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PM Modi says citizens are at centre of governance, sharing article by Defence Minister Rajnath Singh

January 26, 2026

 


Prime Minister Narendra Modi has said that citizens are at the centre of governance today. Sharing an article by Defence Minister Rajnath Singh in a social media post, Mr Modi noted that the republic is advancing social justice and enabling economic inclusion. The Prime Minister said that together, these efforts uphold the constitutional vision of a welfare-oriented democratic republic.

 

Mr Singh, in his article, reflected on the country’s journey under the leadership of Prime Minister Narendra Modi. The Minister highlighted the country’s journey as a People-First Republic, where democracy is not only ‘of the people’ and ‘by the people’, but also steadfastly ‘for the people’. 

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Republic Day: Grand dance tribute to Vande Mataram’s 150th year at Kartavya Path

January 26, 2026


 Thousands of artists came together along Kartavya Path during Republic Day celebrations this morning and performed a choreographed dance to the tune of the national song Vande Mataram, highlighting its 150th anniversary.

 

Around 2,500 artists representing different states and dressed in colourful attire showcased India’s rich cultural diversity through folk and classical forms. The theme of today’s Republic Parade was “Swatantrata Ka Mantra – Vande Mataram,” reflecting the song’s journey from the freedom movement to a symbol of national unity. 

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3rd T20 between India, New Zealand to be played in Guwahati today

January 25, 2026


 In Cricket, third Twenty20 match between India and New Zealand will be played at the ACA Stadium, Barsapara in Guwahati today. The match will starts at 7:00 PM. India lead the five-match series 2-0 and a win in this game will secure the series for India.

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बर्फबारी ने छीना जेईई मेन्स का मौका, अभ्यर्थियों की एनटीए से दोबारा एग्जाम करवाने की मांग

January 25, 2026

 

प्रदेश में भारी बर्फबारी और खराब मौसम ने जेईई मेन्स परीक्षा देने जा रहे कई होनहार छात्रों के सपनों पर अस्थायी ब्रेक लगा दिया। दुर्गम इलाकों में सडक़ें बंद होने और परिवहन व्यवस्था ठप होने के कारण कई छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरी निराशा है। जेईई मेन्स परीक्षा का आयोजन 21, 22, 23, 24 और 28 जनवरी को किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार दोपहर तीन से छह बजे तक आयोजित परीक्षा में प्रदेश के कई छात्र शामिल नहीं हो सके। बर्फबारी के कारण बच्चों को शिमला से निकलना मुश्किल हो गया। बच्चों का घणाहट्टी स्थित संस्कृत कॉलेज में दूसरी शिफ्ट में जेईई परीक्षा थी, लेकिन बर्फबारी और रोड बंद होने के कारण छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके।



जेईई मेन्स की परीक्षा देने आए छात्र प्रियांशु नेगी (किन्नौर), सुजल नेगी (किन्नौर), प्रत्यूश ठाकुर (मंडी), स्नेहा मिश्रा (शिमला) का कहना है कि उन्होंने महीनों की कड़ी मेहनत से जेईई की तैयारी की थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा जैसे हालातों के कारण वे परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाए। कई छात्रों ने सुबह ही घर से निकलने की कोशिश की, लेकिन बर्फ और फिसलन के कारण रास्ते में ही लौटना पड़ा। वहीं, बसें और टैक्सियां भी बर्फबारी के चलते नहीं चल सकीं। छात्रों का कहना है कि जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में एक मौका पूरे करियर की दिशा तय करता है। प्राकृतिक आपदा के कारण परीक्षा से वंचित होना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। इन छात्रों ने उम्मीद जताई है कि एनटीए मानवीय और न्यायसंगत फैसला लेगी।


री-एग्जाम की बनाएं पॉलिसी


छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी। पहाड़ी राज्य में मौसम की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा आयोजक एजेंसी को विशेष व्यवस्था या वैकल्पिक तिथि की घोषणा करनी चाहिए। छात्रों ने मांग की है कि बर्फबारी से प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा करवाई जाए। छात्रों का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में जनवरी महीने में बर्फबारी आम है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए, मौसम प्रभावित छात्रों के लिए री-एग्जाम पॉलिसी बनाई जाए और विशेष परिस्थितियों में राहत प्रावधान लागू किए जाएं।

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मंडी की रसोई में खप गया चार हजार क्विंटल लूण

January 25, 2026

 


मंडी जिला में हर दिन जलते चूल्हे पर बनती दो जून की रोटी में चार हजार क्विंटल सरकारी नमक ही खप गया है। बीते दो महीनों के भीतर ही मंडी में 85 हजार क्विंटल आटा चट हो गया है। उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरित हुए सरकारी राशन के आंकड़े तो यही बताते हैं कि इस समय अवधि के तहत पौने दस लाख लीटर तेल लोग हजम कर गए हैं। खाद्य विभाग के आंकड़े यह बता रहे हैं कि इस राशन का वितरण मंडी जिला में नबंवर और दिसंबर माह में किया गया है। मंडी जिला में कुल राशन कार्डधारक सवा तीन लोगों को यह राशन मुहैया करवाया गया है। उचित मूल्य दुकानों द्वारा 323950 राशन कार्ड धारकों को आटा, चावल, दालें, चीनी, तेल एवं नमक का वितरण किया जा रहा है।


यह वितरण एपीएलए बीपीएलए अंत्योदय अन्न योजना तथा प्राथमिक गृहस्थियां योजना के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवम्बर 2025 तथा दिसंबर 2025 के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कुल 84990 क्विंटल आटा, 54493 क्विंटल चावल, 10915 क्विंटल दालें, 8162 क्विंटल चीनी, 981639 लीटर खाद्य तेल तथा 4018.41 क्विंटल नमक वितरित किया गया। जिला मंडी में खाद्य आपूर्ति निगम के 19 गोदामों के माध्यम से 855 उचित मूल्य की दुकानों से सरकारी राशन का वितरण होता है। इस दौरान आटा, चावल, दालें, चीनी, तेल एवं नमक का वितरण किया जा रहा है। उचित मूल्य दुकानों द्वारा 323950 राशन कार्ड धारकों को राशन वितरित किया जा रहा है।


