बनाएगी सरकार


मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रधान हेमेंद्र चंदेल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस विवाद पर हाई पावर्ड कमेटी बनाने को कहा है। तब तक बार एसोसिएशन वकीलों की गाडिय़ों की लिस्ट देगी, ताकि उन्हें आने-जाने से रोका न जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने राज्य सरकार ने वकीलों के लिए सस्ती दरों वाले परमिट देने को कहा है। गौरतलब है कि शिमल रोड यूजर एक्ट में संशोधन के बाद अब सील्ड सडक़ों का परमिट 2500 से 10 हजार का हो गया है। इससे पहले वकीलों के लिए बिना परमिट आने-जाने की सहमति थी।

प्रदर्शनकारी वकीलों पर FIR, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन और सडक़ जाम करने का आरोप, जांच शुरू प्रदर्शनकारी वकीलों पर FIR, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन और सडक़ जाम करने का आरोप, जांच शुरू Reviewed by SBR on June 03, 2026 Rating: 5

रोहड़ू की रवीना की फिल्म ‘कृष्णा और चिट्ठी’ को मिल रहा अपार प्यार

June 03, 2026

 



शिमला के रोहड़ू से ताल्लुक रखने वाली रवीना ठाकुर भारतीय फिल्म जगत में अलग पहचान बना रही हैं। करीब 10 साल पहले फिल्म मेकर के तौर पर अपने सफर की शुरुआत करने वाली रवीना आज आध्यात्मिक और सार्थक सिनेमा का एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं। रवीना ठाकुर ने बताया कि हिमाचल की देवभूमि में बचपन से आध्यात्मिक माहौल देखने की वजह से उनकी रुचि हमेशा से ऐसी फिल्मों की तरफ रही।


यही वजह है कि उनकी निर्मित फिल्म ‘कृष्णा और चि_ी’ दर्शकों और भक्तों के बीच खास पसंद की जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रेम और जीवन मूल्यों पर आधारित इस फिल्म को लगातार सराहना मिल रही है। रवीना हिमाचल की पहली युवा प्रोड्यूसर हैं, जो आध्यात्मिक फिल्मों में रुचि रखती हैं।

रोहड़ू की रवीना की फिल्म ‘कृष्णा और चिट्ठी’ को मिल रहा अपार प्यार रोहड़ू की रवीना की फिल्म ‘कृष्णा और चिट्ठी’ को मिल रहा अपार प्यार Reviewed by SBR on June 03, 2026 Rating: 5

बिच्छू बूटी: जिसे छूने से भी लगता है डर, पहाड़ों में उसे बड़े चाव से खाते हैं लोग, औषधीय गुण बेमिसाल

June 02, 2026





 बिच्छू बूटी का साग आयरन, कैल्शियम, विटामिन (A, C, K) और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। इसे खाने से शरीर में खून की कमी (एनीमिया) दूर होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है, और ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।




एनीमिया से बचाव: इसमें प्रचुर मात्रा में आयरन होता है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है और हीमोग्लोबिन के स्तर को सही रखने में मदद करता है।

दर्द और सूजन से राहत: इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन-रोधी) गुण गठिया और जोड़ों के दर्द में काफी राहत पहुंचाते हैं।


ब्लड शुगर कंट्रोल: यह इंसुलिन के स्तर को प्रभावित करके रक्त शर्करा (शुगर) को कम करने में सहायक है।


पाचन और डिटॉक्सीफिकेशन: यह एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक (diuretic) है, जो शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों (toxins) को बाहर निकालने में मदद करता है।



त्वचा और बालों के लिए: इसके एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन गुण त्वचा में निखार लाते हैं और बालों को झड़ने से रोककर मजबूत बनाते हैं।


बिच्छू बूटी के औषधिय गुण


बिच्छू बूटी के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभों में शरीर को डिटाक्सफाइ करना, चयापचय की दक्षता में सुधार, प्रतिरक्षा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, परिसंचरण में वृद्धि, ऊर्जा के स्तर में सुधार, माहवारी का प्रबंधन, त्वचा को स्वस्थ रखना, दुर्दों और पित्ताशय की थैली के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना, सूजन को कम करना, मांसपेशियों में वृद्धि, हार्मोनल गतिविधि को नियमित करना, शुगर की बीमारी को रोकना, रक्तचाप कम करना, बवासीर को कमर करना और श्वसन प्रक्रिया में सुधार लाना आदि होते हैं।


