भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
नई दिल्ली: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में तेज गति से विस्तार करने की दिशा में बढ़ रही है। अनुमान है कि अगले दशक में देश का अंतरिक्ष क्षेत्र 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था करीब 8 अरब डॉलर की है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी इस विस्तार की प्रमुख वजहों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, निजी क्षेत्र में अंतरिक्ष से जुड़े निवेश में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2021-22 में करीब 100.5 मिलियन डॉलर के निवेश के मुकाबले 31 मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर हो गया।
भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां देश में केवल एक स्पेस स्टार्टअप था, वहीं फरवरी 2026 तक इनकी संख्या 400 से अधिक हो गई।
अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई गैर-सरकारी संस्थाओं को प्राधिकरण भी दिए गए हैं। 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं को 113 प्राधिकरण दिए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 18 स्टार्टअप शामिल हैं।
भारत की अंतरिक्ष सेवाओं की वैश्विक पहुंच भी लगातार बढ़ रही है। मार्च 2026 तक भारत द्वारा 2014 के बाद 399 विदेशी उपग्रहों को लॉन्च किया जा चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निजी निवेश, स्टार्टअप्स, उपग्रह सेवाओं और अंतरिक्ष तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में रोजगार, नवाचार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। आने वाले दशक में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार देश की अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को और मजबूत कर सकता है।
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