खादी और ग्रामोद्योग की ऐतिहासिक छलांग

 



खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री गत 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 में 1.87 लाख करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में खादी एवं ग्रामोद्योगों का उत्पादन 1,25,296 करोड़ रुपए रहा। इस दौरान बिक्री भी 1,87,105 करोड़ रही, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है। खादी वस्त्रों का उत्पादन 3,974 करोड़ रुपए और बिक्री 7,869 करोड़ रुपए रही। वहीं, ग्रामोद्योग क्षेत्र की वस्तुओं का उत्पादन 1,21,322 करोड़ रुपए और बिक्री 30,073 करोड़ रुपए रही। ग्रामोद्योग क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 में 1.99 करोड़ लोगों को रोजगार मिला, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपए की बिक्री दर्ज की गई है। र



बिक्री में 501 प्रतिशत का इजाफा




अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और घर-घर स्वदेशी जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 साल में उत्पादन में 380 प्रतिशत और बिक्री में 501 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बारह साल में रोजगार सृजन 56 प्रतिशत बढ़ा है और 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। केवीआईसी की योजनाएं वोकल फॉर लोकल और लोकल टू ग्लोबल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।



सात लाख लोगों को रोजगार



प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपए के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपए की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढक़र 92.08 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है।

खादी और ग्रामोद्योग की ऐतिहासिक छलांग खादी और ग्रामोद्योग की ऐतिहासिक छलांग Reviewed by SBR on May 27, 2026 Rating: 5

No comments:

Welcome TO SBR Group

Powered by Blogger.