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First World Yogasana Sports Championship in Ahmedabad signifies transformation of Yogasana

June 05, 2026

 



The inaugural edition of the World Yogasana Sports Championship is being held at the Eka Arena in Ahmedabad. This historic edition is supported by the Ministry of Youth Affairs and Sports, the Ministry of Ayush, and the Sports Authority of India. This landmark event marks a major milestone in advancing Yogasana toward becoming a globally competitive sport with Olympic ambitions. 



The EKA Arena in Ahmedabad has opened its doors to over 400 participants from more than 60 nations, including international contingents from the USA, Ghana, Kenya, and Malaysia. Host nation India is fielding a strong 122-member squad competing across six age categories, from sub-juniors to senior masters. In a global first for the sport, an advanced Electronic Scoring System has been introduced to ensure absolute transparency in judging every posture, balance, and flow. This championship signifies a major transformation for Yogasana, elevating it from a discipline of spiritual wellness into a highly technical, competitive sporting event aimed at the Olympic movement.

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India emerging as preferred global manufacturing destination under vision of Atmanirbhar Bharat: Govt

June 05, 2026

 



Secretary, Department of Consumer Affairs, Nidhi Khare today said that quality is not merely a manufacturing objective but the foundation of consumer trust. She was addressing the FICCI-BIS conference on ‘Quality Systems for Global Manufacturing Competitiveness in New Delhi. The Secretary said that the competitiveness of a nation will depend on the ability to build resilient and future ready manufacturing eco-systems in this era of AI, advanced automation, smart supply chains and data driven production systems. She highlighted that India needs to focus on becoming the quality leader for the global markets for the next 25 years. Ms Khare said that the country is steadily emerging as a preferred global manufacturing destination under the vision of Prime Minister Narendra Modi of Atmanirbhar Bharat and Make in India 2.0. Ms Khare underlined that the manufacturing sector will play a pivotal role in achieving the vision of Viksit Bharat 2047. She said that the government is working towards providing Ease of Doing Business along with decriminalizing various laws to promote private sector to set-up their own cluster-based testing infrastructure. 


Director General, Bureau of Indian Standards (BIS), Sanjay Garg said that in today’s era of interconnected global economy, quality is necessary for survival and growth. He further emphasized creating more consumer awareness regarding quality and standards. Mr Garg stated that BIS has published over 24 thousand standards out of which around 11 thousand standards are product standards and rest includes testing and other standards. He also mentioned that around 94 per cent of Indian standards are aligned to global standards and efforts are being made to align more standards to global benchmarks. Mr Garg said that Mandatory Hallmarking of Gold Jewellery was introduced in June 2021 and today there are over 2.2 lakh BIS Registered Jewellers. He added that there are around 1,600 hallmarking centres across the country. 

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विश्व पर्यावरण दिवस: प्रकृति संरक्षण से ही सुरक्षित होगा भविष्य

June 05, 2026

 



हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने का एक वैश्विक अभियान है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जैव विविधता के क्षरण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। विश्व पर्यावरण दिवस लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और धरती को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश देता है।


विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास


विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत वर्ष 1972 में हुई थी। उस वर्ष स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव पर्यावरण पर पहला वैश्विक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। वर्ष 1974 में पहली बार इस दिवस का आयोजन किया गया और तब से यह दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणीय जन-जागरूकता अभियानों में शामिल हो गया है। हर वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है और कोई एक देश इसकी मेजबानी करता है। इस माध्यम से विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित किया जाता है और लोगों को समाधान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।


पर्यावरण का महत्व


पर्यावरण केवल पेड़-पौधों, नदियों, पहाड़ों और जीव-जंतुओं का समूह नहीं है, बल्कि यह जीवन का आधार है। स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी, उपजाऊ भूमि और संतुलित जलवायु मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य हैं। प्रकृति हमें भोजन, पानी, औषधियां, ऊर्जा और जीवन के लिए आवश्यक अनेक संसाधन प्रदान करती है। यदि पर्यावरण संतुलित रहता है तो मानव समाज का विकास भी स्थायी रूप से संभव होता है। लेकिन जब प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जाता है, जंगलों की कटाई होती है और प्रदूषण बढ़ता है, तब पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है। इसका असर केवल प्रकृति पर ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है।


बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियां


वर्तमान समय में पर्यावरण अनेक गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इनमें सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है। औद्योगिकीकरण, जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग और वनों की कटाई के कारण वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में बाढ़, सूखा, चक्रवात, जंगलों में आग और अत्यधिक गर्मी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


प्रदूषण से बढ़ रहा स्वास्थ्य पर खतरा


वायु प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन चुका है। वाहनों, उद्योगों और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले धुएं के कारण हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रदूषित हवा हर वर्ष लाखों लोगों की असमय मृत्यु का कारण बनती है। जल प्रदूषण भी चिंता का विषय है। नदियों, झीलों और समुद्रों में औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा और रासायनिक पदार्थों के पहुंचने से जल स्रोत दूषित हो रहे हैं। इससे न केवल मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाता है।


