Census 2027: जनगणना के लिए 40 सवालों वाली Household Questionnaire अधिसूचित

8/14/2026 03:22:00 pm

 


Census 2027: जनगणना के लिए 40 सवालों वाली Household Questionnaire अधिसूचित

भारत में होने वाली जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। गृह मंत्रालय के अधीन Registrar General of India (RGI) के कार्यालय ने Census 2027 के लिए Household Schedule Questionnaire को अधिसूचित कर दिया है। इसमें कुल 40 सवाल शामिल किए गए हैं। 

नई प्रश्नावली में परिवार और घर से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इसमें माता-पिता का विवरण, आधार संख्या, मोबाइल नंबर, परिवार के कुल बैंक खातों की संख्या, कार्यस्थल तक यात्रा, धर्म और जाति जैसे विषय शामिल हैं। 

सरकार के अनुसार जनगणना देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ा महत्वपूर्ण आंकड़ा उपलब्ध कराती है। इन आंकड़ों का उपयोग आने वाले दशक के लिए विकास योजनाओं और नीतियों के निर्माण में किया जाता है।

भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसके बाद अब Census 2027 देश की जनसंख्या और परिवारों से संबंधित अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।




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73% छात्र उच्च माध्यमिक शिक्षा से पहले छोड़ देते हैं पढ़ाई, संसदीय समिति की चिंता

8/14/2026 12:54:00 pm

 


उच्च माध्यमिक स्तर तक पहुंचने से पहले 73% छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं, संसदीय समिति ने जताई चिंता

नई दिल्ली: देश में स्कूली शिक्षा को लेकर एक संसदीय समिति ने गंभीर चिंता जताई है। समिति के अनुसार, सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 73 प्रतिशत छात्र उच्च माध्यमिक स्तर की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं। यह जानकारी 2024-25 के UDISE आंकड़ों के आधार पर सामने आई है।

प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक घटती जाती है छात्रों की संख्या

समिति ने पाया कि देश में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या शिक्षा के उच्च स्तरों पर पहुंचने के साथ लगातार कम होती जाती है।

2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, देश में 10,92,671 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल थे। इनमें 9,11,032 प्राथमिक, 4,12,805 उच्च प्राथमिक, 1,61,808 माध्यमिक और केवल 90,866 उच्च माध्यमिक स्कूल थे। 

छात्रों की संख्या में भी इसी तरह बड़ी गिरावट देखी गई। प्राथमिक स्तर पर 6.18 करोड़ से अधिक छात्र थे, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर करीब 4.09 करोड़, माध्यमिक स्तर पर 2.36 करोड़ और उच्च माध्यमिक स्तर पर लगभग 1.64 करोड़ छात्र रह गए। 

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल बढ़ाने की सिफारिश

संसदीय समिति ने शिक्षा मंत्रालय से प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जरूरत के अनुसार पूर्ण उच्च माध्यमिक स्कूलों में अपग्रेड करने को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है।

समिति का कहना है कि छात्रों के लिए उनके समुदाय और घर के आसपास माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होना जरूरी है। इससे स्कूल छोड़ने की समस्या को कम करने और विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। 

दिव्यांग छात्रों के लिए भी सुविधाओं की कमी

समिति ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए स्कूलों में सुविधाओं की कमी पर भी चिंता जताई है।

UDISE+ 2024-25 के अनुसार, देश के 14,71,437 स्कूलों में केवल 5,23,143 स्कूलों में CwSN अनुकूल शौचालय और 8,08,466 स्कूलों में रैंप के साथ हैंडरेल उपलब्ध थे। समिति ने इसे गंभीर बुनियादी ढांचा अंतर बताया। (

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी कार्रवाई की अपील

शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में होने के कारण स्कूल शिक्षा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। समिति ने केंद्र से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिक संख्या में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है।

समिति का मानना है कि स्कूलों की उपलब्धता बढ़ाने, बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने और विशेष जरूरत वाले छात्रों के लिए समावेशी वातावरण तैयार करने से शिक्षा में छात्रों की निरंतरता बेहतर हो सकती है।


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गुजरात में 4.72 लाख छात्रों को ₹646 करोड़ की शैक्षिक सहायता, बेटियों को बड़ी मदद

8/14/2026 12:48:00 pm

 


गुजरात में 4.72 लाख से अधिक छात्रों को 646 करोड़ रुपये की शैक्षिक सहायता, बेटियों को बड़ी मदद

