फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच ईरान ने भारत को बड़ी राहत का संकेत दिया है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा है कि ईरान भारत को अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से सुरक्षित रास्ता देने की दिशा में कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ईरान का दोस्त है और इस दिशा में जल्द ही सकारात्मक स्थिति देखने को मिल सकती है। उनके इस बयान को मौजूदा हालात के बीच महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि देश के कई व्यापारिक जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं और फिलहाल भारत के 38 कार्गो शिप फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिनमें तेल टैंकर भी शामिल हैं। ऐसे में ईरान की ओर से दिया गया यह संकेत भारत के लिए राहत भरा माना जा रहा है। बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान जंग शुरू होने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से चौथी बार फोन पर बात की थी और हॉर्मुज स्टे्रट से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिए जान का मामला उठाया था।
इस दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इलाके में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सभी देशों की जिम्मेदारी है और भारत क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए हर संभव कोशिश करेगा। इसी बातचीत के बाद ईरान ने भारत के लिए बड़ी राहत के संकेत दिए हैं। इसी बीच, केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। इसके साथ राज्य सरकारों को जमाखोरी के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और देश में तेल-गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घबराकर बुकिंग या खरीदारी न करने की अपील की। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत की कुल शोधन क्षमता 258 मिलियन मीट्रिक टन है और देश पेट्रोल व डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है। उन्होंने कहा कि देश की सभी रिफाइनरियां फिलहाल 100 प्रतिशत या उससे अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और उनके पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
इस वजह से पेट्रोल और डीजल के आयात की आवश्यकता नहीं है। एलपीजी आपूर्ति को लेकर शर्मा ने कहा कि देशभर के 25 हजार से अधिक एलपीजी वितरकों में कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति नहीं आई है। उन्होंने बताया कि पांच मार्च की तुलना में रिफाइनरियों में एलपीजी का घरेलू उत्पादन लगभग 30 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों को राज्य सरकारों को उपलब्ध कराया गया है, ताकि जरूरत के अनुसार प्राथमिकता तय कर उनका वितरण किया जा सके। उन्होंने बताया कि राज्यों से यह भी कहा गया है कि वे जिलों में ऐसे स्थान चिन्हित करें, जहां केंद्र सरकार द्वारा मंजूर अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन का वितरण किया जा सके। इसके अलावा वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोल इंडिया को छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सुजाता शर्मा ने अंत में देशवासियों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और घबराकर गैस सिलेंडर या ईंधन की बुकिंग न करें, क्योंकि देश में तेल और गैस की पर्याप्त उपलब्धता है।
Reviewed by SBR
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March 14, 2026
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