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AI Deepfake Cyber Fraud: शिमला में एआई और डीपफेक बने साइबर ठगों के नए हथियार, पुलिस ने किया अलर्ट

8/17/2026 06:05:00 am

 



शिमला। फर्जी फोन कॉल या मैसेज ही नहीं, अब ठगी के लिए आपकी अपनी आवाज और चेहरा ही आपके खिलाफ इस्तेमाल हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक तकनीक के दौर में साइबर अपराधियों ने ठगी के तरीकों को पहले से कहीं अधिक हाईटेक और खतरनाक बना दिया है।

महज कुछ सेकंड के ऑडियो या एक फोटो के आधार पर नकली सामग्री बनाई जा रही है। ठग इससे लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें अपने जाल में फंसा रहे हैं। हिमाचल पुलिस विभिन्न माध्यमों से आम जनता को इन नए डिजिटल हथियारों के प्रति जागरूक कर रही है।

ठगी की शुरुआत अक्सर सोशल मीडिया से पीड़ित की निजी जानकारी जुटाने से होती है। इसके बाद अपराधी बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, रिश्तेदार या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर संपर्क साधते हैं। बातचीत के दौरान डर या लालच पैदा किया जाता है, ताकि व्यक्ति तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दे।

एआई वॉयस क्लोनिंग तकनीक से किसी की आवाज की नकल करना अब बेहद आसान हो गया है। ठग आपात स्थिति का बहाना बनाकर परिवार के सदस्य की आवाज में फोन करते हैं और पैसे की मांग करते हैं। डीपफेक वीडियो के जरिए परिचित या नामचीन हस्ती का नकली वीडियो बनाकर फर्जी निवेश या योजनाओं में फंसाया जा रहा है।

फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही यूजर नकली वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जहां लॉगिन डिटेल्स, कार्ड नंबर और ओटीपी डालते ही खाता खाली कर दिया जाता है। फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर शुरू में छोटे मुनाफे का लालच देकर बाद में बड़ी रकम हड़प ली जाती है।

पुलिस की अपील

प्रदेश पुलिस ने कहा है कि डिजिटल ठगी से बचने के लिए सतर्कता सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपना ओटीपी या यूपीआई पिन किसी के साथ साझा करें। यदि कोई परिचित अचानक पैसे की मांग करे तो केवल आवाज सुनकर भरोसा न करें। दूसरे माध्यम से पहचान की पुष्टि जरूर करें।

किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।


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HPU PG Result: परीक्षा खत्म होने के 20 दिन में ही जारी हुआ पीजी रिजल्ट, एचपीयू ने रचा रिकॉर्ड

8/17/2026 05:45:00 am

 



शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने विभिन्न स्नातकोत्तर (पीजी) परीक्षाओं के परिणाम परीक्षा समाप्त होने के मात्र 20 दिनों के भीतर घोषित कर दिए हैं।

अलग-अलग विषयों के चतुर्थ सेमेस्टर के परिणाम जारी किए गए हैं। इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना हमारा संकल्प है।

उन्होंने कहा, “छात्रों का समय अत्यंत मूल्यवान है। 20 दिनों में परिणाम घोषित कर हमने यह सुनिश्चित किया है कि हमारे छात्रों को आगे की पढ़ाई, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कोई बाधा न आए।”

कुलपति ने यह भी बताया कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, परीक्षा नियंत्रक डॉ. श्याम लाल कौशल और उनकी टीम के कर्मचारियों तथा मूल्यांकन में लगे अधिकारियों के टीम वर्क और समर्पण का परिणाम है।

इस तेज रिजल्ट घोषणा से छात्रों को आगे की पढ़ाई और करियर संबंधी योजनाएं समय पर बनाने में मदद मिलेगी।



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Project 75I Submarine Deal: भारत को मिलेंगी 6 सबमरीन, जर्मनी के साथ 70 हजार करोड़ की डील से Invest नौसेना की ताकत

8/17/2026 05:31:00 am

 

