कानूनी संरक्षण से स्वास्थ्य सेवाओं तक, LGBTQ+ समुदाय के लिए केंद्र की बड़ी पहल
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने LGBTQ+ समुदाय, जिसमें इंटरसेक्स व्यक्ति भी शामिल हैं, के अधिकारों, कल्याण और सामाजिक समावेशन को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार शिक्षा, रोजगार, पहचान-पत्र, खाद्य सुरक्षा, बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विभिन्न मंत्रालय और विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
कानूनी संरक्षण का मजबूत ढांचा
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम, 2019 और 2026 में किए गए संशोधनों के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों और कल्याण के लिए कानूनी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इसमें जन्मजात असमानताओं वाले इंटरसेक्स व्यक्तियों को भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा में शामिल किया गया है।
राशन कार्ड में साथी को परिवार का हिस्सा मानने का प्रावधान
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया है कि मौजूदा नियमों के तहत समलैंगिक या क्वीयर संबंध में रहने वाले साथी को राशन कार्ड के उद्देश्य से उसी परिवार या गृहस्थी का हिस्सा माना जाए। ऐसे जोड़ों को राशन कार्ड जारी करने में भेदभाव से बचने के लिए भी कहा गया है।
संयुक्त बैंक खाते और नामांकन की सुविधा
वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार क्वीयर संबंध में रहने वाले व्यक्तियों के लिए संयुक्त बैंक खाता खोलने पर कोई रोक नहीं है। इसके अलावा व्यक्ति अपने क्वीयर साथी को खातेधारक की मृत्यु की स्थिति में खाते की राशि प्राप्त करने के लिए नामांकित भी कर सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर विशेष जोर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने LGBTQ+ समुदाय के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें जागरूकता अभियान, कन्वर्जन थेरेपी पर रोक, सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी की उपलब्धता, चिकित्सा पाठ्यक्रमों में आवश्यक बदलाव और टेली-कंसल्टेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील बनाने की पहल
स्वास्थ्यकर्मियों को LGBTQ+ समुदाय से जुड़े मामलों में संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों को भेदभाव कम करने और समुदाय के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच उपलब्ध कराने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
इंटरसेक्स बच्चों के लिए चिकित्सा दिशानिर्देश
सरकार ने सेक्स डेवलपमेंट में अंतर वाले शिशुओं और बच्चों के लिए आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप से संबंधित दिशानिर्देश भी तैयार किए हैं। इनका उद्देश्य बच्चों को उचित चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराना और अनावश्यक जटिलताओं से बचाना है। साथ ही क्वीयर समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े मुद्दों के लिए भी दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
जेलों में मुलाकात और सुरक्षा के अधिकार
गृह मंत्रालय ने जेलों में क्वीयर समुदाय के लोगों के मुलाकात संबंधी अधिकारों को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया है। इसके अलावा हिंसा, उत्पीड़न और दबाव की धमकियों से समुदाय के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
सामाजिक समावेशन की दिशा में बहु-मंत्रालयीय प्रयास
केंद्र सरकार की पहल में कानूनी संरक्षण, खाद्य सुरक्षा, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा और व्यक्तिगत गरिमा जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है। विभिन्न मंत्रालयों के दिशा-निर्देशों का उद्देश्य LGBTQ+ समुदाय को सरकारी सेवाओं और अधिकारों तक समान पहुंच उपलब्ध कराना तथा सामाजिक समावेशन को मजबूत करना है।
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