BBMB एरियर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित, हिमाचल के ₹4,200 करोड़ बकाये पर टिकी नजर
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| BBMB एरियर पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित |
शिमला, 24 अगस्त 2026: भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के हिस्से से जुड़े करीब ₹4,200 करोड़ के बकाये के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अंतिम सुनवाई के दौरान पंजाब ने बकाये के भुगतान के लिए प्रस्तावित दरों पर आपत्ति जताई, जबकि हरियाणा ने केंद्र के समाधान प्रस्ताव पर सहमति जताई।
7.19 फीसदी हिस्सेदारी से जुड़ा है मामला
यह विवाद हिमाचल प्रदेश के BBMB परियोजनाओं में 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्से से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में हिमाचल की इस हिस्सेदारी को मान्यता दी थी। इसके तहत भाखड़ा परियोजना में हिस्सा नवंबर 1966 से, डैहर परियोजना में नवंबर 1977 से और पौंग डैम परियोजना में जनवरी 1978 से देय माना गया था।
हिमाचल के अनुसार, 2011 के बाद राज्य को उसका 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सा मिल रहा है, लेकिन उससे पहले की अवधि का करीब 13,066 मिलियन यूनिट बिजली का बकाया अब तक पूरी तरह नहीं मिला है। इसी बकाये का वित्तीय मूल्य लगभग ₹4,200 करोड़ बताया जा रहा है।
नकद की जगह बिजली से भुगतान का प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने इस विवाद के समाधान के लिए कैशलेस सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत पंजाब और हरियाणा से हिमाचल को सीधे बड़ी नकद राशि देने के बजाय बकाये का निपटारा बिजली के रूप में करने की योजना है।
प्रस्ताव में 13,066 मिलियन यूनिट के बकाये में से 12,000 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली के रूप में भुगतान करने की बात कही गई है। पंजाब और हरियाणा की हिमाचल के प्रति करीब ₹420 करोड़ की पूंजीगत लागत की देनदारी को भी बकाया बिजली में समायोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
पंजाब ने दर पर जताई आपत्ति
30 जुलाई की सुनवाई में हिमाचल और हरियाणा ने केंद्र के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति जताई थी, लेकिन पंजाब ने प्रस्तावित ₹2.50 प्रति यूनिट की दर पर आपत्ति दर्ज की थी। पंजाब का तर्क था कि इस दर से राज्य पर करीब ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद पंजाब को अपना स्पष्ट रुख रखने का समय दिया था।
अब 24 अगस्त की सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। फैसले से यह स्पष्ट होगा कि हिमाचल के लंबे समय से लंबित BBMB बिजली बकाये का अंतिम निपटारा किस तरीके से होगा।
हिमाचल के लिए क्यों अहम है फैसला?
करीब ₹4,200 करोड़ की यह देनदारी हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा है। राज्य सरकार लगातार सुप्रीम कोर्ट के 2011 के फैसले के आधार पर अपने 7.19 प्रतिशत हिस्से और उससे जुड़े पुराने लाभ की मांग कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी कई बार इस बकाये को राज्य का अधिकार बताते हुए इसे हासिल करने की बात कह चुके हैं।
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