निरीक्षण में पाई अनियमितताएं, वसूला जुर्माना

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा नवम्बर 2025 से दिसंबर 2025 के दौरान विभिन्न नियंत्रण आदेशों के तहत कुल 1039 निरीक्षण किए गए। निरीक्षणों के दौरान पाई गई अनियमितताओं पर इस अवधि में कुल 10400 रुपये का जुर्माना वसूला गया। उन्होंने खाद्यान्नों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण एवं नमूने लेने के निर्देश भी दिए।


मंडी में राशन वितरण को खुलेंगी नई दुकानें

मंडी डीसी अर्पूव देवगन ने बताया कि राशन का वितरण सही से हो और उचित मुल्य की दुकानों पर लोगों को ज्यादा इंतजार ना करना पड़े इसके लिए कुछ नई दुकाने खोली जाएंगी।

मंडी की रसोई में खप गया चार हजार क्विंटल लूण मंडी की रसोई में खप गया चार हजार क्विंटल लूण Reviewed by SBR on January 25, 2026 Rating: 5

बर्फबारी से राजधानी पर्यटकों से हुई गुलजार

January 25, 2026

 


जिला में पर्यटक बढऩे से कारोबारियों के खिले चेहरे, पर्यटकों ने कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर टॉय ट्रेन से निहारी वादियां


बर्फबारी के बाद अब अन्य राज्यों से पर्यटकों ने शिमला का रुख करना शुरू कर दिया है। बर्फबारी के बाद अब पर्यटकों में शिमला पहुंचने की होड़ सी लग गई है। शुक्रवार को हुई बर्फबारी के बाद शनिवार को शिमला के एंट्री प्वाइंट पर पर्यटक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। इस वीकेंड पर तीन छुट्टियों का पैकेज है। जिसमें भारी संख्या में पर्यटक शिमला का रुख कर रहे हैं। पर्यटक कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक से टॉय ट्रेन में सफर कर शिमला पहुंच रहे हैं। शनिवार को ट्रेन के शिमला पहुंचते ही पर्यटक हर तरफ बर्फ देखकर उत्साहित हो उठे। जिसका वीडियो खूब वायरल हो रही है। सैलानी ट्रेन से उतरते ही बर्फ में मस्ती करने लगे।


बर्फबारी के बाद इस वीकेंड शिमला एक बार फिर पर्यटकों से पैक हो गई है। चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली सहित पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में सैलानी शिमला पहुंच रहे हैं। शनिवार को पर्यटक रिज, माल रोड और अन्य पर्यटक स्थलों पर मौज-मस्ती करते नजर आए। दिन के समय रिज पर जमी बर्फ में पर्यटक खेलते और फोटो खीचवाते नजर आए। पर्यटकों की भारी संख्या में पहुंचने से पर्यटन कारोबारी के चेहरे खिल उठे है। बर्फबारी के बाद अचानक बढ़ी भीड़ से होटल बुकिंग में इजाफा हुआ है। शहर के होटलों में ऑक्यूपेंसी 60 से 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है।


होटलों में ऑक्यूपेंसी बढ़ी

होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने बताया कि बीते दो हफ्तों से होटल पूरी तरह खाली चल रहे हैं। इस वीकेंड पर पर्यटकों के आने से होटलों में ऑक्यूपेंसी बढ़ी है। शुक्रवार को हुई बर्फबारी के बाद अब शिमला में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। शुक्रवार को 60 से 65 के प्रतिशत ऑक्यूपेंसी रही और आने वाले दिनों में ऑक्यूपेंसी और बढऩे की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बर्फबारी के बाद शिमला में अब आक्यूपेंसी बढऩी शुरू हो गई है। वहीं दूसरी ओर से एडवांस बुकिंग में भी अचानक उछाल आया है।

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Full Statehood Day : परागपुर से आज सौगातें देंगे CM, महिलाओं को 1500, कर्मचारियों को DA की आस

January 25, 2026


 मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कांगड़ा जिला के परागपुर से पूर्ण राज्यत्व दिवस के राज्यस्तरीय समारोह को संबोधित करेंगे। वह इस अवसर का इस्तेमाल नई घोषणा को लेकर भी कर सकते हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री मनाली और सुलाह विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान पहली अप्रैल से महिलाओं को 1500 रुपए देने की घोषणा कर चुके हैं। यह घोषणा पूरे प्रदेश के लिए एक साथ कब होगी? इसका इंतजार अभी महिलाओं को है। दूसरी तरफ राज्य के सरकारी कर्मचारियों को अपने महंगाई भत्ते और पिछले वेतन आयोग के एरियर का फिक्र है। मुख्यमंत्री इसके बाद विधानसभा के बजट सत्र में जा रहे हैं। इसलिए नए बजट से पहले क्या कोई बड़ी घोषणा पूर्ण राज्यत्व दिवस के मंच से हो सकती है? इसका इंतजार सबको है। स्टेट हुड डे के इस कार्यक्रम के लिए खराब मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री शिमला से बाई रोड रवाना हो गए हैं।


रात को नादौन में रुकने के बाद सुबह वह परागपुर में होंगे और इसके बाद शिमला लौट आएंगे, क्योंकि गणतंत्र दिवस का राज्य स्तरीय समारोह ऐतिहासिक रिज मैदान पर है। कांगड़ा के लिए शिमला से रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के 56वें पूर्ण राज्यत्व दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण राज्यत्व दिवस हिमाचल प्रदेश की गौरवशाली यात्रा, ऐतिहासिक संघर्षों और जन एकजुटता का जीवंत प्रतीक है। यह दिवस हमें अपने स्वर्णिम अतीत से प्रेरणा लेने तथा प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए नए संकल्प अपनाने का अवसर प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दूरदर्शी नेतृत्व का सम्मान व्यक्त करते हुए ‘हिमाचल के शिल्पकार’ डॉ. वाईएस परमार सहित उन सभी महान विभूतियों को याद किया, जिनकी दूरदृष्टि, त्याग और अथक प्रयासों से प्रदेश ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे ‘हरित एवं समृद्ध हिमाचल’ के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहयोग, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा और राष्ट्र निर्माण में सशक्त योगदान देगा।