बिच्छू बूटी की चाय हृदय के लिए है फायदेमंद


बिच्छू बूटी से बनी चाय हृदय की सकारात्मक रूप से प्रभावित करने में सक्षम होती है। बिच्छू बूटी से बनी चाय का नियमित रूप से सेवन लोअर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है और कार्डियोवास्कुलर सिस्टम पर तनाव को दूर कर सकता है।


प्रेगनेंसी में है फायदेमंद


बिच्छू बूटी से बनी चाय अक्सर उन गर्भवती महिलाओं को पीने का सुझाव दिया जाता है जो अत्यधिक लेबर पेने से गुजर रही होती हैं और यह अधिक ब्लीडिंग से भी रक्षा में मदद कर सकता है, क्योंकि यह एक कोऐग्यलन्ट के रूप में कार्य कर सकता है। इसके अलावा स्तनपान कर रही महिलाओं में बिच्छू बूटी मा के दूध के बनाने में मदद करती है।

बिच्छू बूटी: जिसे छूने से भी लगता है डर, पहाड़ों में उसे बड़े चाव से खाते हैं लोग, औषधीय गुण बेमिसाल बिच्छू बूटी: जिसे छूने से भी लगता है डर, पहाड़ों में उसे बड़े चाव से खाते हैं लोग, औषधीय गुण बेमिसाल Reviewed by SBR on June 02, 2026 Rating: 5

ब्रह्मोस से लैस होगा राफेल, फ्रांस पहुंचे एयरफोर्स चीफ, 114 लड़ाकू विमानों की खरीद पर लगेगी मुहर

June 02, 2026



 भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह तीन दिनों के फ्रांस दौरे पर हैं। जहां वह राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन समेत रक्षा उद्योग के प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। खबर है कि भारत जल्द ही इन 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक लेटर ऑफ रिक्वेस्ट सौंप सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा और जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच इस सौदे को लेकर बातचीत में तेजी देखी जा रही है। राफेल डील में सबसे बड़ा मुद्दा कीमत नहीं, बल्कि तकनीकी नियंत्रण को लेकर है। भारत चाहता है कि उसे राफेल के इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट्स तक पहुंच मिले। ये वे तकनीकी दस्तावेज होते हैं, जो बताते हैं कि विमान के कम्प्यूटर, सेंसर और हथियार प्रणाली आपस में कैसे कनेक्ट करते हैं। भारत का तर्क है


कि अगर उसे इन दस्तावेजों तक पहुंच मिलती है, तो वह बिना डसॉल्ट की मंजूरी के अपने स्वदेशी हथियारों को राफेल में जोड़ सकेगा। इनमें अस्त्र बीवीआर, ब्रह्मोस-एनजी मिसाइलों के अलावा दूसरे भारतीय हथियार शामिल हैं।



भारत खासकर अपनी सबसे घातक मिसाइल ब्रह्मोस को राफेल में इंस्टाल करना चाहता है। भारतीय रक्षा योजनाकारों का मानना है कि इससे राफेल पर विदेशी निर्भरता कम होगी और भविष्य में अपग्रेड करना आसान होगा। हालांकि फ्रांस इस मामले में पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा। फ्रांसीसी रक्षा पोर्टल ओपेक्स न्यूज की रिपोट्स के मुताबिक, पेरिस राफेल के सोर्स कोड और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर तक पहुंच देने को तैयार नहीं है। फ्रांस को आशंका है कि अगर भारतीय प्लेटफॉर्म पर रूसी या भारत-रूस संयुक्त परियोजनाओं के हथियार जोड़े गए तो संवेदनशील तकनीक के लीक होने का खतरा पैदा हो सकता है. इसके अलावा बौद्धिक संपदा की सुरक्षा भी फ्रांस की बड़ी चिंता है। हालांकि दोनों देशों के बीच एक समझौते का रास्ता तलाशा जा रहा है, जिसके तहत भारत को सीमित तकनीकी पहुंच दी जा सकती है, लेकिन मुख्य सोर्स कोड फ्रांस के नियंत्रण में रहेगा। पीएम मोदी के फ्रांस दौरे के दौरान राफेल डील में सोर्स कोड और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर तक पहुंच ही मुख्य मुद्दा रहेगा।


