नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की गतिविधियों को लेकर केंद्र सरकार से पांच सवाल पूछे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीमा की वास्तविक स्थिति पर देश को स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
ओवैसी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने उन क्षेत्रों में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को रोका है, जहां पहले नियमित गश्त होती थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भारतीय जवानों की ओर से बनाए गए किसी अस्थायी ढांचे को चीनी सैनिकों ने नष्ट किया है।
ओवैसी ने सरकार से पूछे 5 सवाल
ओवैसी के सवालों में यह भी शामिल है कि क्या चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में टेंट लगाए हैं और क्या वहां पहले भारतीय सेना की पेट्रोलिंग होती थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या अगले महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले सरकार सीमा पर स्थिति को सामान्य दिखाने के लिए सेना पर दबाव डाल रही है।
उन्होंने डोकलाम और लद्दाख के पुराने सीमा विवादों का हवाला देते हुए यह भी पूछा कि क्या सरकार अरुणाचल प्रदेश की स्थिति के बारे में देश की जनता को पूरी जानकारी नहीं दे रही है।
सरकार ने चीनी घुसपैठ के दावों को बताया निराधार
भारत-चीन सीमा को लेकर सामने आए दावों के बीच सरकारी पक्ष से चीन की ओर से किसी नए अतिक्रमण की पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश में चीनी गतिविधियों से जुड़ी कुछ रिपोर्टों को भारतीय रक्षा अधिकारियों ने अप्रमाणित और अपुष्ट बताया था।
भारत सरकार का कहना है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक माध्यमों से बातचीत जारी रखने पर भी जोर दिया गया है।
शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे का मुद्दा
ओवैसी ने अपने सवालों को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से भी जोड़ा है। भारत में सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है, जिसमें चीन के शामिल होने की संभावना है। इसी पृष्ठभूमि में सीमा सुरक्षा और भारत-चीन संबंधों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है।
ओवैसी ने कहा कि सरकारें और प्रधानमंत्री बदलते रहते हैं, लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र से सीमा की वास्तविक स्थिति पर देश को भरोसे में लेने की मांग की है।
महत्वपूर्ण: अरुणाचल सीमा पर चीनी गतिविधियों को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए हैं, लेकिन चीनी अतिक्रमण के इन दावों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे आरोप और राजनीतिक सवालों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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