हिमाचल को बड़ी राहत की उम्मीद: ₹4,200 करोड़ के BBMB बकाये पर केंद्र ने सुझाया कैशलेस सेटलमेंट

 




हिमाचल को बड़ी राहत की उम्मीद: ₹4,200 करोड़ के BBMB बकाये पर केंद्र ने सुझाया कैशलेस सेटलमेंट

शिमला: हिमाचल प्रदेश के लिए करीब छह दशक पुराने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के बकाये का विवाद अब समाधान की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस विवाद को कैशलेस सेटलमेंट के जरिए सुलझाने का प्रस्ताव रखा है। हिमाचल प्रदेश करीब ₹4,200 करोड़ के बकाये का दावा कर रहा है।

बिजली के रूप में हो सकता है भुगतान

केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार पंजाब और हरियाणा हिमाचल को नकद राशि देने के बजाय बिजली के रूप में बकाये का भुगतान कर सकते हैं। प्रस्ताव में करीब 13,066 मिलियन यूनिट (MU) बिजली के पुराने बकाये का निपटारा ऊर्जा के रूप में करने की बात कही गई है।

इस व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा को लगभग ₹420 करोड़ की अपनी देनदारी अलग से चुकाने की जरूरत नहीं होगी। इस राशि को बिजली के बकाये में समायोजित करने का प्रस्ताव है।

1966 से चला आ रहा है विवाद

यह विवाद पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के बाद से चला आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में हिमाचल प्रदेश के BBMB परियोजनाओं से मिलने वाले बिजली हिस्से को 7.19 प्रतिशत माना था। इसके बावजूद पुराने बकाये के भुगतान को लेकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के बीच विवाद बना रहा।

BBMB की बिजली में हिमाचल को नवंबर 2011 के बाद से उसका निर्धारित हिस्सा मिलता रहा है, लेकिन उससे पहले की अवधि के बकाये को लेकर मामला लंबे समय से लंबित है।

पंजाब ने प्रस्ताव पर जताई आपत्ति

केंद्र के कैशलेस फॉर्मूले पर हिमाचल और हरियाणा ने सिद्धांततः सहमति जताई है, जबकि पंजाब ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। पंजाब की ओर से बिजली की दर को लेकर असहमति व्यक्त की गई है।

पंजाब सरकार का कहना है कि प्रस्तावित ₹2.50 प्रति यूनिट की दर उसके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

12 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि आपसी सहमति से समाधान नहीं निकलता, तो वह मामले को कानूनी आधार पर तय कर सकती है।

हिमाचल के लिए क्यों अहम है यह मामला?

यदि केंद्र का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो हिमाचल प्रदेश को लंबे समय से लंबित अपने BBMB बकाये का बड़ा हिस्सा ऊर्जा के रूप में प्राप्त हो सकता है। इससे राज्य के लिए आर्थिक संसाधनों और बिजली उपलब्धता के लिहाज से महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है।

करीब 60 वर्षों से चले आ रहे इस विवाद में अब केंद्र के प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के कारण समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

नोट: अंतिम समझौता और भुगतान की वास्तविक व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश तथा संबंधित राज्यों की सहमति पर निर्भर करेगी।



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