34 अरब यूरो का सबसे बड़ा लड़ाकू विमान सौदा


114 राफेल विमानों का प्रस्तावित सौदा करीब 34 अरब यूरो का बताया जा रहा है। इसे दुनिया के सबसे बड़े लड़ाकू विमान सौदों में गिना जा रहा है। योजना के मुताबिक शुरुआती 24 विमान सीधे फ्रांस से भारत को दिए जाएंगे, ताकि तत्काल जरूरत पूरी की जा सके। इसके बाद लगभग 90 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार स्थानीय उत्पादन का लक्ष्य करीब 50 प्रतिशत तक रखा गया है। इससे भारत के रक्षा उत्पादन और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अगर बातचीत तय दिशा में आगे बढ़ती है, तो 2026 के अंत तक इस ऐतिहासिक सौदे पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। तब भारत के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली और आधुनिक राफेल फ्लीट में से एक होगी, जो आने वाले वर्षों में उसकी हवाई ताकत का प्रमुख आधार बनेगी।

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सोलन की जनता ने युवा चेहरों को दी तरजीह

June 02, 2026


 सोलन शहर की जनता ने इस बार के नगर निगम चुनावों में युवा चेहरों को तरजीह दी है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि निगम के कुल 17 वार्डों में चुने गए पार्षदों की औसतन आयु 44 वर्ष के करीब है। वहीं, कुल 17 पार्षदों में से 12 पार्षद ऐसे हैं, जिनकी आयु 50 वर्ष से कम है और उनमें भी 3 पार्षद तो अभी तक 40 वर्ष का आंकड़ा भी नहीं छू पाए हैं। शहर की जनता द्वारा इन युवा चेहरों पर जताए गए भरोसे पर चुने गए पार्षद कितना खरा उतर पाएंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इन युवा पार्षदों पर अपने आप को प्रूव करने के लिए जीजान लगानी पड़ेगी। इस बार का नगर निगम चुनाव हर लिहाज से ऐतिहासिक रहा है।


एक ओर जहां इस चुनाव में दोनों ही पार्टियों के दिग्गज चेहरों को हार का मुंह देखना पड़ा है, वहीं कई वार्ड में निर्दलीय व बागी चेहरे भी दूसरे उम्मीदवारों का खेल बिगाडऩे में कामयाब हुए हैं। इस बीच शहर की जनता ने इन चुनावों में इक्का-दुक्का वार्ड को छोडक़र बाकि सभी वार्डों में तर्जुबे की जगह युवा चेहरों को मौका दिया है। अगर पूरे परिणामों का आकलन करें तो कुल 17 वार्डों में से 12 वार्ड ऐसे हैं जहां पर विजयी प्रत्याशियों की उम्र 50 वर्ष से भी कम है। इसके अलावा तीन पार्षद ऐसे हैं जो कि अभी तक उम्र के 40वें पड़ाव तक भी नहीं पहुंच पाए हैं। वहीं, एक विजयी पार्षद 60 साल से कम और एक पार्षद 70 वर्ष से अधिक की निर्वाचित हुई हैं।


चाची-भतीजे ने चुनावों में मारी बाजी


नगर निगम सोलन के चुनाव परिणामों में एक और दिलचस्प पहलू भी सामने आया है। इन परिणामों में भाजपा के चुने गए पार्षदों में दो चेहरे ऐसे भी हैं जो कि रिश्ते में चाची व भतीजा हैं। जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 11 से विजयी हुईं भाजपा प्रत्याशी सरिता ठाकुर, वार्ड नंबर 15 से चुनाव जीते भाजपा प्रत्याशी अभिषेक ठाकुर की रिश्ते में चाची हैं। ऐसे में एक ही परिवार के दो सदस्यों ने बाजी मारी है।


एक पार्षद 34 वर्ष और एक पार्षद 71 वर्ष की


इस चुनाव में दिलचस्प पहलू यह भी रहा है कि जीते प्रत्याशियों में एक पार्षद महज 34 वर्ष का है और एक पार्षद ऐसी भी चुनी गई हैं जिनकी उम्र 71 वर्ष के करीब है। वार्ड- 4 से भाजपा के प्रत्याशी रोहित भारद्वाज सबसे युवा पार्षद बनकर उभरे हैं, वार्ड-14 से सुलक्षण कौड़ा ने 71 वर्ष की उम्र भी चुनाव जीतकर अपना डंका बजवाया है।