मुख्यमंत्री ने किया याद इंदिरा गांधी का योगदान

मुख्यमंत्री ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अविस्मरणीय योगदान को भी स्मरण करते हुए कहा कि 25 जनवरी, 1971 को शिमला के ऐतिहासिक रिज पर भारी हिमपात के बीच हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की घोषणा प्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। प्रदेश के भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार मिशन मोड में कार्य करते हुए प्रदेश की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पूर्णत: आत्मनिर्भर राज्य बनाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में ठोस एवं परिणामोन्मुखी कदम उठाए जा रहे हैं।

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18th Rozgar Mela: Appointment Letters Distributed at Multiple Centres in Maharashtra

January 25, 2026


 As part of the 18th Rozgar Mela in Maharashtra, appointment letters were distributed at multiple venues. At the Central Reserve Police Force – CRPF Group Centre at Hingna in Nagpur, 250 appointment letters were handed over by Deputy Inspector General of Police of CRPF Nagpur, Anil Kumar. The 18th tranche of the Rozgar Mela was also held at the CRPF Group Centre in Pune. Union Minister of State for Cooperation and Civil Aviation Murlidhar Mohol was the Chief Guest. 


Appointment letters were distributed to 300 selected candidates from organisations including CRPF, Border Security Force, Indo-Tibetan Border Police, Sashastra Seema Bal, Assam Rifles, Bank of Baroda, Union Bank of India, Employees’ Provident Fund Organisation, and IIGM. These newly appointed youth, selected from various parts of the country, will join different Ministries and Departments of the Government of India and contribute towards strengthening governance and improving public service delivery.

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पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संदिग्ध मामले, केंद्र ने दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन

January 25, 2026

 


पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के संदिग्ध मामलों की पहचान के बाद केंद्र सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए त्वरित और व्यापक कदम उठाए हैं। 11 जनवरी 2026 को कल्याणी स्थित आईसीएमआर के वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी (वीआरडीएल), एम्स कल्याणी में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामलों की पुष्टि हुई है। निपाह वायरस एक गंभीर ज़ूनोटिक बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर अधिक होती है और इसके तेज़ी से फैलने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए हालात को सर्वोच्च प्राथमिकता पर संभाला जा रहा है।


मामले सामने आते ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) के साथ समीक्षा बैठक की और त्वरित तथा समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की। राज्य सरकार को सहयोग देने के लिए केंद्र की ओर से एक राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल तैनात किया गया है। इस टीम में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड पब्लिक हाइजीन, कोलकाता; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी, चेन्नई; एम्स कल्याणी तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन्यजीव विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।


केंद्र सरकार ने निपाह वायरस रोग से संबंधित दिशा-निर्देश राज्य के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) को साझा किए हैं। साथ ही, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र (पीएचईओसी) को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि देशभर में प्रतिक्रिया और समन्वय को प्रभावी बनाया जा सके।


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से टेलीफोन पर भी बातचीत कर राज्य को तकनीकी, लॉजिस्टिक और संचालन स्तर पर हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।


केंद्र सरकार की ओर से प्रयोगशाला सहायता, निगरानी को सुदृढ़ करने, रोगियों के उपचार, संक्रमण की रोकथाम एवं नियंत्रण उपायों तथा विशेषज्ञ मार्गदर्शन सहित सभी आवश्यक संसाधन पहले ही जुटा दिए गए हैं। राज्य सरकार को तैनात विशेषज्ञ टीमों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने, संदिग्ध संपर्कों की गहन पहचान और अन्य रोकथाम उपायों को सख्ती से लागू करने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में रहकर स्थिति पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है।

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एक खुले बजट की ओर

January 25, 2026

 


बजट की गोपनीयता की रस्म, जो औपनिवेशिक काल के रहस्य में लिपटी हुई है और बदनाम ‘बजट बंकर’ द्वारा दर्शाई गई नाटकीय सख्ती के साथ लागू की जाती है, 21वीं सदी के लोकतंत्र में एक पुरानी बात लगती है, जो पारदॢशता और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था के लिए कोशिश कर...


बजट की गोपनीयता की रस्म, जो औपनिवेशिक काल के रहस्य में लिपटी हुई है और बदनाम ‘बजट बंकर’ द्वारा दर्शाई गई नाटकीय सख्ती के साथ लागू की जाती है, 21वीं सदी के लोकतंत्र में एक पुरानी बात लगती है, जो पारदॢशता और भागीदारी वाली शासन व्यवस्था के लिए कोशिश कर रहा है। यह परंपरा, जिसमें केंद्रीय बजट संसद में तय दिन पर ही खोला जाता है, समझदारी भरे आॢथक प्रबंधन का स्तंभ कम और पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता का अवशेष ज्यादा है।


इस अवधारणा के जनक रॉबर्ट वालपोल थे, जो ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री थे (और अपने प्रधानमंत्रित्व काल में चांसलर ऑफ एक्सचेकर भी थे)। 1733 में, वालपोल के विरोधियों ने उनके टैक्स प्रस्तावों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें जादूगर की चाल बताया और ‘द बजट ओपन्ड’ शीर्षक से एक पैम्फलेट प्रकाशित किया, जिसमें वित्तीय योजना को ‘चालों की थैली’ से प्रकट किया गया एक ‘महान रहस्य’ बताया गया था। वालपोल और तब से हर चांसलर ने अपने वित्तीय प्रस्तावों की गोपनीयता का इस्तेमाल सट्टेबाजी वाले बाजार के हितों की रक्षा करने की बजाय संसदीय विरोधियों को मात देने और जनता के गुस्से को कम करने के लिए किया। इस प्रथा को ब्रिटिश भारत में लाया गया और तेज किया गया, जहां बजट लोकतांत्रिक बातचीत का नहीं, बल्कि शाही शोषण का एक उपकरण था। आज के नॉर्थ ब्लॉक का बजट बंकर औपनिवेशिक किलेबंदी वाली मानसिकता का सीधा वंशज है।