प्लास्टिक प्रदूषण की बढ़ती समस्या


आज प्लास्टिक प्रदूषण विश्व की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है। एक बार उपयोग होने वाला प्लास्टिक पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लगते हैं, इसलिए यह भूमि, जल और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को लंबे समय तक प्रभावित करता है। हर वर्ष लाखों टन प्लास्टिक समुद्रों में पहुंचता है, जिससे समुद्री जीवों को भारी नुकसान होता है। कई बार मछलियां, कछुए और पक्षी प्लास्टिक को भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। माइक्रोप्लास्टिक अब भोजन और पेयजल तक पहुंच चुका है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाना आवश्यक है।


जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता


धरती पर मौजूद विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु, पौधे और सूक्ष्मजीव मिलकर जैव विविधता का निर्माण करते हैं। यह जैव विविधता पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन मानव गतिविधियों के कारण अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। वनों की कटाई, प्रदूषण, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। यदि जैव विविधता का संरक्षण नहीं किया गया तो खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वनों का संरक्षण, वन्यजीव अभयारण्यों का विकास और प्राकृतिक आवासों की रक्षा जैव विविधता को बचाने के लिए आवश्यक कदम हैं।


भारत और पर्यावरण संरक्षण


भारत पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। देश में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे कार्यक्रम, हरित भारत अभियान और एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध जैसे कदम भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलें स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास हैं। हालांकि सरकारों के प्रयास तभी सफल हो सकते हैं जब आम नागरिक भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं। पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।


पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की भूमिका


पर्यावरण को बचाने के लिए हर व्यक्ति छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़ा बदलाव ला सकता है। पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना, पानी की बचत करना, बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करना, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना और प्लास्टिक का कम उपयोग करना ऐसे उपाय हैं जिन्हें आसानी से अपनाया जा सकता है। कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का उपयोग करना भी महत्वपूर्ण है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को इस दिशा में प्रेरित किया जा सकता है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया भी पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।


सतत विकास की अवधारणा


आज दुनिया में सतत विकास की अवधारणा को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसका अर्थ है कि वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करे कि भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना सतत विकास का मूल उद्देश्य है। यदि विकास की परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभावों का ध्यान रखा जाए, स्वच्छ तकनीकों का उपयोग किया जाए और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग किया जाए, तो विकास और पर्यावरण दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।


सामूहिक प्रयासों से ही संभव होगा पर्यावरण संरक्षण


विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पृथ्वी केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। पर्यावरण संरक्षण कोई एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। आज जिस प्रकार जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण की चुनौतियां बढ़ रही हैं, उन्हें देखते हुए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। सरकारों, उद्योगों, वैज्ञानिकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करना होगा। यदि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलेंगे तो ही एक स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव होगा। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यही संदेश देता है कि धरती की रक्षा करना केवल विकल्प नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व के लिए अनिवार्य आवश्यकता है।

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ACC approves one-year extension for Tarun Kapoor as Advisor to PM Modi

June 05, 2026

 



The Appointments Committee of the Cabinet has approved a one-year extension for Tarun Kapoor, a retired 1987-batch IAS officer, as Advisor to the Prime Minister Narendra Modi. The Department of Personnel and Training informed that Mr Kapoor’s extended tenure in the Prime Minister’s Office takes effect on the 10th of this month for a further period of one-year.

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Russian President Putin reaffirms strategic partnership with India, backs expansion of bilateral ties

June 05, 2026

 



Russian President Vladimir Putin has hailed Moscow’s strategic partnership with New Delhi and asserted that Western attempts to force India into scaling back its cooperation with Russia are futile and damaging to global stability. In an interaction with heads of leading global news agencies, Putin lauded India’s economic growth and its independent foreign policy and said Russia is determined to expand its economic engagement with the country. He said that India’s economic growth is the result of the hard work that the government of India has been doing under the leadership of Prime Minister Narendra Modi.


The Russian President said that India’s diplomatic engagement with the United States does not hinder or undermine its time-tested relationship with Russia. He said Russia considers India as a reliable partner and it sees no negative consequences from New Delhi’s bilateral relations with any other country. He said that India is a great nation and a democracy, and Russia will continue to expand its relations with it.