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राशन डिपुओं में मिलेगी हरे मूंग की दाल, खाद्य आपूर्ति निगम ने भेजी 1.13 लाख क्विंटल दालों की डिमांड

June 02, 2026

 



प्रदेश के राशन डिपुओं में जल्द ही उपभोक्ताओं को मूंग साबूत की दाल भी सस्ते दामों पर मिलेगी। खाद्य आपूर्ति निगम ने भेजी एक लाख 13 हजार 240 क्विंटल दालों की डिमांड केंद्र सरकार भेजी है। केंद्र से एलोकेशन की मंजूरी मिलने के बाद मामला प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। प्रदेश सरकार से अप्रूवल मिलने के बाद खाद्य आपूर्ति निगम दालों का सप्लाई ऑर्डर जारी करेगा। खाद्य आपूर्ति निगम ने केंद्र सरकार को भेजी डिमांड में मल्का दाल का 31,542 क्विंटल, उड़द साबूत दाल का 26,835 क्विंटल, दाल चना का 37,884 क्विंटल और मूंग साबूत दाल का 16,979 क्विंटल की डिमांड भेजी है। खाद्य आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल और खाद्य आपूर्ति निगम के महा प्रबंधक अरविंद शर्मा ने बताया राशन डिपुओं मेंं दी जाने वाली दालों को लेकर केंद्र सरकार को डिमांड भेज दी गई है।


गौर हो कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हर माह राशन कार्ड धारकों को दो लीटर खाद्य तेल उपलब्ध करवाती है। हिमाचल में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से सैकड़ों डिपुओं के जरिए राशन वितरित किया जाता है। प्रदेश सरकार पहले से ही राशन कार्ड धारकों को सस्ती दरों पर रिफाइंड और सरसों सहित दालें और अन्य राशन का सामन उपलब्ध करवा रही है। राशन डिपो में मूंग की दाल भी सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाने से आम लोगों, खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी। खाद्य आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल ने कहा कि केंद्र से एलोकेशन की मंजूरी मिलने के बाद मामला प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। सरकार से अप्रूवल के बाद दालों का सप्लाई ऑर्डर जारी किया जाएगा।

राशन डिपुओं में मिलेगी हरे मूंग की दाल, खाद्य आपूर्ति निगम ने भेजी 1.13 लाख क्विंटल दालों की डिमांड राशन डिपुओं में मिलेगी हरे मूंग की दाल, खाद्य आपूर्ति निगम ने भेजी 1.13 लाख क्विंटल दालों की डिमांड Reviewed by SBR on June 02, 2026 Rating: 5

31 मई को फुल-मून : अपने मोबाइल से लीजिए चांद की बेहतरीन फोटो, नासा ने शेयर किए फोटोग्राफी टिप्स

May 29, 2026

 



आसमान में एक बार फिर खूबसूरत नजारा यानी कि ‘फुल मून’ 31 मई को देखने को मिलेगा। इस रात चांद की खूबसूरत तस्वीर हर कोई अपने मोबाइल में कैद करना चाहेगा, लेकिन स्मार्टफोन से चांद की अच्छी तस्वीरें लेने में कई चुनौतियां भी हैं। आमतौर पर स्मार्टफोन से ली गई चांद की तस्वीर एक धुंधले सफेद धब्बे या रोशनी के गोले जैसी दिखती है। अगर ऐसा आपके साथ भी होता है, तो निराश बिल्कुल भी न हों। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मोबाइल फोटोग्राफी के कुछ ऐसी टिप्स बताई हैं, जिन्हें अपनाकर हर कोई चांद की खूबसूरत तस्वीर ले सकता है।


नासा के अनुसार, चांद की तस्वीर लेने के लिए आपका फोन बिल्कुल स्थिर रहना चाहिए। यदि आपके पास ट्राइपॉड नहीं है, तो फोन को किसी दीवार या अन्य स्थिर वस्तु के सहारे रख दें। इसके बाद तस्वीर की कंपोजिशन पर ध्यान दें। चांद को फ्रेम करने, उसे कोई संदर्भ देने या तस्वीर को अधिक आकर्षक बनाने के लिए आसपास मौजूद वस्तुओं का उपयोग किया जा सकता है।