इस गोपनीयता के क्लासिक तर्क आधुनिक संदर्भ में कमजोर हैं। रियल-टाइम डाटा एनालिटिक्स, एल्गोरिदमिक ट्रेङ्क्षडग और वैश्विक पूंजी प्रवाह के युग में, यह धारणा कि कुछ हफ्तों की गुप्त तैयारी बाजारों को प्रभावी ढंग से ‘हैरान’ कर सकती है, भोली है। इसकी बजाय, जटिल वित्तीय और टैक्स उपायों की अचानक, बड़े पैमाने पर घोषणा अक्सर अस्थिरता पैदा करती है क्योंकि बाजार बिना किसी विश्लेषक की पहले की जांच या चरणबद्ध बहस के सैंकड़ों पन्नों की घनी नीति को समझने की कोशिश करते हैं। यह जिस असली सट्टेबाजी को बढ़ावा देता है, वह राजनीतिक किस्म की होती है-उन्मादी मीडिया अटकलें और लॉबिस्टों की फुसफुसाहट वाली मुहिम, जो सूचना के अभाव में पनपती है। इसके अलावा, यह दावा कि गोपनीयता अनुचित लाभ को रोकती है, खोखला है, जब हम यह सोचते हैं कि परिष्कृत कॉर्पोरेट संस्थाओं के पास आम नागरिक या छोटे व्यवसाय की तुलना में तत्काल बजट घोषणा का विश्लेषण करने और उस पर प्रतिक्रिया करने के लिए हमेशा अधिक संसाधन होते हैं। 


स्वीडन, नीदरलैंड्स और जर्मनी जैसे देश ओपन बजट बनाने के सिद्धांतों पर काम करते हैं। मुख्य पैरामीटर - वित्तीय सीमाएं, प्रमुख नीति दिशा, राजस्व पूर्वानुमान महीनों पहले प्रकाशित किए जाते हैं और उन पर बहस होती है। फ्रांस भी एक पारिभाषित मल्टी-ईयर वित्तीय ढांचे के भीतर बजट पर एक व्यापक सार्वजनिक और संसदीय चर्चा करता है। विधायिका सालाना तमाशे के लिए एक निष्क्रिय दर्शक बनने की बजाय शासन में एक भागीदार बन जाती है। ऐसी पारदॢशता का सीधा संबंध उच्च क्रैडिट रेटिंग, कम उधार लागत और अधिक वित्तीय स्थिरता से है - ऐसे परिणाम, जिनकी भारत को सख्त जरूरत है।


भारत के लिए ऐसे मॉडल की ओर बढऩे के फायदे बहुत ज्यादा हैं। सबसे पहले, यह कार्यपालिका पर एक मजबूत अनुशासन लागू करता है। दूसरा, यह ठोस पॉलिसी में तालमेल को बढ़ावा देता है। जब बड़ी पहल, चाहे वह कोई नई वैल्फेयर स्कीम हो या डिफैंस मॉडर्नाइजेशन प्लान, बजट से पहले के बयान में बताई जाती हैं, तो संसदीय समितियां हितधारकों से चर्चा कर, उनकी व्यवहार्यता का आकलन और लंबे समय के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ तालमेल का मूल्यांकन कर सकती हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह राजनीतिक रूप से तय किए गए आॢथक पैकेजों के लगातार विवाद को खत्म कर देगा। अगर इन आबंटनों पर खुले बजट फ्रेमवर्क के हिस्से के रूप में चर्चा की जाती है, तो उनका जरूरत, प्रदर्शन और समानता के वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जा सकता है, जिससे उन्हें ज्यादा वैधता मिलेगी।


भारत के लिए आगे का रास्ता धीरे-धीरे, सोच-समझकर कैलिब्रेटेड खुलापन अपनाना है। यह प्रक्रिया बजट दिवस से दो-तीन महीने पहले एक अनिवार्य प्री-बजट वित्तीय रणनीति विवरण के साथ शुरू हो सकती है। साथ ही, टैक्स प्रस्तावों पर एक तकनीकी दस्तावेज एडवांस रूलिंग अथॉरिटी और विशेषज्ञों के एक चुनिंदा पैनल के साथ कड़ी गोपनीयता के तहत सांझा किया जा सकता है ताकि प्रशासनिक व्यवहार्यता की जांच की जा सके और केवल सटीक दर परिवर्तनों की घोषणा उसी दिन की जाए।  अब समय आ गया है कि हम अपनी वित्तीय योजना के केंद्र में सूचित बहस की रोशनी लाएं, क्योंकि जैसा कि जस्टिस लुई ब्रैंडिस की प्रसिद्ध पंक्तियां हैं, धूप सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है। राष्ट्र का वित्तीय स्वास्थ्य और उसके लोकतंत्र की अखंडता इससे कम कुछ भी नहीं मांगती।

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‘चौथे स्तंभ’ का काम सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना भी

January 25, 2026


 फैज अहमद फैज की यह रचना उन द्वारा लिखी ‘जेल डायरी’ से प्रेरित है। ये पंक्तियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी के बावजूद एक शायर व लेखक के हौसले को दर्शाती हैं। 1950 के दशक के बाद फैज अहमद फैज को उनके प्रगतिशील, क्रांतिकारी और वामपंथी विचारों के...


