1947 Partition: जब भारतीय सेना भी बंट गई, जानिए कैसे हुआ फौज का विभाजन
15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का गौरवपूर्ण दिन है, लेकिन आजादी के साथ देश ने विभाजन का गहरा दर्द भी झेला। भारत और पाकिस्तान के निर्माण के साथ केवल जमीन, प्रशासन और संसाधनों का ही बंटवारा नहीं हुआ, बल्कि British Indian Army को भी दो हिस्सों में विभाजित करना पड़ा।
यह प्रक्रिया बेहद जटिल थी। उन सैनिकों को अलग-अलग सेनाओं में जाना पड़ा, जो वर्षों से एक ही बैरक में रहते, साथ प्रशिक्षण लेते और युद्ध के मैदान में एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ते थे।
सेना के बंटवारे की शुरुआत
जून 1947 में भारत के विभाजन का फैसला होने के बाद सशस्त्र बलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। फील्ड मार्शल सर क्लॉड ऑचिनलेक के नेतृत्व में सैन्य पुनर्गठन का काम आगे बढ़ाया गया। भारत और पाकिस्तान के लिए सेना, हथियार, सैन्य प्रतिष्ठान और अन्य संसाधनों के बंटवारे की विस्तृत योजना तैयार की गई।
सैन्य संसाधनों को broadly लगभग 2:1 के अनुपात में बांटने की व्यवस्था की गई, हालांकि अलग-अलग सैन्य शाखाओं और संपत्तियों में वास्तविक वितरण परिस्थितियों के अनुसार अलग रहा।
सैनिकों को कैसे बांटा गया?
सबसे कठिन काम सैनिकों और रेजिमेंटों का पुनर्गठन था। कुछ रेजिमेंटों की भर्ती संरचना ऐसी थी जिसमें किसी विशेष क्षेत्र, समुदाय या वर्ग के सैनिकों की बड़ी संख्या होती थी। वहीं कई यूनिटों में विभिन्न समुदायों के सैनिक साथ सेवा करते थे।
ऐसे मामलों में सैनिकों को विकल्प दिया गया कि वे भारत या पाकिस्तान में से किस सेना में सेवा जारी रखना चाहते हैं। इसके बाद यूनिटों और सैनिकों का पुनर्गठन किया गया।
इस प्रक्रिया में कई सैनिकों और अधिकारियों को अपने पुराने साथियों से अलग होना पड़ा। एक ही रेजिमेंट में साथ सेवा करने वाले लोगों के रास्ते अलग हो गए।
सैम मानेकशॉ और मोहम्मद उस्मान की मिसाल
विभाजन के दौर की सबसे चर्चित सैन्य कहानियों में सैम मानेकशॉ और ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
सैम मानेकशॉ ने विभाजन के बाद भारत में सेवा जारी रखी और आगे चलकर भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल बने।
वहीं ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान ने भारत के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उन्होंने नौशेरा की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जुलाई 1948 में वीरगति प्राप्त की। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
गोरखा सैनिकों का अलग मामला
गोरखा सैनिकों का मामला भी विशेष था। भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के बाद गोरखा रेजिमेंटों का पुनर्गठन किया गया।
भारतीय सेना को छह गोरखा रेजिमेंट मिलीं, जबकि कुछ अन्य गोरखा रेजिमेंट ब्रिटिश सेना का हिस्सा बनीं। इस प्रकार गोरखा सैनिकों की पुरानी सैन्य परंपरा विभाजन के बाद भी अलग-अलग सेनाओं में जारी रही।
हथियार और सैन्य सामान भी बांटा गया
बंटवारा केवल सैनिकों तक सीमित नहीं था। हथियार, वाहन, तोपें, सैन्य उपकरण, गोला-बारूद, वर्दियां, जूते, चिकित्सा सामग्री और दूसरे सैन्य सामान का भी हिसाब लगाया गया।
पाकिस्तान को मिलने वाले कई सैन्य संसाधनों को रेल और अन्य माध्यमों से नए देश तक पहुंचाया जाना था। लेकिन विभाजन के दौरान पंजाब और दूसरे इलाकों में भड़की हिंसा ने इस प्रक्रिया को बेहद मुश्किल बना दिया।
नौसेना और वायुसेना का पुनर्गठन
थल सेना के साथ-साथ Royal Indian Navy और Royal Indian Air Force का भी विभाजन किया गया।
नौसेना के जहाजों, प्रतिष्ठानों और अन्य संसाधनों का पुनर्वितरण हुआ। पाकिस्तान को कराची स्थित महत्वपूर्ण नौसैनिक आधार मिला, जबकि भारत के पास अधिकांश बड़े नौसैनिक प्रतिष्ठान और जहाजों का बड़ा हिस्सा रहा।
इसी तरह वायुसेना के विमानों, स्क्वाड्रनों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य संसाधनों का भी पुनर्गठन किया गया।
कुर्सियों से लेकर किताबों तक हुआ बंटवारा
विभाजन की प्रक्रिया की जटिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सैन्य कार्यालयों और प्रतिष्ठानों की अनेक छोटी-बड़ी वस्तुओं तक का हिसाब रखा गया।
मेस का सामान, फर्नीचर, टाइपराइटर, बैंड के उपकरण, लाइब्रेरी की सामग्री और अन्य संपत्तियों को भी दोनों देशों के बीच बांटना पड़ा।
कई वस्तुओं का बंटवारा इतना जटिल था कि छोटी-छोटी चीजों तक की सूची तैयार करनी पड़ी।
इतिहास का सबसे कठिन सैन्य पुनर्गठन
1947 का सैन्य विभाजन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं था। इसके पीछे उन हजारों सैनिकों की व्यक्तिगत कहानियां थीं, जिनके दोस्त, साथी और कभी-कभी परिवार भी विभाजन के कारण अलग हो गए।
आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, तो हमें उस दौर की उपलब्धियों के साथ-साथ उस पीड़ा को भी याद करना चाहिए, जिसे लोगों और सैनिकों ने झेला था।
1947 में केवल एक सीमा नहीं खींची गई थी—एक साझा सैन्य विरासत भी दो अलग-अलग रास्तों पर चली गई।
🇮🇳 जय हिंद!
🇮🇳 वंदे मातरम्!
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