Project 75I Submarine Deal



नई दिल्ली। भारत को जल्द छह एडवांस्ड सबमरीन मिलने वाली हैं। ये सबमरीन प्रोजेक्ट 75(आई) का हिस्सा हैं, जो लंबे समय से विलंबित चल रहा था। जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव फिर से कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के सामने लाया जा सकता है।

यह डील जर्मनी के साथ लगभग 70 हजार करोड़ रुपये की है। इन सबमरीनों का निर्माण मुंबई स्थित मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में किया जाएगा। जर्मनी की कंपनी थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) इसमें सहयोग करेगी।

इस डील को लेकर पिछले कई वर्षों से बातचीत चल रही थी। व्यावसायिक शर्तों और तकनीकी मुद्दों को लेकर कई बार रुकावटें आईं। अब उम्मीद है कि कैबिनेट कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद प्रक्रिया तेज होगी।

कैबिनेट से फैसला आने से पहले ही जर्मन कंपनी सक्रिय हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TKMS चुपचाप भारतीय भागीदारों का नेटवर्क बना रहा है। कंपनी ने हैदराबाद की वीईएम टेक्नोलॉजीज के साथ समझौता किया है। इसका उद्देश्य हेवीवेट टॉरपीडो के विकास, निर्माण, एकीकरण और आधुनिकीकरण करना है। TKMS की सहायक कंपनी एटलस इलेक्ट्रॉनिक भी इसमें शामिल है, जबकि वीईएम भारतीय पक्ष से इंटीग्रेशन और टेस्टिंग का काम संभाल रही है।

ये सबमरीन एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम से लैस होंगी, जिससे वे पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीनों की तुलना में काफी लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकेंगी। इससे भारतीय नौसेना की पानी के नीचे युद्ध क्षमता मजबूत होगी और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।

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1947 Partition: जब भारतीय सेना भी बंट गई, जानिए कैसे हुआ फौज का विभाजन

8/16/2026 09:01:00 pm

 



15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का गौरवपूर्ण दिन है, लेकिन आजादी के साथ देश ने विभाजन का गहरा दर्द भी झेला। भारत और पाकिस्तान के निर्माण के साथ केवल जमीन, प्रशासन और संसाधनों का ही बंटवारा नहीं हुआ, बल्कि British Indian Army को भी दो हिस्सों में विभाजित करना पड़ा।

यह प्रक्रिया बेहद जटिल थी। उन सैनिकों को अलग-अलग सेनाओं में जाना पड़ा, जो वर्षों से एक ही बैरक में रहते, साथ प्रशिक्षण लेते और युद्ध के मैदान में एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ते थे।

सेना के बंटवारे की शुरुआत

जून 1947 में भारत के विभाजन का फैसला होने के बाद सशस्त्र बलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। फील्ड मार्शल सर क्लॉड ऑचिनलेक के नेतृत्व में सैन्य पुनर्गठन का काम आगे बढ़ाया गया। भारत और पाकिस्तान के लिए सेना, हथियार, सैन्य प्रतिष्ठान और अन्य संसाधनों के बंटवारे की विस्तृत योजना तैयार की गई।

सैन्य संसाधनों को broadly लगभग 2:1 के अनुपात में बांटने की व्यवस्था की गई, हालांकि अलग-अलग सैन्य शाखाओं और संपत्तियों में वास्तविक वितरण परिस्थितियों के अनुसार अलग रहा।

सैनिकों को कैसे बांटा गया?

सबसे कठिन काम सैनिकों और रेजिमेंटों का पुनर्गठन था। कुछ रेजिमेंटों की भर्ती संरचना ऐसी थी जिसमें किसी विशेष क्षेत्र, समुदाय या वर्ग के सैनिकों की बड़ी संख्या होती थी। वहीं कई यूनिटों में विभिन्न समुदायों के सैनिक साथ सेवा करते थे।

ऐसे मामलों में सैनिकों को विकल्प दिया गया कि वे भारत या पाकिस्तान में से किस सेना में सेवा जारी रखना चाहते हैं। इसके बाद यूनिटों और सैनिकों का पुनर्गठन किया गया।

इस प्रक्रिया में कई सैनिकों और अधिकारियों को अपने पुराने साथियों से अलग होना पड़ा। एक ही रेजिमेंट में साथ सेवा करने वाले लोगों के रास्ते अलग हो गए।

