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| Natural Farming Training: |
हिमाचल प्रदेश: प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 5 विकासखंडों के करीब 750 किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को कम लागत वाली और रसायन मुक्त खेती की ओर प्रोत्साहित करना है।
प्राकृतिक खेती हिमाचल प्रदेश सरकार की कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। राज्य के कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने जैसी सुविधाओं के माध्यम से किसानों को इस पद्धति से जोड़ रही है।
किसानों को दी गई प्राकृतिक खेती की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। इसमें खेत में उपलब्ध संसाधनों से प्राकृतिक कृषि इनपुट तैयार करना, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना, फसल उत्पादन की लागत कम करना और रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता घटाना जैसे विषय शामिल रहे।
किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों को व्यावहारिक तरीके से अपनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया गया।
कम लागत और बेहतर मिट्टी पर जोर
प्राकृतिक खेती का प्रमुख उद्देश्य खेती की लागत को कम करने के साथ-साथ मिट्टी और पर्यावरण की सेहत को बेहतर बनाना है। हिमाचल में प्राकृतिक खेती के तहत किसानों को स्थानीय संसाधनों से तैयार होने वाले जैविक इनपुट और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हिमाचल में तेजी से बढ़ रहा दायरा
हिमाचल प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3 लाख से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है और करीब 2.22 लाख किसान वर्तमान में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। लगभग 38,437 हेक्टेयर क्षेत्र में रसायन मुक्त खेती की जा रही है।
राज्य सरकार प्राकृतिक खेती से पैदा होने वाली फसलों के लिए बाजार और मूल्य समर्थन पर भी जोर दे रही है। कृषि विभाग की योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण के साथ-साथ उत्पादन और विपणन से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के पीछे किसानों की उत्पादन लागत घटाना और उनकी आय में सुधार करना भी एक प्रमुख उद्देश्य है। कम बाहरी इनपुट वाली खेती से किसानों को महंगे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।
हिमाचल में प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।
SBR News: प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों के बीच जागरूकता और प्रशिक्षण बढ़ने से हिमाचल में टिकाऊ कृषि को नई दिशा मिल रही है। 750 किसानों का प्रशिक्षण इसी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
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