चिकित्सा पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए CCRAS-NIIHM और सेवाधी संग्रहालय में समझौता

8/14/2026 08:05:00 pm

 



चिकित्सा पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए CCRAS-NIIHM और सेवाधी संग्रहालय में समझौता

भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान विरासत को संरक्षित करने और शोध के लिए सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIHM) और केरल के कुमारनल्लूर स्थित सेवाधी संग्रहालय एवं इंडोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 

📜 30 हजार से अधिक पांडुलिपियों का संग्रह

सेवाधी संग्रहालय में मंदिर अभिलेखों सहित 30,000 से अधिक पांडुलिपियों का विशाल संग्रह मौजूद है। इनमें आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा से जुड़ी कई दुर्लभ एवं ऐतिहासिक रचनाएं शामिल हैं। 

इन पांडुलिपियों में उपचार पद्धतियों, औषधियों, निदान संबंधी अवधारणाओं और भारतीय चिकित्सा परंपराओं के विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

💻 सैकड़ों चिकित्सा पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण

समझौते के तहत CCRAS-NIIHM द्वारा सैकड़ों चिकित्सा पांडुलिपियों का उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटलीकरण किया जाएगा। साथ ही उनकी विस्तृत वर्णनात्मक सूची तैयार की जाएगी।

इस सूची में पांडुलिपि का शीर्षक, लेखक, विषय, भाषा, लिपि, सामग्री, पृष्ठ विवरण, स्थिति और उत्पत्ति जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इससे शोधकर्ताओं के लिए इन दुर्लभ दस्तावेजों को खोजना और उनका अध्ययन करना आसान होगा।

🔬 आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा को मिलेगा बढ़ावा

इस पहल से पांडुलिपि विज्ञान, डिजिटल संरक्षण, पाठ्य अध्ययन और आयुर्वेदिक साहित्यिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। डिजिटल संसाधन भविष्य में शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और चिकित्सा इतिहासकारों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान स्रोत बन सकते हैं।

यह पहल ज्ञान भारतम मिशन के तहत भारत की हस्तलिखित विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार के प्रयासों से भी जुड़ी है।

🏛️ ऑन-साइट डिजिटलीकरण शुरू

CCRAS-NIIHM की विशेषज्ञ टीम ने पांडुलिपियों के ऑन-साइट डिजिटलीकरण का काम भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य दुर्लभ चिकित्सा ज्ञान को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों और शोधकर्ताओं तक पहुंचाना है।



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AI से Cyber Security तक स्किलिंग पर जोर, FutureSkills PRIME से जुड़े 34 लाख युवा

8/14/2026 08:01:00 pm

 


AI से Cyber Security तक स्किलिंग पर जोर, FutureSkills PRIME से जुड़े 34 लाख से ज्यादा युवा

भारत में युवाओं को AI, Cyber Security, Big Data, Cloud Computing और Semiconductor जैसी उभरती तकनीकों के लिए तैयार करने की दिशा में FutureSkills PRIME कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के अनुसार, अब तक 34 लाख से अधिक उम्मीदवार FutureSkills PRIME पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। 

इनमें 23 लाख से अधिक युवाओं ने प्रशिक्षण लिया, जबकि 13 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने कोर्स पूरा कर प्रमाणपत्र हासिल किया है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी। 

💻 AI से साइबर सिक्योरिटी तक प्रशिक्षण

FutureSkills PRIME को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने NASSCOM के साथ मिलकर शुरू किया है। इसका उद्देश्य युवाओं और कामकाजी लोगों को Skilling, Reskilling और Upskilling के अवसर उपलब्ध कराना है।

पोर्टल पर AI, Big Data Analytics, IoT, Cyber Security, Blockchain और AR/VR जैसी तकनीकों से जुड़े 500 से अधिक इंडस्ट्री-अलाइन कोर्स उपलब्ध हैं। 

👩‍💻 महिलाओं और छोटे शहरों की भी बड़ी भागीदारी

FutureSkills PRIME से जुड़े उम्मीदवारों में 41 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं 86 प्रतिशत से अधिक उम्मीदवार Tier-2 और Tier-3 शहरों से हैं। इससे छोटे शहरों के युवाओं तक डिजिटल स्किलिंग की पहुंच बढ़ने का संकेत मिलता है। 