सैम मानेकशॉ और मोहम्मद उस्मान की मिसाल

विभाजन के दौर की सबसे चर्चित सैन्य कहानियों में सैम मानेकशॉ और ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

सैम मानेकशॉ ने विभाजन के बाद भारत में सेवा जारी रखी और आगे चलकर भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल बने।

वहीं ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान ने भारत के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने नौशेरा की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जुलाई 1948 में वीरगति प्राप्त की। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

गोरखा सैनिकों का अलग मामला

गोरखा सैनिकों का मामला भी विशेष था। भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के बाद गोरखा रेजिमेंटों का पुनर्गठन किया गया।

भारतीय सेना को छह गोरखा रेजिमेंट मिलीं, जबकि कुछ अन्य गोरखा रेजिमेंट ब्रिटिश सेना का हिस्सा बनीं। इस प्रकार गोरखा सैनिकों की पुरानी सैन्य परंपरा विभाजन के बाद भी अलग-अलग सेनाओं में जारी रही।

हथियार और सैन्य सामान भी बांटा गया

बंटवारा केवल सैनिकों तक सीमित नहीं था। हथियार, वाहन, तोपें, सैन्य उपकरण, गोला-बारूद, वर्दियां, जूते, चिकित्सा सामग्री और दूसरे सैन्य सामान का भी हिसाब लगाया गया।

पाकिस्तान को मिलने वाले कई सैन्य संसाधनों को रेल और अन्य माध्यमों से नए देश तक पहुंचाया जाना था। लेकिन विभाजन के दौरान पंजाब और दूसरे इलाकों में भड़की हिंसा ने इस प्रक्रिया को बेहद मुश्किल बना दिया।

नौसेना और वायुसेना का पुनर्गठन

थल सेना के साथ-साथ Royal Indian Navy और Royal Indian Air Force का भी विभाजन किया गया।

नौसेना के जहाजों, प्रतिष्ठानों और अन्य संसाधनों का पुनर्वितरण हुआ। पाकिस्तान को कराची स्थित महत्वपूर्ण नौसैनिक आधार मिला, जबकि भारत के पास अधिकांश बड़े नौसैनिक प्रतिष्ठान और जहाजों का बड़ा हिस्सा रहा।

इसी तरह वायुसेना के विमानों, स्क्वाड्रनों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य संसाधनों का भी पुनर्गठन किया गया।

कुर्सियों से लेकर किताबों तक हुआ बंटवारा

विभाजन की प्रक्रिया की जटिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सैन्य कार्यालयों और प्रतिष्ठानों की अनेक छोटी-बड़ी वस्तुओं तक का हिसाब रखा गया।

मेस का सामान, फर्नीचर, टाइपराइटर, बैंड के उपकरण, लाइब्रेरी की सामग्री और अन्य संपत्तियों को भी दोनों देशों के बीच बांटना पड़ा।

कई वस्तुओं का बंटवारा इतना जटिल था कि छोटी-छोटी चीजों तक की सूची तैयार करनी पड़ी।

इतिहास का सबसे कठिन सैन्य पुनर्गठन

1947 का सैन्य विभाजन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं था। इसके पीछे उन हजारों सैनिकों की व्यक्तिगत कहानियां थीं, जिनके दोस्त, साथी और कभी-कभी परिवार भी विभाजन के कारण अलग हो गए।

आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, तो हमें उस दौर की उपलब्धियों के साथ-साथ उस पीड़ा को भी याद करना चाहिए, जिसे लोगों और सैनिकों ने झेला था।

1947 में केवल एक सीमा नहीं खींची गई थी—एक साझा सैन्य विरासत भी दो अलग-अलग रास्तों पर चली गई।

🇮🇳 जय हिंद!
🇮🇳 वंदे मातरम्!



