प्रदेश में भारी बर्फबारी और खराब मौसम ने जेईई मेन्स परीक्षा देने जा रहे कई होनहार छात्रों के सपनों पर अस्थायी ब्रेक लगा दिया। दुर्गम इलाकों में सडक़ें बंद होने और परिवहन व्यवस्था ठप होने के कारण कई छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों में गहरी निराशा है। जेईई मेन्स परीक्षा का आयोजन 21, 22, 23, 24 और 28 जनवरी को किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार दोपहर तीन से छह बजे तक आयोजित परीक्षा में प्रदेश के कई छात्र शामिल नहीं हो सके। बर्फबारी के कारण बच्चों को शिमला से निकलना मुश्किल हो गया। बच्चों का घणाहट्टी स्थित संस्कृत कॉलेज में दूसरी शिफ्ट में जेईई परीक्षा थी, लेकिन बर्फबारी और रोड बंद होने के कारण छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके।
जेईई मेन्स की परीक्षा देने आए छात्र प्रियांशु नेगी (किन्नौर), सुजल नेगी (किन्नौर), प्रत्यूश ठाकुर (मंडी), स्नेहा मिश्रा (शिमला) का कहना है कि उन्होंने महीनों की कड़ी मेहनत से जेईई की तैयारी की थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा जैसे हालातों के कारण वे परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाए। कई छात्रों ने सुबह ही घर से निकलने की कोशिश की, लेकिन बर्फ और फिसलन के कारण रास्ते में ही लौटना पड़ा। वहीं, बसें और टैक्सियां भी बर्फबारी के चलते नहीं चल सकीं। छात्रों का कहना है कि जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में एक मौका पूरे करियर की दिशा तय करता है। प्राकृतिक आपदा के कारण परीक्षा से वंचित होना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। इन छात्रों ने उम्मीद जताई है कि एनटीए मानवीय और न्यायसंगत फैसला लेगी।
री-एग्जाम की बनाएं पॉलिसी
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी। पहाड़ी राज्य में मौसम की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा आयोजक एजेंसी को विशेष व्यवस्था या वैकल्पिक तिथि की घोषणा करनी चाहिए। छात्रों ने मांग की है कि बर्फबारी से प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा करवाई जाए। छात्रों का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में जनवरी महीने में बर्फबारी आम है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए, मौसम प्रभावित छात्रों के लिए री-एग्जाम पॉलिसी बनाई जाए और विशेष परिस्थितियों में राहत प्रावधान लागू किए जाएं।
Reviewed by SBR
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January 25, 2026
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