चांद की फोटो खींचते समय अपने फोन का फ्लैश हमेशा बंद रखें और कैमरे का फोकस आसमान के बजाय सीधे चांद पर करें। इसके लिए स्क्रीन पर जहां चांद दिखाई दे रहा हो, वहां टैप करें। इसके बाद ब्राइटनेस को थोड़ा कम कर दें। चांद को एकदम सफेद और अत्यधिक चमकीला दिखाने के बजाय उसकी प्राकृतिक बनावट बनाए रखने की कोशिश करें, ताकि उसकी सतह के निशान और डिटेल्स साफ नजर आ सकें। इससे तस्वीर अधिक प्रभावशाली और आकर्षक लगती है।


अगर आपके फोन में फोटो टाइमर की सुविधा है, तो उसका इस्तेमाल करें। इससे तस्वीर खींचते समय फोन को छूने या उसके हिलने-डुलने की संभावना कम हो जाती है।


बेहतरीन तस्वीर लेने के लिए सही समय का चुनाव भी बेहद जरूरी है। चांद की फोटोग्राफी के लिए बिल्कुल घने अंधेरे के बजाए आप अपनी फोटो शाम के धुंधलके या भोर के समय लें। इस समय आसमान और चांद की रोशनी में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता, जिससे आपके फोन का कैमरा फोटो को बेहतर तरीके से कैप्चर कर पाएगा। इसके अलावा, जब चांद क्षितिज से ऊपर उठ रहा होता है, तब वह अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देता है, इसलिए उस समय भी अच्छी तस्वीरें ली जा सकती हैं।


अगर आपके फोन में ऑप्टिकल जूम है, तभी उसका इस्तेमाल करें। डिजिटल जूम वास्तव में तस्वीर को केवल क्रॉप करता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में आप चाहें तो प्रयोग के तौर पर चांद को फोकस करके जूम कर सकते हैं। एक-दो फोटो क्लिक से यह अंदाजा लग सकता है कि जूम करना आपके लिए बेहतर रहेगा या नहीं।


यदि आपके फोन में प्रो मोड या मैनुअल मोड उपलब्ध है, तो आईएसओ सेटिंग को कम रखें, ताकि तस्वीर में नॉइस न आए। अगर संभव हो, तो शटर स्पीड के साथ भी प्रयोग करें, ताकि चांद की रोशनी सही तरीके से तस्वीर में कैद हो सके। शुरुआत में शटर स्पीड तेज रखें और फिर आवश्यकता के अनुसार उसे समायोजित करें। ध्यान रहे कि जितनी धीमी शटर स्पीड होगी, उतना ही मोबाइल का स्थिर रहना महत्वपूर्ण होता जाएगा।


अगर आपके पास टेलीस्कोप (दूरबीन) उपलब्ध है, तो आप अपने फोन को उसके आई-पीस (आंख से देखने वाली जगह) पर सावधानीपूर्वक टिका सकते हैं। सही तरीके से सेट करने पर आप चांद की बेहद साफ और स्पष्ट तस्वीर खींच सकते हैं। (इनपुट-आईएएनएस)

31 मई को फुल-मून : अपने मोबाइल से लीजिए चांद की बेहतरीन फोटो, नासा ने शेयर किए फोटोग्राफी टिप्स 31 मई को फुल-मून : अपने मोबाइल से लीजिए चांद की बेहतरीन फोटो, नासा ने शेयर किए फोटोग्राफी टिप्स Reviewed by SBR on May 29, 2026 Rating: 5

HRTC: पहली से बिना हिम बस कार्ड नहीं मिलेगी फ्री यात्रा

May 29, 2026

 


राज्य के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को एचआरटीसी बसों में मिलने वाली मुफ्त यात्रा सुविधा अब हिम बस कार्ड से जोड़ दी गई है। 1 जून 2026 से बिना हिम बस कार्ड या पास के छात्रों को एचआरटीसी बसों में मुफ्त सफर की सुविधा नहीं मिलेगी। हालांकि कार्ड बनाने की अंतिम तिथि 31 मई तय की गई है, लेकिन अब तक प्रदेशभर में केवल 12,502 विद्यार्थियों ने ही हिम बस कार्ड बनवाए हैं।


