सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं से मजबूत हो रही भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और तकनीक आधारित बनाने के लिए पिछले 12 वर्षों में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। आयुष्मान भारत, डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन, मुफ्त जांच और दवाओं के साथ मेडिकल शिक्षा के विस्तार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती दी है।
आयुष्मान भारत से करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र गरीब परिवारों और 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को प्रति परिवार सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जा रहा है। 12 अगस्त 2026 तक देश में 45.5 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। वहीं 30 जून 2026 तक योजना के तहत 12.69 करोड़ अस्पताल भर्ती को मंजूरी दी गई, जिस पर करीब 1.92 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए।
गांवों तक पहुंची प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा
देशभर में 1.86 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को उनके घर के नजदीक 12 प्रकार की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
डिजिटल हेल्थ और टेलीमेडिसिन को बढ़ावा
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 12 अगस्त 2026 तक 96.43 करोड़ ABHA हेल्थ आईडी बनाई जा चुकी हैं और 110 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड इनसे जोड़े गए हैं।
वहीं ई-संजीवनी के जरिए 11 अगस्त 2026 तक 49 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श दिए जा चुके हैं। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी डॉक्टरों से परामर्श लेने की सुविधा मिली है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
सरकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत गर्भवती महिलाओं की मुफ्त जांच, टीकाकरण और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार संस्थागत प्रसव का स्तर 2015-16 के 78.9 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 90.6 प्रतिशत हो गया।
सस्ती दवाओं से घट रहा इलाज का खर्च
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत देशभर में कम कीमत पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। फरवरी 2026 तक 18,646 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए जा चुके थे। इन केंद्रों पर दवाएं सामान्य ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार
पिछले 12 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल सीटों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025-26 तक एलोपैथी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 818 और MBBS सीटों की संख्या 1,28,976 हो गई। देश में 23 एम्स हैं, जिनमें पिछले 12 वर्षों में 12 नए एम्स शुरू किए गए।
सरकार के अनुसार इन पहलों का व्यापक उद्देश्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें आर्थिक स्थिति या भौगोलिक दूरी किसी व्यक्ति के इलाज में बाधा न बने।
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