🏔️ हिमालयी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर भी फोकस

उत्तर-पूर्वी और हिमालयी क्षेत्रों में 33,000 से अधिक उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण या एनरोलमेंट कराया है, जबकि 16,000 से ज्यादा उम्मीदवारों ने कोर्स पूरा कर प्रमाणपत्र हासिल किया है। 

इसके अलावा IndiaAI Mission के तहत Tier-2 और Tier-3 शहरों में AI प्रतिभा तैयार करने के लिए 27 IndiaAI Data and AI Labs स्थापित किए जा चुके हैं।

🎯 Future-Ready Workforce तैयार करना लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य AI, Cyber Security, Data Analytics, Cloud Computing और Semiconductor जैसी तकनीकों में युवाओं की क्षमता बढ़ाकर भारत की Future-Ready Digital Workforce तैयार करना है। FutureSkills PRIME के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में ₹137.17 करोड़ आवंटित किए गए हैं।





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भारत के IT एक्सपोर्ट को बड़ी रफ्तार, STP यूनिट्स ने FY26 में किया ₹7.73 लाख करोड़ निर्यात

8/14/2026 07:59:00 pm

 


भारत के IT एक्सपोर्ट को बड़ी रफ्तार, STP यूनिट्स ने FY26 में किया ₹7.73 लाख करोड़ का निर्यात

भारत के IT सेक्टर के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Software Technology Park (STP) Scheme के तहत पंजीकृत यूनिट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹7,73,898.97 करोड़ का निर्यात किया, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹6,88,194.11 करोड़ से काफी अधिक है। यह आंकड़ा अनुमानित है। 

📈 तीन साल में लगातार बढ़ा IT निर्यात

STP यूनिट्स के निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है—

  • 2023-24: ₹6,36,619.87 करोड़

  • 2024-25: ₹6,88,194.11 करोड़

  • 2025-26: ₹7,73,898.97 करोड़ (अनुमानित)

FY26 में STP यूनिट्स की संख्या बढ़कर 2,125 हो गई। इसी अवधि में इन यूनिट्स का कुल निवेश ₹7,362.86 करोड़ रहने का अनुमान है। 

🏆 कर्नाटक सबसे आगे

राज्यों में कर्नाटक STP निर्यात के मामले में सबसे आगे रहा। FY26 में कर्नाटक की STP यूनिट्स ने ₹3,50,184.78 करोड़ का निर्यात किया।

इसके बाद महाराष्ट्र ₹1,62,594.11 करोड़ और तेलंगाना ₹1,13,101.83 करोड़ के साथ प्रमुख राज्यों में रहे। 

💻 IT कंपनियों के लिए प्रक्रियाएं हुईं आसान

सरकार ने STPI के माध्यम से IT निर्यातकों के लिए कई प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बनाया है। SOFTEX फाइलिंग और मंजूरी को ऑनलाइन एवं ऑटोमेटेड किया गया है। STPI सिस्टम को RBI के Export Data Processing and Monitoring System (EDPMS) से भी जोड़ा गया है, जिससे निर्यात संबंधी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप से तेजी से साझा हो रही है। 

सरकार के अनुसार, इन पहलों का उद्देश्य भारत के सॉफ्टवेयर और IT-enabled services के निर्यात को बढ़ावा देना और Ease of Doing Business को मजबूत करना है। 


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स्वदेशी GARUD दूरबीन आम लोगों के लिए लॉन्च, 8x Zoom और हाई-रिजॉल्यूशन फीचर

8/14/2026 07:55:00 pm

 


IOL आम लोगों के लिए पेश हुई स्वदेशी हाई-रिजॉल्यूशन दूरबीन ‘GARUD’

भारत की स्वदेशी तकनीकी क्षमता को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) ने हाई-रिजॉल्यूशन वाली स्वदेशी दूरबीन ‘GARUD’ को अब आम लोगों के उपयोग के लिए सिविलियन बाजार में पेश किया है। इसे रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली भारतीय ऑप्टिकल तकनीक के अनुभव के आधार पर विकसित किया गया है। 