मता-ए-लौह-ओ-कलम छिन गई तो क्या गम है, 

कि खून-ए-दिल में डुबो ली हैं उंगलियां मैंने, 

जुबां पे मोहर लगी है तो क्या, 

कि रख दी है हर एक हल्का-ए-जंजीर में जुबां मैंने।


फैज अहमद फैज की यह रचना उन द्वारा लिखी ‘जेल डायरी’ से प्रेरित है। ये पंक्तियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी के बावजूद एक शायर व लेखक के हौसले को दर्शाती हैं। 1950 के दशक के बाद फैज अहमद फैज को उनके प्रगतिशील, क्रांतिकारी और वामपंथी विचारों के कारण सत्ताधारी ताकतों द्वारा बार-बार निशाना बनाया गया और उनकी लेखनी पर पाबंदी लगाई गई लेकिन वह हमेशा अपनी कलम से आवाज उठाते रहे।

शायरों, लेखकों, सम्पादकों पर हकूमतों द्वारा उनकी आवाज दबाना कोई नई बात नहीं है और जब-जब अत्याचार हुए, राज करने वाले राजाओं को बाद में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़े थे। इतिहास इस बात का साक्षी है कि राजा खत्म हो गए, परंतु सच्चाइयां आज भी जिंदा हैं।

‘पंजाब केसरी’ समाचार पत्र समूह पर वर्तमान हकूमत द्वारा सच्चाई न सुन पाने पर जो दमनकारी नीति अपनाई गई है, ये चालें पुरानी हो चुकी हैं। आज सोशल मीडिया का जमाना है। सच्चाई सबके सामने है। शीश महल संबंधी एक खबर के प्रकाशन पर तिलमिलाहट क्यों, वह भी, जब दूसरा पक्ष भी प्रकाशित किया गया हो।

हम को मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, 

दिल के खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है।


‘पंजाब केसरी’ के संस्थापक संपादक लाला जगत नारायण जी और रमेश चंद्र जी को आतंकवाद के खिलाफ देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देना पड़ा था। पत्रकारों की कुर्बानियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के विभिन्न प्रांतों में लिखने या बोलने पर 9 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और 33 पर हमले हुए। आवाज अब भी दबाई नहीं जा सकती।

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाली प्रैस की भूमिका सिर्फ खबरें देना भर नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना और जनता की आवाज बनना भी है। लेकिन जब-जब प्रैस की आवाज दबाने की कोशिश की जाती है, तब-तब यह सिर्फ पत्रकारिता पर हमला नहीं होता, बल्कि पूरे लोकतंत्र की आत्मा को चोट पहुंचती है।

राहत इंदौरी का यह शे’र भी याद रखना चाहिए-

शाखाओं से टूट जाएं वो पत्ते नहीं हैं हम,

आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे।


जब पत्रकार डर के माहौल में काम करने लगते हैं, जब सच्ची खबरों पर रोक लगाई जाती है, जब सवाल पूछने वालों को धमकाया या बदनाम किया जाता है, तब समाज धीरे-धीरे अंधेरे की ओर बढऩे लगता है।

उर्दू के शायर इकबाल अशहर का यह शे’र :

यही जूनून यही एक ख्वाब मेरा है,

मैंं वहां चिराग जला दूं जहां अंधेरा है,

तेरी रजा भी तो शामिल थी मेरे बुझने में,

मैं जो जल उठा हूं तो यह कमाल भी तेरा है।

आज कई जगह यह देखने को मिल रहा है कि प्रैस पर दबाव बनाया जा रहा है-कभी विज्ञापनों के जरिए, कभी सरकारी एजैंसियों के दुरुपयोग के जरिए, कभी कानूनी शिकंजे के जरिए और कभी डर व धमकियों के माध्यम से। कुछ मामलों में तो सच लिखने की कीमत जेल, मुकद्दमे या हमलों के रूप में चुकानी पड़ रही है। यह स्थिति बेहद ङ्क्षचताजनक है, क्योंकि अगर प्रैस ही स्वतंत्र नहीं रहेगी, तो आम आदमी की आवाज कौन उठाएगा?

इस बात की नौबत न आ जाए, 

वो जो ख्वाब थे मेरे जेहन में, 

न मैं कह सका न लिख सका,

कि जुबां मिली तो कटी हुई,

कि कलम मिला तो बिका हुआ।


प्रैस की आजादी का मतलब यह नहीं कि वह निरंकुश हो जाए, बल्कि इसका मतलब यह है कि वह बिना डर और दबाव के सच दिखा सके। सत्ता की आलोचना करना, गलत नीतियों को उजागर करना और जनहित के मुद्दों को सामने लाना ही पत्रकारिता का असली धर्म है।

असली धर्म निभाया है ‘पंजाब केसरी’ ग्रुप ने। दो मुख्य संपादकों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान का दूसरा शायद ही कहीं कोई उदाहरण हो। आतंकवाद के खिलाफ लिखना और उनको सरेआम सरे बाजार दिन दिहाड़े गोलियों से शहीद कर देना और इसके बावजूद आतंकवाद के आगे घुटने न टेकना पत्रकारिता का सच्चा धर्म है।


आतंकवाद के खिलाफ न लिखकर भी वे अपनी जान बचा सकते थे, परन्तु उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मानदंडों के साथ समझौता नहीं किया, कलम उसकी किसी दरबार की जागीर नहीं, किसी के आगे झुकना हमारी तासीर (मूल स्वभाव) नहीं। ‘पंजाब केसरी’ ग्रुप ने पत्रकारिता के अतिरिक्त जो समाज सेवा का बीड़ा उठाया है, वह भी अपने आप में मिसाल है। कहा जाता है कि पत्रकार पीड़ित मानवता का वकील होता है, जो अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज सरकार के कानों तक बुलंद करता है।