प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 7 लाख से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। पहले पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को सामान्य बस पास पर मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब निगम प्रबंधन ने इस व्यवस्था को हिम बस कार्ड में बदल दिया है। ऐसे में अब मुफ्त बस यात्रा के लिए हिम बस कार्ड जरूरी होगा। जानकारी के अनुसार, जिन विद्यार्थियों के घर स्कूल से अधिक दूरी पर हैं, वही अधिकतर बस पास बनवाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और तकनीकी दिक्कतों के कारण बड़ी संख्या में छात्र अब तक आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाए हैं। इधर, कई जिलों के सरकारी स्कूल एचआरटीसी की वेबसाइट पर अपडेट नहीं होने से भी विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मंडी, हमीरपुर समेत कई क्षेत्रों के स्कूल पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं, जिसके कारण छात्र हिम बस कार्ड नहीं बना पा रहे हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि संबंधित स्कूलों और जिला कार्यालयों से जानकारी मिलने के बाद स्कूलों को वेबसाइट पर लगातार अपडेट किया जा रहा है।


अंतिम तिथि बढ़ाने पर निर्णय नहीं

एचआरटीसी प्रबंधन ने फिलहाल हिम बस कार्ड बनाने की अंतिम तिथि बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि 1 जून के बाद भी कार्ड बनाए जाएंगे, लेकिन जब तक विद्यार्थियों का कार्ड नहीं बनेगा, तब तक उन्हें बस किराया देना पड़ेगा।

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दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सडक़ पर नाहन के राघव तोमर ने गाड़ा कामयाबी का झंडा

May 29, 2026

 


नाहन शहर के बेटे राघव तोमर ने बर्फ, तूफ़ान और खून जमा देने वाली ठंड को चीरते हुए दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सडक़ 19,024 फुट की ऊंचाई पंहुच कर जिला सिरमौर का नाम रोशन किया है। सिरमौर के नाहन निवासी राघव तोमर ने उमलिंग ला पास तक पहुंचकर नया इतिहास रचा है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद इस सफर ने युवाओं के लिए फिटनेस और आत्मविश्वास का प्रेरणादायक संदेश दिया। जिस ऊंचाई पर इनसान का शरीर जवाब देने लगता है तथा जहां सांस लेना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता, जहां बर्फीली हवाएं कदम रोकने की कोशिश करती हैं, उस जगह तक पहुंचकर नाहन के युवा राघव तोमर ने अपने तीन साथियों के साथ पंहुच कर सिरमौर का नाम नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।


गौर हो कि दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सडक़ उमलिंग ला पास करीब 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर ऑक्सीजन सामान्य से लगभग आधी रहती है और तापमान ऐसा कि कुछ मिनट खड़े रहना भी मुश्किल हो जाए, लेकिन इन तमाम चुनौतियों के बीच नाहन के राघव तोमर ने अपने दोस्तों श्रीयम केसरवानी, कुशाग्र मिश्रा और कुणाल गर्ग के साथ इस ऐतिहासिक सफर को पूरा कर दिखाया। इस उपलब्धि के लिए उन्हें विशेष प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है।


कहां है उमिलंग लॉ

उमलिंग लॉ सिर्फ एक सडक़ नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे कठिन एडवेंचर रूट्स में गिनी जाती है। लद्दाख के दुर्गम क्षेत्र में भारत-चीन सीमा के समीप स्थित यह रास्ता बड़े-बड़े साहसी लोगों की भी परीक्षा लेता है। यहां शरीर से ज्यादा मानसिक ताकत की जरूरत पड़ती है। राघव तोमर ने बताया कि इस सफर के पीछे लगातार की गई फिटनेस ट्रेनिंग और मजबूत मानसिक तैयारी सबसे बड़ा कारण रही। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में शरीर नहीं, आपका आत्मविश्वास काम आता है। नाहन निवासी रोड सेफ़्टी कलब के पूर्व अध्यक्ष व नाहन नगर परिषद की नवनिर्चित पार्षद पूजा तोमर के पुत्र राघव तोमर के इस कार्य से बेहद उत्साहित व खुश हैं। राघव तोमर ने साहस और फिटनेस की नई पहचान बनाकर युवाओं के सामने एक प्रेरणा पेश की है।


इरादों में जान चाहिए

राघव का कहना है अगर आपका शरीर फिट है और इरादे मजबूत हैं, तो दुनिया की सबसे ऊंची सडक़ भी आपकी मंजिल बन सकती है। आज नाहन का यह युवा सिर्फ एक एडवेंचर ट्रैवलर नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए यह संदेश बनकर उभरा है कि मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर खुद को चुनौतियों के लिए तैयार करना भी जरूरी है।

दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सडक़ पर नाहन के राघव तोमर ने गाड़ा कामयाबी का झंडा दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सडक़ पर नाहन के राघव तोमर ने गाड़ा कामयाबी का झंडा Reviewed by SBR on May 29, 2026 Rating: 5

