बदलती जीवनशैली, जंक फूड की बढ़ती आदत और मोबाइल-टीवी के अत्यधिक उपयोग का असर अब बच्चों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। बच्चों में बार-बार बीमार पडऩा, कमजोरी, भूख कम लगना, वजन और लंबाई सही से न बढऩा, संक्रमण होना और पढ़ाई में ध्यान कम लगने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ा कारण खराब पोषण और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है।
रिपन अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर धर्माणी ने बताया कि बचपन शरीर, दिमाग और इम्युनिटी के तेजी से विकास का समय होता है। यदि इस दौरान सही पोषण न मिले तो इसका असर पूरे जीवन पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन-सी और जिंक जैसे पोषक तत्वों का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोयाबीन, राजमा, हरी सब्जियां, चना, गुड़, अनार, बीन्स, आंवला, संतरा, नींबू और मेवे बच्चों के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। डाक्टर धर्माणी के अनुसार बार-बार सर्दी-जुकाम, बुखार, कमजोरी, बाल झडऩा, त्वचा रूखी होना, भूख कम लगना और पढ़ाई में ध्यान न लगना खराब पोषण के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की खानपान आदतों और स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।
स्वस्थ बचपन ही स्वस्थ भविष्य की पहचान है। अच्छा पोषण, सही दिनचर्या और प्यार भरा वातावरण बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है
– डाक्टर अंकुर धर्माणी, शिशु रोग विशेषज्ञ, रिपन अस्पताल
Reviewed by SBR
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May 29, 2026
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