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SIP कैसे शुरू करें? Step-by-Step गाइड | म्यूचुअल फंड में आसान निवेश

8/16/2026 07:36:00 pm


 **SIP कैसे शुरू करें? पूरी गाइड (Step-by-Step)**


### SIP क्या है?


SIP यानी **Systematic Investment Plan** म्यूचुअल फंड में नियमित रूप से छोटी-छोटी रकम निवेश करने का तरीका है। आप हर महीने एक तय रकम (जैसे ₹500, ₹1000 या ₹5000) अपने चुने हुए म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। यह बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाकर औसत लागत को कम करता है और लंबे समय में अच्छा रिटर्न दे सकता है।


### SIP शुरू करने के फायदे


- छोटी रकम से शुरुआत संभव

- रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ

- अनुशासन आता है

- कंपाउंडिंग का पूरा फायदा

- कभी भी शुरू और बंद कर सकते हैं

- टैक्स बेनिफिट (ELSS फंड में)


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### SIP कैसे शुरू करें? (Step-by-Step)


**स्टेप 1: अपना लक्ष्य तय करें**  

रिटायरमेंट, बच्चे की शिक्षा, घर खरीदना या सिर्फ वेल्थ क्रिएशन — लक्ष्य साफ रखें। लक्ष्य के हिसाब से समय और जोखिम तय होगा।


**स्टेप 2: KYC पूरा करें**  

SIP शुरू करने के लिए KYC जरूरी है।  

- आधार + पैन कार्ड से ऑनलाइन KYC हो जाता है  

- ज्यादातर ऐप्स और वेबसाइट्स पर 5-10 मिनट में पूरा हो जाता है


**स्टेप 3: सही म्यूचुअल फंड चुनें**  

- **शुरुआती निवेशक** के लिए: लार्ज कैप या इंडेक्स फंड (Nifty 50, Sensex)  

- **मध्यम जोखिम**: फ्लेक्सी कैप या हाइब्रिड फंड  

- **हाई रिटर्न चाहने वाले**: मिड कैप / स्मॉल कैप (लंबे समय के लिए)  

- **टैक्स सेविंग**: ELSS फंड (3 साल लॉक-इन)


**स्टेप 4: प्लेटफॉर्म चुनें**  

आप ये तरीके अपना सकते हैं:

- म्यूचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट/ऐप (Direct Plan)

- Groww, Zerodha Coin, Paytm Money, ET Money, Kuvera

- बैंक के जरिए (HDFC, SBI, ICICI आदि)


**नोट:** Direct Plan में कमीशन नहीं कटता, इसलिए रिटर्न थोड़ा बेहतर मिलता है।


**स्टेप 5: SIP रजिस्टर करें**  

1. अकाउंट बनाएं / लॉगिन करें  

2. फंड सर्च करें  

3. “Start SIP” पर क्लिक करें  

4. राशि डालें (न्यूनतम ज्यादातर ₹100 या ₹500)  

5. तारीख चुनें (1, 5, 10, 15 आदि)  

6. बैंक अकाउंट लिंक करें और ऑटो-डेबिट (e-Mandate) सेट करें  

7. OTP से कन्फर्म करें


**स्टेप 6: नियमित निगरानी करें**  

हर 6-12 महीने में पोर्टफोलियो चेक करें। जरूरत पड़ने पर फंड बदल सकते हैं (Switch) या राशि बढ़ा सकते हैं (Step-up SIP)।


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### SIP शुरू करते समय ध्यान रखने वाली बातें


- कम से कम **5-7 साल** का नजरिया रखें  

- बाजार गिरने पर घबराकर SIP बंद न करें  

- Step-up SIP का इस्तेमाल करें (साल में 10% बढ़ाएं)  

- एक ही फंड में सारा पैसा न लगाएं, 2-3 अच्छे फंड में बांटें  

- इमरजेंसी फंड अलग से बनाकर रखें


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### आम गलतियां जो बचनी चाहिए


- सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर फंड चुनना  

- बहुत ज्यादा फंड में SIP शुरू करना  

- बाजार गिरते ही SIP रोक देना  

- बिना लक्ष्य के निवेश करना


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**निष्कर्ष:**  

SIP शुरू करना आज के समय में सबसे आसान और स्मार्ट तरीकों में से एक है। छोटी शुरुआत कीजिए, नियमित रहिए और लंबे समय तक निवेश करते रहिए। समय के साथ कंपाउंडिंग आपका पैसा कई गुना बढ़ा सकती है।

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