प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और इंडोनेशिया आतंकवाद के ख़िलाफ़ एक जैसी मज़बूत प्रतिबद्धता रखते हैं। पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के दौरान समर्थन के लिए इंडोनेशिया के नेतृत्व का धन्यवाद किया। इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने तेज़ी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में UN सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधारों की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
इंडोनेशिया की संसद (कोम्प्लेक्स पार्लेमेन रिपब्लिक इंडोनेशिया) के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत और इंडोनेशिया का नज़रिया हमेशा एक जैसा और स्पष्ट रहा है। पिछले साल पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के समय इंडोनेशिया मजबूती से भारत के साथ खड़ा रहा। मैं राष्ट्रपति प्राबोवो और आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ।”
उन्होंने कहा कि दोनों देश ‘जॉइंट वर्किंग ग्रुप’ मैकेनिज्म के ज़रिए आतंकवाद का मुक़ाबला करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा, “इंटेलिजेंस, साइबर खतरों, टेरर फंडिंग और डी-रेडिकलाइज़ेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर हम दुनिया में शांति चाहने वाली ताकतों को मज़बूत कर सकते हैं।” उन्होंने एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और इस क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के महत्व पर ज़ोर दिया।
आज के दौर में वैश्विक व्यवस्था में तेज़ी से हो रहे बदलावों का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया जैसे देश बराबरी की भागीदारी और अहम भूमिका चाहते हैं। उन्होंने कहा, “इस वैश्विक परिदृश्य में, भारत का दृढ़ विश्वास है कि UNSC में सुधार में अब और देरी नहीं की जा सकती।”
अपनी बात रखते हुए उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी पर ज़ोर दिया और कहा, “हमारे दोनों देशों को लगभग एक ही समय पर आज़ादी मिली: इंडोनेशिया को 1945 में और भारत को 1947 में।” पीएम मोदी ने कहा कि जब स्वतंत्र राष्ट्रों के तौर पर संप्रभुता की बात आई, तो भारत संयुक्त राष्ट्र में इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन के समर्थन में एक मज़बूत आवाज़ बनकर उभरा।
प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के तीन दिन के दौरे पर हैं। वह सोमवार को जकार्ता पहुंचे। आज मंगलवार को उन्होंने राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ बातचीत की और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के सभी पहलुओं की समीक्षा की। इस साझेदारी में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, समुद्री सहयोग, डिजिटल और वित्तीय तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ पृथ्वी (rare earths), संस्कृति, पर्यटन, कृषि और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे विषय शामिल हैं। (इनपुट-एएनआई)
Reviewed by SBR
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7/07/2026 07:27:00 PM
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