‘पंजाब केसरी’ के संचालकों द्वारा चलाया जा रहा ‘शहीद परिवार फंड’ अपने आप में एक वल्र्ड रिकार्ड है, क्योंकि इतने लंबे समय तक शायद समाचार पत्र के माध्यम से कोई भी सेवा प्रोजैक्ट नहीं चलाया गया। इसके अतिरिक्त देश के किसी भी प्रांत में आई प्राकृतिक आपदाओं में रिलीफ फंड चलाना, प्रधान संपादक पद्मश्री विजय कुमार चोपड़ा द्वारा इस क्षेत्र के विभिन्न नगरों में जाकर सेवा प्रोजैक्टों में भाग लेना व लोगों को प्रेरित करना अपने आप में  एक अनूठा उदाहरण है।

वैल्फेयर प्रोजैक्टों के बावजूद यदि वर्तमान हकूमत द्वारा ‘पंजाब केसरी’ ग्रुप पर दमनकारी नीति अपनाई जा रही है तो फिर इसका जवाब अवाम पर ही छोड़ देना चाहिए।

‘चौथे स्तंभ’ का काम सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना भी ‘चौथे स्तंभ’ का काम सत्ता से सवाल पूछना, सच को सामने लाना भी Reviewed by SBR on January 25, 2026 Rating: 5

Secretary of Economic Relations in MEA, Sudhakar Dalela, concludes visit to Addis Ababa, Africa

January 25, 2026


 Indian delegation led by Secretary of Economic Relations in the Ministry of External Affairs, Sudhakar Dalela, concluded their visit to Addis Ababa today. During the visit, Mr. Dalela called on the Chairperson of the African Union Commission, Mahmoud Ali Youssouf, and held discussions with the Deputy Chairperson, Ambassador Selma Malika Haddadi.


In a social media post, the Embassy of India in Ethiopia said that the meeting was an excellent dialogue on ongoing collaboration, ways to further deepen India-Africa partnership. It added that discussions focused on strengthening cooperation within the framework of the India-Africa Forum Summit, guided by the spirit of South-South cooperation. The discussion also stressed on India’s continued commitment to advancing close ties, friendship and cooperation with the African region.

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Panchayati Raj Ministry to felicitate elected Panchayat representatives in New Delhi today

January 25, 2026

The Ministry of Panchayati Raj will felicitate elected Panchayat representatives in New Delhi today. These representatives have been invited as Special Guests to witness the Republic Day Parade.

The honourees include around 240 Sarpanches, Mukhiyas, Gram Pradhans and Block and District Panchayat Presidents from Panchayats that have achieved saturation in flagship Central Government schemes.

Panchayat Assistance and Messaging- PANCHAM Chatbot developed by the Ministry in collaboration with UNICEF will be released at the event.

PANCHAM is a tool for direct, timely, and two-way digital interaction with Panchayat Elected Representatives, officials, and citizens. It also enables easy access to scheme updates, training content, surveys and Panchayat service information, strengthening transparent and effective service delivery at the grassro
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Pure electoral rolls are the bedrock of democracy: CEC Gyanesh Kumar

January 25, 2026

 


Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar has said that pure electoral rolls are the bedrock of democracy. With this objective, the Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls was initiated to ensure that every eligible elector’s name is included in the electoral roll and every ineligible name is removed. He made these remarks in his message on the occasion of the National Voters Day.


Mr Kumar said that SIR has been successfully completed in Bihar and is presently being smoothly conducted in 12 States and Union Territories.


He also informed that SIR will soon be rolled out in the remaining States as well. The CEC noted that there was not a single appeal filed against the final electoral roll in Bihar, establishing its sanctity and credibility.


Recognising the imperatives of the digital age, Mr Kumar said that the Commission has made all elector services available to citizens on a single platform through the ECINet App. He added that this initiative reflects the Commission’s technological commitment and administrative competence.


The CEC also noted that the recently concluded India International Conference on Democracy and Election Management (IICDEM) was attended by heads and senior officials of Election Management Bodies from over 70 countries, along with ambassadors from several nations. He added that this initiative not only reflects India’s global commitment, but also firmly establishes its strong leadership on the international stage.


The Chief Election Commissioner urged the young electors to vote without fail, to become ambassadors of democracy themselves, and to inspire others to participate in the electoral process. He also called upon the young voters to lead the fight against misinformation, disinformation, and false narratives.

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Himachal witnesses first major snowfall of the season; cold wave intensifies

January 23, 2026

 


After a long wait, the weather in Himachal Pradesh has finally changed with the activation of a western disturbance. Most parts of the state are witnessing the season’s first widespread and heavy snowfall, while the lower regions have experienced rain and strong winds. This has led to a sharp drop in temperatures and intensified cold wave conditions across the state. Snowfall has been continuing since last night in the tribal and high-altitude areas.


 


In the state capital, Shimla, snowfall has been ongoing since early morning. Tourist town Manali has also received its first snowfall of the winter, creating great excitement among visitors. The impact of snowfall is clearly visible in Lahaul-Spiti, Kinnaur, Kullu, Chamba, as well as the higher areas of Mandi and Sirmaur districts. The change in weather has brought smiles to the faces of farmers and orchardists.


 


Experts say adequate cold conditions will have a positive impact on fruit quality and production. Meanwhile, the Meteorological Department has issued an orange alert for heavy snowfall and rain at some places in Chamba, Kullu, and Lahaul-Spiti districts today. A yellow alert has been issued for Una, Bilaspur, Hamirpur, Kangra, Solan, Sirmaur, and Mandi districts due to the possibility of hailstorms. According to the department, bad weather conditions may continue in the state tomorrow as well.

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PM Modi says DMK regime had failed to deliver development, was marked by corruption, crime & dynastic politics

January 23, 2026

 


Senior BJP leader and Prime Minister Narendra Modi today asserted that Tamil Nadu was ready for a change of government. He said that the DMK regime had failed to deliver development and was marked by corruption, crime and dynastic politics.


