भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह तीन दिनों के फ्रांस दौरे पर हैं। जहां वह राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन समेत रक्षा उद्योग के प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। खबर है कि भारत जल्द ही इन 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक लेटर ऑफ रिक्वेस्ट सौंप सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा और जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच इस सौदे को लेकर बातचीत में तेजी देखी जा रही है। राफेल डील में सबसे बड़ा मुद्दा कीमत नहीं, बल्कि तकनीकी नियंत्रण को लेकर है। भारत चाहता है कि उसे राफेल के इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट्स तक पहुंच मिले। ये वे तकनीकी दस्तावेज होते हैं, जो बताते हैं कि विमान के कम्प्यूटर, सेंसर और हथियार प्रणाली आपस में कैसे कनेक्ट करते हैं। भारत का तर्क है
कि अगर उसे इन दस्तावेजों तक पहुंच मिलती है, तो वह बिना डसॉल्ट की मंजूरी के अपने स्वदेशी हथियारों को राफेल में जोड़ सकेगा। इनमें अस्त्र बीवीआर, ब्रह्मोस-एनजी मिसाइलों के अलावा दूसरे भारतीय हथियार शामिल हैं।
भारत खासकर अपनी सबसे घातक मिसाइल ब्रह्मोस को राफेल में इंस्टाल करना चाहता है। भारतीय रक्षा योजनाकारों का मानना है कि इससे राफेल पर विदेशी निर्भरता कम होगी और भविष्य में अपग्रेड करना आसान होगा। हालांकि फ्रांस इस मामले में पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा। फ्रांसीसी रक्षा पोर्टल ओपेक्स न्यूज की रिपोट्स के मुताबिक, पेरिस राफेल के सोर्स कोड और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर तक पहुंच देने को तैयार नहीं है। फ्रांस को आशंका है कि अगर भारतीय प्लेटफॉर्म पर रूसी या भारत-रूस संयुक्त परियोजनाओं के हथियार जोड़े गए तो संवेदनशील तकनीक के लीक होने का खतरा पैदा हो सकता है. इसके अलावा बौद्धिक संपदा की सुरक्षा भी फ्रांस की बड़ी चिंता है। हालांकि दोनों देशों के बीच एक समझौते का रास्ता तलाशा जा रहा है, जिसके तहत भारत को सीमित तकनीकी पहुंच दी जा सकती है, लेकिन मुख्य सोर्स कोड फ्रांस के नियंत्रण में रहेगा। पीएम मोदी के फ्रांस दौरे के दौरान राफेल डील में सोर्स कोड और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर तक पहुंच ही मुख्य मुद्दा रहेगा।
34 अरब यूरो का सबसे बड़ा लड़ाकू विमान सौदा
114 राफेल विमानों का प्रस्तावित सौदा करीब 34 अरब यूरो का बताया जा रहा है। इसे दुनिया के सबसे बड़े लड़ाकू विमान सौदों में गिना जा रहा है। योजना के मुताबिक शुरुआती 24 विमान सीधे फ्रांस से भारत को दिए जाएंगे, ताकि तत्काल जरूरत पूरी की जा सके। इसके बाद लगभग 90 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार स्थानीय उत्पादन का लक्ष्य करीब 50 प्रतिशत तक रखा गया है। इससे भारत के रक्षा उत्पादन और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अगर बातचीत तय दिशा में आगे बढ़ती है, तो 2026 के अंत तक इस ऐतिहासिक सौदे पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। तब भारत के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली और आधुनिक राफेल फ्लीट में से एक होगी, जो आने वाले वर्षों में उसकी हवाई ताकत का प्रमुख आधार बनेगी।
Reviewed by SBR
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June 02, 2026
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