बाजार से क्यों गायब हुआ ‘ओल्ड मंक’? FSSAI की कार्रवाई के बाद कुछ वैरिएंट पर संकट
बाजार से क्यों गायब हुआ ‘ओल्ड मंक’? FSSAI की कार्रवाई के बाद कुछ वैरिएंट पर संकट
नई दिल्ली/हिमाचल। लोकप्रिय ब्रांड ‘ओल्ड मंक’ से जुड़े कुछ उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की कार्रवाई के बाद बाजार में उनकी उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पूरे ओल्ड मंक ब्रांड पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। कार्रवाई केवल कुछ विशेष वैरिएंट से संबंधित है।
फ्लेवरिंग और लेबलिंग को लेकर आपत्ति
FSSAI के अनुसार कुछ मादक पेय पदार्थों में ऐसे कृत्रिम या ‘नेचर-आइडेंटिकल’ फ्लेवर पाए गए, जिनसे प्राकृतिक स्वाद और खुशबू की नकल की जा रही थी। नियामक का कहना है कि ऐसे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति को लेबल पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।
एक ओल्ड मंक वैरिएंट पर ‘7 Years Old Blended’ जैसे दावे को लेकर भी नियामकीय आपत्ति सामने आई। FSSAI के मुताबिक मिश्रण में इस्तेमाल स्पिरिट की उम्र से जुड़ी जानकारी निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।
क्या पूरा ओल्ड मंक ब्रांड बंद हो गया?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार FSSAI की कार्रवाई पूरे ब्रांड के खिलाफ नहीं बल्कि चुनिंदा वैरिएंट के खिलाफ है। मौजूदा स्टॉक को वास्तविक उत्पाद प्रकृति की जानकारी के साथ बेचने की अनुमति दिए जाने की बात भी सामने आई है, जबकि भविष्य के उत्पादन के लिए नियामकीय निर्देश लागू किए गए हैं।
बाजार में उपलब्धता पर असर
कार्रवाई के बाद प्रभावित वैरिएंट की उपलब्धता में कमी को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। सेना से जुड़े उपभोक्ताओं के बीच भी इस पारंपरिक ब्रांड की लोकप्रियता के कारण प्रतिक्रिया देखने को मिली है। हालांकि, सोशल मीडिया और बाजार की चर्चाओं को पूरे ब्रांड पर प्रतिबंध के रूप में देखना सही नहीं होगा।
SBR News निष्कर्ष
फिलहाल मुख्य मुद्दा किसी पूरे ब्रांड के बंद होने का नहीं, बल्कि चुनिंदा उत्पादों की गुणवत्ता, फ्लेवरिंग और लेबलिंग को लेकर FSSAI की नियामकीय कार्रवाई का है। आगे की उपलब्धता संबंधित उत्पादों के नियामकीय अनुपालन पर निर्भर करेगी।
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