🔭 8 गुना आवर्धन और 7.6 डिग्री का विस्तृत दृश्य क्षेत्र

GARUD दूरबीन में 8 गुना आवर्धन (8x magnification) और 7.6 डिग्री का विस्तृत दृश्य क्षेत्र दिया गया है। इससे दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखने के साथ-साथ बड़े क्षेत्र पर नजर रखना भी संभव होगा। 

दूरबीन में अलग-अलग उपयोगकर्ताओं की दृष्टि के अनुसार ±5 डायोप्टर एडजस्टमेंट की सुविधा है। लंबे समय तक देखने में सुविधा के लिए सॉफ्ट-टच आईकप और बेहतर पकड़ के लिए ग्रिप भी दी गई है।

🌧️ मौसमरोधी डिजाइन

GARUD को विभिन्न बाहरी परिस्थितियों में इस्तेमाल करने के लिए मौसमरोधी बनाया गया है। इसका वजन लगभग 610 ग्राम है, जिससे इसे आसानी से साथ ले जाया जा सकता है।

यह दूरबीन बर्ड वॉचिंग, वन्यजीव अवलोकन, प्रकृति दर्शन, यात्रा, खेल, वानिकी, समुद्री गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी कार्यों में उपयोगी हो सकती है।

🇮🇳 रक्षा तकनीक अब आम लोगों तक

GARUD उस दूरबीन प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिसका उपयोग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए किया गया है। अब इसी अनुभव और तकनीकी क्षमता को आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

इस स्वदेशी दूरबीन को 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के DPSU भवन में आम लोगों के लिए प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में रक्षा उत्पादन विभाग सहित विभिन्न सरकारी संस्थानों और इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड रक्षा उत्पादन विभाग के तहत आने वाली मिनी रत्न श्रेणी-I की रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। GARUD को ऑर्डनेंस फैक्ट्री देहरादून द्वारा विकसित और निर्मित किया गया है।

1943 से सटीक ऑप्टिकल निर्माण के क्षेत्र में अनुभव रखने वाली कंपनी ने रक्षा क्षेत्र की अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक को इस उत्पाद में शामिल किया है। 

GARUD का आम लोगों के लिए बाजार में आना भारत की स्वदेशी ऑप्टिकल तकनीक को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




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राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस पर दाड़लाघाट कॉलेज में विविध गतिविधियां

8/14/2026 07:01:00 pm

 


राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस पर राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट में विविध गतिविधियां

राजकीय महाविद्यालय दाड़लाघाट में 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को यह दिवस मनाया जाता है।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पठन-पाठन की संस्कृति विकसित करना, पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाना तथा पुस्तकालय के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा। इस अवसर पर बुकमार्क निर्माण, पोस्टर निर्माण और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भाषण प्रतियोगिता में इशिता, पोस्टर निर्माण में सारिका तथा बुकमार्क निर्माण में नेहा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन हीना शर्मा ने किया।



विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों की पुस्तकों से परिचित करवाने और उनमें पढ़ने की रुचि विकसित करने के उद्देश्य से पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण “One Person, One Book Donation” पहल रही, जिसके तहत महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों ने पुस्तकालय के लिए एक-एक पुस्तक दान की। इस पहल का उद्देश्य पुस्तकालय के संग्रह को समृद्ध करना और विद्यार्थियों को विविध विषयों की उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकें उपलब्ध करवाना रहा।

इस अवसर पर असिस्टेंट लाइब्रेरियन श्रीमती लता ने डॉ. एस. आर. रंगनाथन के पुस्तकालय एवं पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करने और पुस्तकों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।



महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रुचि रमेश ने राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस पर विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान, चिंतन और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ने और पुस्तकालय में उपलब्ध सुविधाओं का सदुपयोग करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को पठन, ज्ञान-साझाकरण और पुस्तकालय के सदुपयोग का संदेश दिया गया। महाविद्यालय में आयोजित इन गतिविधियों ने पठन संस्कृति को बढ़ावा देने तथा पुस्तकालय को ज्ञान के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



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