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चीनी महंगी होने की असली वजह क्या? एथेनॉल नहीं, ये हैं कीमत बढ़ने के बड़े कारण

 



नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में बाजार में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं और इसके लिए एथेनॉल उत्पादन को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि चीनी की महंगाई के पीछे सिर्फ एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानना पूरी तस्वीर नहीं है।

चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू उत्पादन में कमी और उपलब्ध स्टॉक पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है।

सरकार के ताजा अनुमान के मुताबिक मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों से शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन का था। यानी उत्पादन अनुमान में लगभग 11 फीसदी की कमी आई है।

मौसम की स्थिति और गन्ने की फसल को हुए नुकसान ने भी उत्पादन पर असर डाला है। उत्तर प्रदेश में रेड रॉट बीमारी और टॉप शूट बोरर जैसे कीटों से फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है।

क्या एथेनॉल बनाने से चीनी कम हो गई?

यह सवाल इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है। सरकार का कहना है कि चीनी की मौजूदा महंगाई को सीधे एथेनॉल डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच तेल कंपनियों को करीब 810.67 करोड़ लीटर एथेनॉल दिया गया। इसमें गन्ने से बने एथेनॉल की मात्रा करीब 259.24 करोड़ लीटर, यानी लगभग 32 फीसदी थी। बाकी करीब 68 फीसदी एथेनॉल अनाज से आया।

इसमें मक्के, FCI के चावल तथा टूटे या खराब अनाज से बना एथेनॉल भी शामिल है। इसलिए यह कहना कि बाजार में उपलब्ध चीनी की बड़ी मात्रा एथेनॉल बनाने में चली गई और इसी वजह से चीनी महंगी हुई, आंकड़ों के आधार पर पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।

फिर अचानक इतनी तेजी कैसे आई?

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे बाजार की मनोवृत्ति ने भी भूमिका निभाई है।

जब लोगों और कारोबारियों को लगा कि अगले सीजन में गन्ने और चीनी का उत्पादन कम हो सकता है, तो कई खरीदारों ने पहले से ज्यादा चीनी खरीदनी शुरू कर दी। कुछ मिलों ने भी भविष्य में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में बिक्री धीमी कर दी।

इससे बाजार में उपलब्ध चीनी पर दबाव बढ़ा और कीमतों में तेजी देखने को मिली। यानी कम उत्पादन + भविष्य में कमी की आशंका + ज्यादा खरीदारी + स्टॉक रखने की प्रवृत्ति ने मिलकर कीमतों को ऊपर धकेला।

त्योहारी सीजन ने बढ़ाई चिंता

अगस्त से नवंबर के बीच भारत में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है।

इसी वजह से बाजार में पहले से ही चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठा रही है।

सरकार ने उठाए कई कदम

चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

भारत ने हाल ही में 10 लाख टन कच्ची चीनी को ड्यूटी-फ्री आयात करने की अनुमति दी है। यह कदम घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

इसके अलावा थोक खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी लागू की गई है। 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक खपत वाले बड़े उपभोक्ताओं को 15 दिनों की जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

आम आदमी के लिए क्या समझना जरूरी है?

चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। फिलहाल तस्वीर यह बताती है कि कम चीनी उत्पादन, मौसम से फसल को नुकसान, घटता स्टॉक, त्योहारी मांग और बाजार में भविष्य की कमी की आशंका कीमतों पर दबाव बना रहे हैं।

एथेनॉल नीति का चीनी उद्योग पर प्रभाव जरूर है, लेकिन मौजूदा तेजी को केवल एथेनॉल उत्पादन के कारण बताना उपलब्ध आंकड़ों के अनुरूप नहीं है। सरकार ने भी इसी बात पर जोर दिया है कि मौजूदा कीमत वृद्धि का मुख्य कारण उत्पादन में कमी और बाजार की परिस्थितियां हैं।

SBR News निष्कर्ष:
चीनी की बढ़ती कीमतों की कहानी को समझने के लिए एथेनॉल को अकेला दोषी मानना सही नहीं होगा। खेत में कम उत्पादन से लेकर बाजार में बढ़ी खरीदारी और आने वाले त्योहारों की मांग तक कई कड़ियां मिलकर मौजूदा स्थिति बना रही हैं।

नोट: कमोडिटी कीमतें और सरकारी नीतियां तेजी से बदल सकती हैं। यह खबर उपलब्ध ताजा रिपोर्टों और सरकारी/बाजार संबंधी आंकड़ों पर आधारित है।

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