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Himachal News: 27 साल बाद लौटेगी लॉटरी, दिवाली से शुरू हो सकती है नई व्यवस्था

 


27 साल बाद हिमाचल में लौटेगी लॉटरी, दिवाली से शुरू हो सकती है नई व्यवस्था; सरकार को ₹50 करोड़ सालाना आय की उम्मीद

शिमला: आर्थिक दबाव से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में करीब 27 साल बाद राज्य लॉटरी फिर शुरू होने जा रही है। सरकार ने पेपर के साथ ऑनलाइन लॉटरी व्यवस्था शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य इस व्यवस्था से हर साल करीब ₹50 करोड़ का राजस्व जुटाना है।

हिमाचल प्रदेश सरकार के कोष, लेखा एवं लॉटरी विभाग ने पेपर और ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के लिए Sole Selling Agent नियुक्त करने को ई-टेंडर जारी किया है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 21 अगस्त को इस संबंध में टेंडर जारी होने की सूचना दर्ज है।

दिवाली से शुरू करने की तैयारी

सरकार की योजना है कि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होने पर दिवाली 2026 के आसपास नई लॉटरी व्यवस्था शुरू की जाए। इसके तहत पारंपरिक टिकट बिक्री के साथ डिजिटल माध्यम से भी टिकट खरीदने की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है।

नई व्यवस्था में नियमित ड्रॉ के अलावा त्योहारों और विशेष अवसरों पर बंपर ड्रॉ भी आयोजित किए जाएंगे। मौजूदा टेंडर की शर्तों के अनुसार एक दिन में अधिकतम 12 ड्रॉ और साल में तीन बंपर ड्रॉ आयोजित किए जा सकते हैं।

सरकार को हर साल ₹50 करोड़ राजस्व की उम्मीद

हिमाचल सरकार आर्थिक संसाधन बढ़ाने के लिए लॉटरी को राजस्व के एक नए स्रोत के रूप में देख रही है। राज्य पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज होने के बीच सरकार का अनुमान है कि लॉटरी से सालाना करीब ₹50 करोड़ की आय हो सकती है।

टेंडर की शर्तों के अनुसार चयनित एजेंट को सरकार को ₹10 करोड़ का वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना होगा, जिसमें हर साल 5 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान है। इसके अलावा न्यूनतम गारंटीड अमाउंट ₹6 करोड़ प्रति वर्ष रखा गया है।

ऑनलाइन सिस्टम में होगी सख्त निगरानी

नई लॉटरी व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी निगरानी पर जोर दिया गया है। ऑनलाइन सिस्टम में केंद्रीय सर्वर, मिरर सर्वर, क्यूआर या बारकोड आधारित टिकट पहचान और प्रत्येक टिकट के पूर्व पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी।

चयनित एजेंट को संचालन के लिए एक Special Purpose Vehicle (SPV) बनाना होगा। बिक्री, वितरण, डिजिटल भुगतान, रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था होगी।

1999 में लगाया गया था प्रतिबंध

हिमाचल प्रदेश में लॉटरी पर वर्ष 1999 में प्रतिबंध लगाया गया था। तत्कालीन सरकार ने सामाजिक नुकसान, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी जैसी शिकायतों को देखते हुए लॉटरी को बंद किया था। अब करीब 27 साल बाद राज्य सरकार ने इसे दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है।

सरकार ने देश के कुछ अन्य राज्यों में लॉटरी से होने वाली आय का हवाला देते हुए इसे राजस्व बढ़ाने का माध्यम बताया है। हालांकि, लॉटरी दोबारा शुरू करने के फैसले को लेकर सामाजिक प्रभाव और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ने वाले असर को लेकर बहस भी शुरू हो गई है।

क्या है नई लॉटरी व्यवस्था?

  • 27 साल बाद हिमाचल में लॉटरी की वापसी

  • पेपर और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से बिक्री की तैयारी

  • दिवाली 2026 के आसपास शुरुआत का लक्ष्य

  • एक दिन में अधिकतम 12 ड्रॉ

  • साल में तीन बंपर ड्रॉ

  • सरकार को करीब ₹50 करोड़ सालाना राजस्व की उम्मीद

  • चयनित एजेंट के लिए ₹10 करोड़ वार्षिक लाइसेंस फीस

  • ऑनलाइन सिस्टम में डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी

  • 1999 में राज्य में लॉटरी पर लगाया गया था प्रतिबंध

SBR News की अपील: लॉटरी से जुड़े किसी भी टिकट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले केवल सरकार द्वारा अधिकृत व्यवस्था की जानकारी और नियमों की पुष्टि करें।



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