तेहरान। ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमरीकी-ब्रिटिश सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया पर दो मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (आईआरबीएम) दागी हैं, हालांकि हमले में किसी के हताहत होने या घायल होने की सूचना नहीं है। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी (एमएनए) ने बताया, “ईरान ने हिंद महासागर के मध्य में स्थित एक संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे ‘डिएगो गार्सिया’ पर दो आईआरबीएम मिसाइलें दागीं।” डिएगो गार्सिया पर यह हमला पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध में एक बड़े तनाव का प्रतीक है तथा इस बात का संकेत है कि अब युद्ध पश्चिमी एशिया से निकलकर हिंद महासागर तक पहुंच गया है।
ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर हमले का तात्पर्य है कि ईरान की मिसाइलों की मारक क्षमता पहले के अनुमान से कहीं अधिक है। एमएनए ने कहा कि ईरान द्वारा अमेरिका के सुदूर सैन्य अड्डे को निशाना बनाना लंबी दूरी के ठिकानों को भेदने की उसकी मिसाइल क्षमता को प्रदर्शित करता है। यह हमला ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के उस फैसले के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को ईरानी मिसाइल ठिकानों पर ‘रक्षात्मक’ संचालन के लिए डिएगो गार्सिया और अन्य ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति दी थी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने डिएगो गार्सिया पर हमले को ‘आत्मरक्षा का अधिकार’ बताते हुए कहा कि इस आधार को ‘ईरान के खिलाफ हमले’ के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने से ब्रिटिश नागरिकों की जान खतरे में पड़ गई है। डिएगो गार्सिया अमरीका की लंबी दूरी के बमवर्षकों विमानों और नौसैनिक संपत्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे निशाना बनाने का उद्देश्य पूरे एशिया में अमेरिकी सेना की सैन्य आपूर्ति के साथ-साथ रसद आपूर्ति को बाधित करना है।
Reviewed by SBR
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March 22, 2026
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