गाड़ी की छत पर सैलानी मचा रहे थे हुड़दंग, मनाली पुलिस ने काटा 7500 का चालान

May 29, 2026



 जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली में राजस्थान के सैलानियों के द्वारा गाड़ी की छत पर हुड़दंग मचाने के मामले में मनाली पुलिस की टीम ने 7500 रुपए का चालान किया है। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। बीते कुछ दिनों से कीरतपुर मनाली सडक़ मार्ग पर सैलानियों के द्वारा हुड़दंग मचाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते दिन ही हनोगी टनल में सैलानियों की आपस में झड़प भी हुई। ऐसे में जहां इन दिनों पहाड़ों पर सैलानियों का आना जारी है, तो वहीं उनके द्वारा नियमों की भी उल्लंघना की जा रही है।


मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार को मनाली मालरोड के समीप कुछ सैलानी गाड़ी की छत पर सफर कर रहे थे और शोर शराबा मचा रहे थे। ऐसे में पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और उन्हें जब समझने की कोशिश की गई, तो वह लोग उल्टा पुलिस से ही उलझ पड़े। गाड़ी में कुछ निहंग सिख भी सवार थे। मामले की गंभीरता को समझते हुए मनाली थाना प्रभारी मनीष भी मौके पर पहुंचे। ऐसे में काफी देर तक पुलिस और सैलानियों के बीच बहस बाजी होती रही। सैलानी भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थे, जिसके चलते मनाली पुलिस द्वारा उनका 7500 रुपए का चालान किया गया और चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने दोबारा नियमों की उल्लंघना की, तो उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल मिलाई जाएगी। डीएसपी मनाली केडी शर्मा ने बताया कि गाड़ी की छत पर सैलानियों के द्वारा शोर शराबा किया जा रहा था, जिसके चलते उनका चालान काटा गया है। इसके अलावा जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात है और नियमों की उल्लंघना करने वाले वाहन चालकों पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

गाड़ी की छत पर सैलानी मचा रहे थे हुड़दंग, मनाली पुलिस ने काटा 7500 का चालान गाड़ी की छत पर सैलानी मचा रहे थे हुड़दंग, मनाली पुलिस ने काटा 7500 का चालान Reviewed by SBR on May 29, 2026 Rating: 5

अपने बच्चों को बचा लो, रिपन अस्पताल के शशु रोग विशेषज्ञ ने बताया क्या खिलाएं?

May 29, 2026

 



बदलती जीवनशैली, जंक फूड की बढ़ती आदत और मोबाइल-टीवी के अत्यधिक उपयोग का असर अब बच्चों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। बच्चों में बार-बार बीमार पडऩा, कमजोरी, भूख कम लगना, वजन और लंबाई सही से न बढऩा, संक्रमण होना और पढ़ाई में ध्यान कम लगने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ा कारण खराब पोषण और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है।


रिपन अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर धर्माणी ने बताया कि बचपन शरीर, दिमाग और इम्युनिटी के तेजी से विकास का समय होता है। यदि इस दौरान सही पोषण न मिले तो इसका असर पूरे जीवन पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन-सी और जिंक जैसे पोषक तत्वों का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोयाबीन, राजमा, हरी सब्जियां, चना, गुड़, अनार, बीन्स, आंवला, संतरा, नींबू और मेवे बच्चों के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। डाक्टर धर्माणी के अनुसार बार-बार सर्दी-जुकाम, बुखार, कमजोरी, बाल झडऩा, त्वचा रूखी होना, भूख कम लगना और पढ़ाई में ध्यान न लगना खराब पोषण के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की खानपान आदतों और स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।


स्वस्थ बचपन ही स्वस्थ भविष्य की पहचान है। अच्छा पोषण, सही दिनचर्या और प्यार भरा वातावरण बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है

– डाक्टर अंकुर धर्माणी, शिशु रोग विशेषज्ञ, रिपन अस्पताल

अपने बच्चों को बचा लो, रिपन अस्पताल के शशु रोग विशेषज्ञ ने बताया क्या खिलाएं? अपने बच्चों को बचा लो, रिपन अस्पताल के शशु रोग विशेषज्ञ ने बताया क्या खिलाएं? Reviewed by SBR on May 29, 2026 Rating: 5
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