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने 4.72 लाख से अधिक छात्रों को स्कॉलरशिप और अन्य शैक्षिक सहायता के रूप में 646 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वितरित की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर स्थित स्वर्णिम संकुल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे आर्थिक सहायता भेजी।

सरकार के अनुसार, कुल 4,72,260 से अधिक विद्यार्थियों को इस सहायता का लाभ मिला। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उन छात्राओं को मिला, जिन्होंने नमो लक्ष्मी योजना के तहत 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास की है।

4 लाख से ज्यादा बेटियों को नमो लक्ष्मी योजना का लाभ

नमो लक्ष्मी योजना के तहत 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास करने वाली 4 लाख से अधिक छात्राओं को 513 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी गई। योजना का उद्देश्य छात्राओं को आर्थिक सहयोग देकर उनकी आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

विज्ञान की पढ़ाई के लिए नमो सरस्वती योजना

नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना के तहत 12वीं कक्षा की साइंस स्ट्रीम की परीक्षा पास करने वाले 57 हजार से अधिक छात्रों को करीब 28 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। इससे विद्यार्थियों को विज्ञान और उच्च शिक्षा की ओर आगे बढ़ने में आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है।

उच्च शिक्षा के लिए भी आर्थिक मदद

विभिन्न छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा सहायता योजनाओं के तहत 105 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इनमें 7,260 छात्रों को मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना, शोध से जुड़ी योजनाओं, मुख्यमंत्री श्री छात्रवृत्ति योजना और मुख्यमंत्री कन्या केलवणी निधि योजना जैसी योजनाओं के तहत करीब 96 करोड़ रुपये दिए गए। इसके अलावा 48 संस्थानों को अनुदान के रूप में 9 करोड़ रुपये प्रदान किए गए।

शिक्षा को विकास का आधार बताया

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि शिक्षा गुजरात के विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने शिक्षकों और समाज से मिलकर विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर लगातार ध्यान दे रही है।

पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल वापस लाने की पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए अभियान शुरू किया है, जिन्होंने किसी कारण से पढ़ाई छोड़ दी है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाना है।


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सोना-चांदी दबाव में, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कीमतों में 1% तक गिरावट

8/14/2026 12:46:00 pm

 


अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी दबाव में, कीमतों में 1% तक गिरावट

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना रहा और कीमतों में 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

सोने की कीमतों में गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा भाव में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें कमजोर हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक बाजारों में बदलते रुझान ने सोने पर दबाव बढ़ाया।

चांदी भी फिसली

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 0.9 प्रतिशत नीचे कारोबार करती दिखी। हालिया तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली को कीमतों में कमजोरी की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर असर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव बढ़ाने और नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर दिए गए बयानों से निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव आम तौर पर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन देता है, लेकिन इस समय मुनाफावसूली, डॉलर की चाल और ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।

आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना

विशेषज्ञों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। इन घटनाक्रमों के आधार पर आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।


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एशियाई बाजारों में तेजी, यूरोपीय बाजारों में मिला-जुला रुख

8/14/2026 12:44:00 pm

 


एशियाई बाजारों में तेजी, यूरोपीय बाजारों में मिला-जुला रुख

नई दिल्ली: वैश्विक शेयर बाजारों में कारोबार के दौरान एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिली, जबकि यूरोपीय बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 3.6 प्रतिशत चढ़ा, जबकि जापान का निक्केई 225 करीब 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।

यूरोपीय बाजारों में मिला-जुला कारोबार

प्रमुख यूरोपीय सूचकांकों में जर्मनी का DAX करीब 0.4 प्रतिशत ऊपर रहा। वहीं, लंदन का FTSE 100 करीब 0.3 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। इससे यूरोपीय बाजारों में निवेशकों के बीच मिश्रित रुझान का संकेत मिला।

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देश की वास्तविक GDP में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। यह जनवरी से मार्च तिमाही में दर्ज 0.6 प्रतिशत की वृद्धि से कम है।

वहीं जून महीने में ब्रिटेन की GDP में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मई में अर्थव्यवस्था की वृद्धि शून्य रही थी। ये आंकड़े ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी किए गए हैं।

निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर

एशियाई बाजारों में तेजी के बीच निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों पर बनी हुई है। ब्याज दरों और आर्थिक विकास से जुड़े संकेत आने वाले दिनों में शेयर बाजारों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।


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