73% छात्र उच्च माध्यमिक शिक्षा से पहले छोड़ देते हैं पढ़ाई, संसदीय समिति की चिंता

 


उच्च माध्यमिक स्तर तक पहुंचने से पहले 73% छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं, संसदीय समिति ने जताई चिंता

नई दिल्ली: देश में स्कूली शिक्षा को लेकर एक संसदीय समिति ने गंभीर चिंता जताई है। समिति के अनुसार, सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 73 प्रतिशत छात्र उच्च माध्यमिक स्तर की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं। यह जानकारी 2024-25 के UDISE आंकड़ों के आधार पर सामने आई है।

प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक घटती जाती है छात्रों की संख्या

समिति ने पाया कि देश में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या शिक्षा के उच्च स्तरों पर पहुंचने के साथ लगातार कम होती जाती है।

2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, देश में 10,92,671 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल थे। इनमें 9,11,032 प्राथमिक, 4,12,805 उच्च प्राथमिक, 1,61,808 माध्यमिक और केवल 90,866 उच्च माध्यमिक स्कूल थे। 

छात्रों की संख्या में भी इसी तरह बड़ी गिरावट देखी गई। प्राथमिक स्तर पर 6.18 करोड़ से अधिक छात्र थे, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर करीब 4.09 करोड़, माध्यमिक स्तर पर 2.36 करोड़ और उच्च माध्यमिक स्तर पर लगभग 1.64 करोड़ छात्र रह गए। 

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल बढ़ाने की सिफारिश

संसदीय समिति ने शिक्षा मंत्रालय से प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जरूरत के अनुसार पूर्ण उच्च माध्यमिक स्कूलों में अपग्रेड करने को प्राथमिकता देने की सिफारिश की है।

समिति का कहना है कि छात्रों के लिए उनके समुदाय और घर के आसपास माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होना जरूरी है। इससे स्कूल छोड़ने की समस्या को कम करने और विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। 

दिव्यांग छात्रों के लिए भी सुविधाओं की कमी

समिति ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के लिए स्कूलों में सुविधाओं की कमी पर भी चिंता जताई है।

UDISE+ 2024-25 के अनुसार, देश के 14,71,437 स्कूलों में केवल 5,23,143 स्कूलों में CwSN अनुकूल शौचालय और 8,08,466 स्कूलों में रैंप के साथ हैंडरेल उपलब्ध थे। समिति ने इसे गंभीर बुनियादी ढांचा अंतर बताया। (

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी कार्रवाई की अपील

शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में होने के कारण स्कूल शिक्षा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। समिति ने केंद्र से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिक संख्या में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है।

समिति का मानना है कि स्कूलों की उपलब्धता बढ़ाने, बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने और विशेष जरूरत वाले छात्रों के लिए समावेशी वातावरण तैयार करने से शिक्षा में छात्रों की निरंतरता बेहतर हो सकती है।


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