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ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’, कहा- भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील

June 05, 2026

 



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही व्यापार समझौता हो सकता है। व्हाइट हाउस में कोयला और ऊर्जा नीति पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत की शुल्क (टैरिफ) व्यवस्था की लंबे समय से आलोचना करने के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता आगे बढ़ रही है।


वहीं सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो के हालिया भारत दौरे के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के करीब पहुंचने संबंधी खबरों पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, “हां, हम यह समझौता कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हम समझौता कर लेंगे, क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं। हमारी आपस में बहुत अच्छी बनती है और हम एक समझौता करेंगे। हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं।”


इस दौरान ट्रंप ने अपनी पुरानी शिकायत भी दोहराई कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर काफी अधिक टैरिफ लगाता रहा है। उन्होंने कहा, “भारत ने कई वर्षों तक अमेरिका का फायदा उठाया। वे हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलते थे और खुद लगभग कुछ नहीं देते थे।”


ट्रंप ने उदाहरण देते हुए हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों का जिक्र किया। उनका कहना था कि पहले भारी आयात शुल्क के कारण अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में कारोबार करना मुश्किल था। उन्होंने कहा, “पहले भारत हार्ले-डेविडसन की मोटरसाइकिलों पर 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगा देता था। इसलिए कंपनी के लिए वहां कारोबार करना मुश्किल हो गया। आखिरकार हार्ले-डेविडसन को भारत में अपने ही प्लांट लगाने पड़े।”


ट्रंप ने कहा कि पहले की व्यापारिक व्यवस्थाओं और उनकी सरकार की मौजूदा नीति में बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा, “वे हमारे उत्पादों पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाते थे और हम उनसे कुछ नहीं लेते थे। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है और हम भारत के साथ व्यापार से अच्छी कमाई कर रहे हैं।”


ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली में इस बात की उम्मीद बढ़ रही है कि दोनों देशों के वार्ताकार एक ऐसे व्यापार समझौते के करीब पहुंच रहे हैं, जिससे बाजार तक पहुंच आसान होगी और टैरिफ से जुड़े कई विवाद कम हो सकते हैं।


भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में व्यापार सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन चुका है। दोनों सरकारें लगातार इस बात पर जोर देती रही हैं कि रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को भी और मजबूत किया जाना चाहिए।


ट्रंप की बातों में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों की झलक भी दिखाई दी, जिसका जिक्र वह अक्सर करते रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान दोनों नेताओं ने कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जिनमें ह्यूस्टन का “हाउडी मोदी” कार्यक्रम और अहमदाबाद का “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम शामिल हैं। (इनपुट-आईएएनएस)

ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’, कहा- भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’, कहा- भारत और अमेरिका के बीच जल्द होगी ट्रेड डील Reviewed by SBR on June 05, 2026 Rating: 5

EAM Dr S Jaishankar extends greetings to Denmark on Constitution Day

June 05, 2026

 



External Affairs Minister Dr S Jaishankar has extended greetings to the Foreign Minister of Denmark, Lars Løkke Rasmussen, and the people of the country on their Constitution Day. In a social media post, Dr Jaishankar said that India is committed to deepening the Green Strategic Partnership and multilateral cooperation with Denmark.

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ED conducts raids in Mizoram over illegal Burmese supari smuggling network

June 04, 2026

 



The Enforcement Directorate (ED) is conducting massive search operations across nine spots in the border town of Champhai along the Mizoram-Myanmar frontier today. The agency said the major crackdown is targeting a highly organised cross-border network involved in the large-scale smuggling of illegal Burmese supari (dry Areca nuts) into India.  

 


The Directorate informed that the ongoing raids focus primarily on the residences and business premises of prominent local facilitators of the smuggling network. The investigation revealed that these individuals illegally brought in Myanmar-origin consignments via the Tiu River, stored them in local godowns and used fraudulent e-way bills and forged documents to pass them off as legitimate local purchases.



 

ED also said the illicit pipeline facilitated the generation and systematic layering of hundreds of crores of rupees. The accused actively exploited their local tribal status to act as front claimants before Customs authorities, using unrelated historic import documents to secure the release of seized contraband.


ED conducts raids in Mizoram over illegal Burmese supari smuggling network ED conducts raids in Mizoram over illegal Burmese supari smuggling network Reviewed by SBR on June 04, 2026 Rating: 5

कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला

June 04, 2026

 



पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले।




सेंसेक्स 410 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,935.83 पर खुला, जबकि निफ्टी 100 अंकों से अधिक यानी करीब 0.5 प्रतिशत फिसल गया।


सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी रियल्टी 0.67 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.53 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। इसी तरह फार्मा और हेल्थकेयर सूचकांकों में भी 0.5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी केमिकल्स सूचकांक मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।


इस बीच, निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में ट्रेंट, आइशर मोटर्स, सिप्ला, इन्फोसिस और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे, जिनमें एक प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। पश्चिम एशिया को लेकर अनिश्चितता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए हुए है।




कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 1.33 प्रतिशत गिरकर 96.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.31 प्रतिशत फिसलकर 94.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


एशियाई बाजारों में भी दबाव देखा गया। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट 3 प्रतिशत तक की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। उधर, अमेरिकी शेयर बाजारों में भी कमजोरी रही। एसएंडपी 500 सूचकांक 0.74 प्रतिशत और नैस्डैक 0.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।


(इनपुट-आईएएनएस)


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