राजधानी शिमला में हाई कोर्ट के वकीलों का रोड परमिट विवाद इतना तूल पकड़ गया कि वकीलों ने राज्य सचिवालय के गेट पर पहुंच कर धरना दिया। आननफानन में मुख्य गेट को बंद करना पड़ा। करीब अढ़ाई घंटे वकीलों ने गेट के बाहर नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से वकीलों की बात हुई। हालांकि मंगलवार को हुए इस प्रदर्शन के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार कुछ लोग बिना अनुमति सचिवालय के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच गए और वहां प्रदर्शन किया। इस दौरान सडक़ पर भीड़ जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ और आम लोगों तथा वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने बताया कि घटना के संबंध में पुलिस थाना पूर्व (ईस्ट) शिमला में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध पैदा किया, प्रशासन के वैध आदेशों का पालन नहीं किया और लोगों को असुविधा पहुंचाई। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध होने के बावजूद प्रदर्शनकारी प्रतिबंधित क्षेत्र में एकत्र हुए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच के दौरान जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार का प्रदर्शन निर्धारित नियमों और प्रशासन द्वारा तय स्थानों पर ही किया जाए, ताकि आम जनता को असुविधा न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
इन वकीलों के खिलाफ दर्ज हुआ केस
प्रदर्शनकारियों में मुख्यत: हमिंद्र चंदेल अध्यक्ष बार एसोसिएशन, डीएस कैंथ, शीतल व्यास, बिदुषी, राजीव सरकेक, नीरज गुप्ता, राकेश मनु चौहान, एचकेएस ठाकुर की पहचान हुई है। पुलिस के अनुसार उक्त अधिवक्ताओं की अगवाई में करीब 150-160 अधिवक्ताओं द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना प्रदर्शन करके यातायात को अवरुद्ध करके सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की है। उपरोक्त अधिवक्ताओं द्वारा प्रशासन की अनुमति के बिना प्रतिबंधित क्षेत्र में यातायात अवरुद्ध करने का केस दर्ज किया गया।
रोड परमिट को हाई पावर्ड कमेटी बनाएगी सरकार
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रधान हेमेंद्र चंदेल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस विवाद पर हाई पावर्ड कमेटी बनाने को कहा है। तब तक बार एसोसिएशन वकीलों की गाडिय़ों की लिस्ट देगी, ताकि उन्हें आने-जाने से रोका न जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने राज्य सरकार ने वकीलों के लिए सस्ती दरों वाले परमिट देने को कहा है। गौरतलब है कि शिमल रोड यूजर एक्ट में संशोधन के बाद अब सील्ड सडक़ों का परमिट 2500 से 10 हजार का हो गया है। इससे पहले वकीलों के लिए बिना परमिट आने-जाने की सहमति थी।
Reviewed by SBR
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June 03, 2026
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