Addressing a public meeting at Maduranthakam, Mr Modi said the DMK government could be described as “CMC – Corruption, Mafia and Crime,” and claimed it had ignored the welfare of youth, farmers and women, besides failing to respect Tamil cultural values. He alleged that drug mafias were active in the state and that women’s safety had deteriorated. Mr Modi said the NDA government had allocated 11 lakh crore rupees to Tamil Nadu over the past 11 years for development, including a sevenfold rise in rail projects, 50,000 Kisan Credit Cards, six crore Mudra loans and direct benefit transfers, and earmarked three lakh crore rupees for MSMEs.


Promising rapid development under a double-engine government, the Prime Minister said better coordination between the Centre and the state would ensure effective implementation of welfare schemes. The meeting was also addressed by AIADMK general secretary and Leader of the Opposition Edappadi K. Palaniswami and former Union Minister Anbumani Ramadoss.

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EMBs resolved to work together on five pillars of declaration, says CEC Gyanesh Kumar

January 23, 2026

 


The India International Conference on Democracy and Election Management (IICDEM) concluded today in New Delhi. The three-day international conference brought together over 100 foreign delegates from various countries, including the United Kingdom, United States, South Africa, Maldives, Botswana, Fiji andthe Czech Republic.


Addressing the closing session, Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar read out the Delhi Declaration 2026, which was unanimously adopted by the Election Management Bodies. The EMBs resolved to work together on the five pillars of the declaration relating to Purity of Electoral Rolls, Conduct of Elections, Research and Publications, Use of Technology and Training and Capacity Building. Mr Kumar said that pure electoral rolls containing names of all eligible electors as per the law are the foundation of any democracy. CEC added that election management bodies should thrive to provide a photo identity card to all electors for easy and transparent conduct of elections.


Mr Kumar further added that India is willing to share its vast experience in the field of elections across all sectors through training and the exchange of its transparent practices.


During the three-day conference, the commission held bilateral discussions with several delegations from various countries. Talking exclusively to Akashvani News, President of the Election Commission of the Maldives, Mohamed Zahid, said that India and the Maldives held detailed discussions on key aspects of election management. He added that these included sharing experiences, training of election officials and collaboration in research related to democracy and electoral processes.


Meanwhile, the Chairperson of the Electoral Commission of Fiji, Justice Usaia Ratuvili, said that India has offered technical assistance and cooperation to support capacity building related to elections.


During the three-day conference, the Election Commission launched ECINET, a comprehensive digital platform to facilitate citizen engagement and participation in the electoral process. The platform connects citizens, candidates, political parties, and election officials, offering all key election services on one secure platform. During the conference, various thematic sessions, Election Management Bodies Working Group Meetings, and EVM Demonstrations were .also held

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India and Germany sign Joint Declaration of Intent on telecommunications cooperation

January 16, 2026


 India and Germany have signed a Joint Declaration of Intent on Telecommunications Cooperation. The Ministry of Communications informed that both sides have agreed to enhance cooperation through regular exchange of information and best practices, promotion of collaboration in emerging and future technologies, and joint efforts in areas such as policy and regulatory frameworks, manufacturing, and facilitation of ease of doing business in the telecommunications and ICT sectors.

The Declaration was signed during the official visit of the Federal Chancellor of the Federal Republic of Germany, Friedrich Merz, to India from the 12th to the 13th of this month. This cooperation in telecommunications, Information and Communication Technologies, supports the shared objective of inclusive and sustainable digital transformation. This reflects the shared commitment of both countries to deepen bilateral cooperation in the fields of telecommunications and Information and Communication Technologies (ICT), building upon the strong momentum in India-Germany relations and sustained high-level engagements.

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सोलन में 37 पशु मित्रों की भर्ती शुरू

January 16, 2026


 सोलन जिले में पशुपालन विभाग ने स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से पशु मित्रों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत जिले में कुल 37 पशु मित्रों के पद भरे जाएंगे। विभाग के अनुसार यह भर्ती अंशकालिक आधार पर की जाएगी, जिसमें चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिदिन चार से पांच घंटे कार्य करना होगा। इसके बदले सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा। पशुपालन विभाग ने जानकारी दी है कि आवेदन प्रक्रिया 12 जनवरी से शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 6 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। भरे हुए आवेदन पत्र कंडाघाट, धर्मपुर और नालागढ़ स्थित पशुपालन विभाग के कार्यालयों में जमा करवाए जा सकते हैं। भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास निर्धारित की गई है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया में उसी पंचायत के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां संबंधित पद सृजित किया गया है।


यह भर्ती सभी वर्गों के लिए खुली है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। चयन प्रक्रिया के तहत पात्र अभ्यर्थियों को फरवरी माह में शारीरिक परीक्षण के लिए बुलाया जाएगा। इस परीक्षण में अभ्यर्थियों को 25 किलो वजन उठाकर 100 मीटर की दूरी एक मिनट के भीतर पूरी करनी होगी। इस शारीरिक परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों की योग्यता का आकलन किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पशु मित्र इंगेजमेंट कमेटी का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित उपमंडल अधिकारी करेंगे। कमेटी में पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। उप निदेशक पशुपालन विभाग सोलन विवेक लाम्बा ने बताया कि चयन के बाद कमेटी अपनी सिफारिश उच्च विभाग को भेजेगी, जिसके आधार पर अंतिम नियुक्ति की जाएगी।


बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

नाहन। जिला रोजगार अधिकारी देविन्द्र कुमार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मैसर्ज ऑरो स्पिनिंग मिल्स बद्दी, जिला सोलन द्वारा हेल्पर और मशीन ऑपरेटर के 200 पद रोजगार कार्यालय के माध्यम से भरे जा रहे है। उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए कैंपस इंटरव्यू 19 जनवर, 2026 को उप रोजगार कार्यालय संगडाह व 20 जनवरी को उप रोजगार कार्यालय सराहां में प्रात: 11 बजे से आयोजित किए जाएगें। इन पदों के लिए आयु 18 वर्ष से 30 वर्ष तथा न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 5वीं से 12वीं रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी आवश्यक दस्तावेज जिसमें, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, स्थाई हिमाचली प्रमाणपत्र तथा 2 पासपोर्ट साइज फोटो सहित निर्धारित तिथियों में उपरोजगार कार्यालयों में कैंपस इंटरव्यू में भाग ले सकते है।

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ट्रम्प किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहे हैं

January 16, 2026

 


अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबदबा उस समय पूरी तरह से प्रदॢशत हुआ, जब उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास मार-ए-लागो में मंच पर आकर वेनेजुएला के खिलाफ अमरीकी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और...


अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबदबा उस समय पूरी तरह से प्रदॢशत हुआ, जब उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास मार-ए-लागो में मंच पर आकर वेनेजुएला के खिलाफ अमरीकी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को न्यूयॉर्क में ‘नार्को-आतंकवाद’ के आरोपों में मुकद्दमे का सामना करने के लिए गिरफ्तार करना एक ‘शानदार हमला’ था। उन्होंने घोषणा की कि अमरीका देश का ‘शासन’ चलाएगा और इसके तेल भंडार का उपयोग उन अमरीकी कंपनियों को मुआवजा देने के लिए करेगा, जिनके निगमों का लगभग दो दशक पहले राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।


क्या वेनेजुएला में अमरीकी सैन्य कार्रवाई वास्तव में नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए थी? सन 2000 से, मादक पदार्थों की ओवरडोज से लगभग सवा दस लाख अमरीकी नागरिकों की मौत हो चुकी है। लेकिन, इनमें से लगभग 69 प्रतिशत मौतें फेंटानिल के कारण हुईं, जिसके पूर्ववर्ती रसायन चीन में उत्पादित होते हैं। वेनेजुएला अमरीका में कोकीन का एक मामूली स्रोत है। हालांकि, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। ट्रम्प की इस घोषणा के बाद कि अमरीकी तेल कंपनियां, जो ‘दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां’ हैं, अब दक्षिण अमरीकी देश में प्रवेश करेंगी, उनके इरादों की और पुष्टि की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।


अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन : वेनेजुएला में अमरीका की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय कानून का सबसे घोर उल्लंघन है। इस बात पर जोर देने की शायद ही जरूरत है कि इस कार्रवाई ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन किया है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी या आत्मरक्षा (अनुच्छेद 51) के अलावा किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के खतरे या उपयोग को प्रतिबंधित करता है। यह घटना अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में शक्ति संतुलन के बिगडऩे का संकेत देती है। मूल रूप से कई देशों के बीच शांति बनाए रखने के लिए यूरोप द्वारा निर्मित इस व्यवस्था में 20वीं शताब्दी में आमूल-चूल परिवर्तन हुए। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, इसने अमरीका और सोवियत संघ को मुख्य भूमिका में रखते हुए एक द्विध्रुवीय संरचना को जन्म दिया। इस दौरान, कोई भी देश बेरोकटोक शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर सका। एक देश दूसरे को संतुलित करता रहा, जिससे एक नाजुक शांति बनी रही।


सत्ता का संतुलन : वेनेजुएला पर हमले से दिसम्बर, 1971 में बंगलादेश युद्ध के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में सत्ता के समीकरणों की याद आती है। इसने राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के भारत-विरोधी प्रशासन की साजिशों को नाकाम कर दिया। जब वाशिंगटन ने नई दिल्ली को डराने और आत्मसमर्पण कराने के लिए अमरीकी सातवें बेड़े की टास्क फोर्स टी.एफ.-74 को तैनात किया, तो सोवियत संघ ने क्रूजर, विध्वंसक और पनडुब्बियों की जवाबी तैनाती करके खतरे को बेअसर कर दिया। यह शक्ति संतुलन की अवधारणा के एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में एक महाशक्ति द्वारा दूसरी महाशक्ति का प्रतिकार था। इसी तरह, जब 1973 के योम किप्पुर युद्ध में मिस्र की तीसरी सेना पर इसराईल के हाथों विनाश का खतरा मंडराया, तो सोवियत नेता लियोनिद ब्रेझनेव ने हवाई डिवीजनों को तैयार क्षेत्रों में तैनात किया, क्योंकि मिस्र मास्को का करीबी सहयोगी था। चिंतित अमरीका ने डेफकोन-3 (अमरीकी रक्षा तत्परता/खतरे का अलर्ट) घोषित किया। इसराईल ने आत्मसमर्पण कर दिया और सोवियत चेतावनी ने मिस्र की सेना को बचा लिया।


हालांकि, 1991 में सोवियत संघ के पतन के साथ, दुनिया ने अमरीका द्वारा सत्ता के अनियंत्रित दुरुपयोग को चुनौती देने में सक्षम एकमात्र शक्ति खो दी। इससे उत्साहित होकर, वाशिंगटन ने पूर्वनिवारक (प्री-एम्पटिव) युद्ध में शामिल होने का अधिकार प्राप्त कर लिया है। इसने प्रत्यक्ष कार्रवाई या समॢथत आंदोलनों के माध्यम से ईराक, मिस्र, लीबिया और सीरिया में सरकारों को उखाड़ फैंका है। निकट भविष्य में, केवल चीन ही अमरीका के प्रतिसंतुलन के रूप में उभर सकता है। रूस और चीन के बीच एक ढीला गठबंधन मौजूदा एकध्रुवीय संरचना को चुनौती दे सकता है, हालांकि प्रमुख शक्तियों के बीच मतभेद एक स्थायी सांझेदारी को रोक सकते हैं। अमरीका ने एक बार फिर भारत के सुरक्षा हितों के प्रति अपनी असंवेदनशीलता साबित कर दी है, ऐसे में नई दिल्ली को एक प्रतिसंतुलनकारी शक्ति बनने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है। उसे अपने सैन्य-औद्योगिक परिसर के निर्माण और रक्षा को मजबूत करने के लिए एक कल्पनाशील और लीक से हटकर रणनीति विकसित करनी होगी।-थॉमस मैथ्यू

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